विश्व भर में जब मानव सभ्यता ने विज्ञान, तकनीक और संचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, तब भी कुछ समुदाय ऐसे हैं जो आज भी आदिम जीवनशैली अपनाए हुए हैं और आधुनिकता से पूरी तरह अछूते हैं। भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित उत्तर सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island) ऐसा ही एक स्थान है, जहां रहने वाली सेंटिनली जनजाति आज भी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए जीवन जीती है।
हाल ही में एक अमेरिकी नागरिक द्वारा इस द्वीप पर अवैध रूप से प्रवेश करने की घटना ने एक बार फिर उत्तर सेंटिनल द्वीप और वहाँ की जनजातियों की सुरक्षा, संस्कृति और अधिकारों को वैश्विक चर्चा में ला दिया है।
उत्तर सेंटिनल द्वीप | भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संरचना

स्थान और प्रशासनिक स्थिति
उत्तर सेंटिनल द्वीप भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का हिस्सा है, जो एक केंद्रशासित प्रदेश है। यह दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिला के अंतर्गत आता है। यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर, जो अंडमान और निकोबार की राजधानी है, से लगभग 64 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।
प्राकृतिक बनावट
यह द्वीप समुद्र में एक अलग थलग टापू के रूप में स्थित है और प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) से चारों ओर से घिरा हुआ है। यहाँ कोई प्राकृतिक बंदरगाह नहीं है, जिससे नावों या जहाजों की सीधी पहुँच अत्यंत कठिन है।
जलवायु और वनस्पति
उत्तर सेंटिनल द्वीप पर उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। पूरा द्वीप घने उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम चौड़ी पत्ती वाले वनों से ढका हुआ है। यह घना वन ही सेंटिनली जनजाति की जीवनशैली को बनाए रखने में सहायक है, क्योंकि यहीं से वे अपनी जीविका हेतु आवश्यक संसाधन प्राप्त करते हैं।
सेंटिनली जनजाति: एक आदिम संस्कृति का प्रतीक
परिचय
सेंटिनली जनजाति को दुनिया की सबसे अलग-थलग और रहस्यमयी जनजातियों में से एक माना जाता है। इनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है और ये किसी भी बाहरी व्यक्ति के संपर्क को शत्रुता से देखते हैं।
जनसंख्या
इनकी कुल जनसंख्या के बारे में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है, परंतु अनुमानतः यह संख्या 50 से 150 के बीच हो सकती है। भारतीय सरकार और शोधकर्ताओं ने समय-समय पर दूरी से निरीक्षण कर संख्या का आकलन करने की कोशिश की है।
सेंटिनली जनजाति | आजीविका और जीवनशैली
शिकार और संग्रह पर आधारित जीवन
सेंटिनली जनजाति शिकार (Hunting) और वन उपज संग्रह (Gathering) पर निर्भर रहती है। वे मुख्य रूप से धनुष-बाण, भाला और अन्य पारंपरिक हथियारों की सहायता से जंगलों से शिकार करते हैं तथा तटीय जल क्षेत्रों में मछली पकड़ते हैं।
कृषि और धातु निर्माण से दूरी
ये लोग कृषि कार्य नहीं करते और न ही इनकी संस्कृति में धातु निर्माण (Metalworking) का कोई साक्ष्य है। यद्यपि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये लोग समुद्र में बहकर आए धातु के टुकड़ों को औजार बनाने में उपयोग करते हैं।
घरों का निर्माण
इनकी झोपड़ियाँ सामान्यतः पत्तों और लकड़ियों से बनी होती हैं, जो इन्हें वर्षा और धूप से आंशिक सुरक्षा देती हैं। इनके घर छोटे समुदायों के रूप में बने होते हैं।
सेंटिनली जनजाति | संस्कृति और भाषा
भाषा
इनकी भाषा अब तक अवर्गीकृत (Unclassified) है, क्योंकि किसी भी भाषाविद को इनके संपर्क में आने का अवसर नहीं मिला है। सेंटिनली जनजाति की भाषा किसी भी ज्ञात भाषा परिवार से नहीं जुड़ती है।
संवाद और सामाजिक संरचना
इनकी सामाजिक संरचना पर भी बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है। संभवतः ये एक कबीलाई जीवन जीते हैं, जहां सामूहिक निर्णय और नेतृत्व पारंपरिक नियमों पर आधारित होते हैं।
सेंटिनली जनजाति | बाहरी संपर्क और विरोध की प्रवृत्ति
शत्रुतापूर्ण व्यवहार
सेंटिनली जनजाति बाहरी लोगों के प्रति अत्यंत शत्रुतापूर्ण मानी जाती है। इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई व्यक्ति या समूह इस द्वीप पर गया, तो उन्हें तीरों और भालों से जवाब मिला।
प्रमुख घटनाएँ
- 2006: दो मछुआरों को सेंटिनली जनजाति ने मार दिया जब वे गलती से द्वीप के पास पहुँच गए।
- 2018: अमेरिकी नागरिक जॉन एलेन चौ द्वारा जबरन मिशनरी उद्देश्य से द्वीप में प्रवेश करने पर उन्हें सेंटिनली जनजाति ने मार डाला। यह घटना वैश्विक मीडिया में व्यापक चर्चा का विषय बनी।
भारत सरकार की नीतियाँ और संरक्षण उपाय
1956 का अधिनियम
भारत सरकार ने 1956 में उत्तर सेंटिनल द्वीप को जनजातीय संरक्षित क्षेत्र घोषित किया। इसके तहत:
- द्वीप के तीन समुद्री मील (लगभग 6 किमी) के दायरे में बाहरी लोगों का प्रवेश निषिद्ध है।
- किसी भी व्यक्ति को इस क्षेत्र में जाने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।
- भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा नियमित सशस्त्र गश्त (Armed Patrol) की जाती है ताकि घुसपैठ को रोका जा सके।
विशेष दर्जा | (Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG)
भारत सरकार ने सेंटिनली जनजाति को ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG) के रूप में सूचीबद्ध किया है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य:
- उनकी संस्कृति और जीवनशैली को संरक्षण देना।
- उन्हें बाहरी दुनिया की बीमारियों से बचाना, जिनके प्रति उनकी कोई प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) नहीं है।
नैतिक और मानवाधिकार संबंधी पहलू
उत्तर सेंटिनल द्वीप और वहां की जनजाति से संबंधित मामलों में मानवाधिकार, संस्कृति की रक्षा, और प्राकृतिक जीवन के अधिकार जैसे कई जटिल सवाल उठते हैं। एक ओर जहां आधुनिक समाज इन्हें सभ्यता से जोड़ने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि उनके आदिवासी अधिकारों और स्वायत्तता का सम्मान किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी यह मानती हैं कि ऐसे जनजातीय समूहों को तब तक अपनी पारंपरिक जीवनशैली में जीने दिया जाना चाहिए, जब तक वे स्वयं बदलाव के लिए तत्पर न हों।
भविष्य की चुनौती: संतुलन बनाना
भारत सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सेंटिनली जनजाति को:
- संरक्षण प्रदान किया जाए, बिना जबरदस्ती संपर्क किए।
- किसी भी प्राकृतिक या मानवजनित खतरे से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- उनके प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता को अक्षुण्ण रखा जाए।
इस संतुलन को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि मानव सभ्यता के इस अनोखे पक्ष की पहचान बनी रहे।
उत्तर सेंटिनल द्वीप न केवल एक भौगोलिक स्थान है, बल्कि यह मानव इतिहास और संस्कृति का एक अनूठा अध्याय भी है। यह द्वीप और वहाँ की जनजाति हमें यह याद दिलाते हैं कि आधुनिकता के अंधाधुंध विस्तार में हमें उन लोगों के अधिकारों का भी उतना ही सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने हमारी दुनिया की परिधि में रहने का विकल्प नहीं चुना।
इस रहस्यमयी द्वीप की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, समझदारी और मानवता से संभव है। जब तक सेंटिनली जनजाति स्वयं दुनिया से जुड़ने का निर्णय नहीं लेती, तब तक उन्हें उनके जीवन के साथ छोड़ देना ही सबसे बड़ा सम्मान होगा।
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