भारत ने पिछले दो दशकों में वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में अपनी भूमिका और प्रभाव को लगातार मजबूत किया है। विश्व व्यापार संगठन (WTO), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), ब्रिक्स बैंक (NDB) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में भारतीय विशेषज्ञों की उपस्थिति और नेतृत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में 28 अगस्त 2025 को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को IMF का कार्यकारी निदेशक (Executive Director) नियुक्त किया गया।
यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक कूटनीति, बौद्धिक योगदान और वित्तीय नेतृत्व का वैश्विक स्तर पर सम्मान भी है। उर्जित पटेल की यह नियुक्ति इस बात का प्रतीक है कि भारत अब न केवल तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता और नीति निर्माण में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।
उर्जित पटेल की नियुक्ति का विवरण
- तिथि – 28 अगस्त 2025
- पद – कार्यकारी निदेशक, IMF
- कार्यकाल – 3 वर्ष
- भूमिका – भारत और उसके निर्वाचन क्षेत्र के अन्य देशों का प्रतिनिधित्व करना, IMF के बोर्ड में नीति निर्धारण और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेना।
यह नियुक्ति भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि IMF जैसे संस्थान वैश्विक वित्तीय नीतियों, मुद्रा स्थिरता, ऋण प्रबंधन और विकासशील देशों की सहायता में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भारत का मजबूत प्रतिनिधित्व उसकी आर्थिक प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर बेहतर ढंग से प्रस्तुत करेगा।
IMF में कार्यकारी निदेशक की भूमिका
IMF का कार्यकारी बोर्ड, संगठन की रीढ़ है। इसमें 24 सदस्य शामिल होते हैं जो विभिन्न देशों या देशों के समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत परंपरागत रूप से श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान और मालदीव जैसे दक्षिण एशियाई देशों के साथ एक निर्वाचन समूह का हिस्सा रहा है।
एक कार्यकारी निदेशक के रूप में उर्जित पटेल की जिम्मेदारियाँ होंगी:
- IMF की ऋण नीति और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों पर निर्णय में भाग लेना।
- विकासशील देशों की ऋण समस्याओं पर व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान सुझाना।
- भारत की मौद्रिक और वित्तीय प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना।
- वैश्विक वित्तीय संकटों या अस्थिरताओं की स्थिति में बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- IMF की निगरानी प्रणाली और नीति सुधारों में योगदान देना।
उर्जित पटेल की पेशेवर यात्रा
आरंभिक जीवन और शिक्षा
- जन्म: 1963, नैरोबी (केन्या)
- शिक्षा:
- ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम.फिल. (Economics)
- येल विश्वविद्यालय से पीएचडी (Economics)
- अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय वित्त में गहन शोध और प्रकाशन।
IMF और प्रारंभिक करियर
उर्जित पटेल ने अपने करियर की शुरुआत IMF से ही की थी। उन्होंने वहां भारत, अमेरिका, म्यांमार और बहामास जैसे देशों में कार्य किया। यह अनुभव उन्हें वैश्विक वित्तीय तंत्र की गहरी समझ प्रदान करता है।
निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में योगदान
- निजी क्षेत्र: कई परामर्श कंपनियों और बहुराष्ट्रीय संगठनों में कार्य किया।
- भारत सरकार और राज्य सरकारों के सलाहकार: ऊर्जा क्षेत्र, सार्वजनिक वित्त और मौद्रिक नीति पर महत्वपूर्ण योगदान।
- RBI में उप-गवर्नर: 2013–2016 के बीच मौद्रिक नीति समिति के डिजाइन और कार्यान्वयन में प्रमुख भूमिका निभाई।
RBI के 24वें गवर्नर के रूप में कार्यकाल (2016–2018)
डॉ. उर्जित पटेल ने 4 सितंबर 2016 को आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल आर्थिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाओं से भरा रहा।
1. नोटबंदी (Demonetisation)
- नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹500 और ₹1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की।
- यह निर्णय काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए लिया गया था।
- उर्जित पटेल की नेतृत्व क्षमता इस संकट में परखी गई। बैंकिंग व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव पड़ा और देश की वित्तीय प्रणाली में भारी उथल-पुथल हुई।
2. वस्तु एवं सेवा कर (GST) का क्रियान्वयन
- जुलाई 2017 में GST लागू हुआ।
- यह भारत के कर ढांचे का सबसे बड़ा सुधार था, जिसमें RBI की भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण रही।
- नकदी प्रवाह, डिजिटल लेन-देन और कर संग्रहण की निगरानी में RBI ने सक्रिय भूमिका निभाई।
3. RBI–सरकार विवाद
उनके कार्यकाल के अंतिम वर्ष में केंद्र सरकार और RBI के बीच कई मुद्दों पर विवाद सामने आया।
- RBI की स्वायत्तता – सरकार चाहती थी कि RBI अधिक उधारी और तरलता उपलब्ध कराए जबकि RBI वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा था।
- अधिशेष भंडार का हस्तांतरण – सरकार ने RBI से लगभग ₹3.6 लाख करोड़ का अधिशेष भंडार मांग लिया, जिसे लेकर गंभीर मतभेद हुए।
- अंततः दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के बाद की गतिविधियाँ
गवर्नर पद छोड़ने के बाद उर्जित पटेल ने अकादमिक और परामर्श क्षेत्र में वापसी की।
- उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर और शोधकर्ता के रूप में कार्य किया।
- भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंकों के साथ जुड़े रहे।
- ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय स्थिरता पर कई महत्वपूर्ण लेख और पुस्तकें लिखीं।
भारत की वैश्विक आर्थिक कूटनीति में महत्व
भारत का IMF में प्रतिनिधित्व केवल सांकेतिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कारण
- भारत की अर्थव्यवस्था का आकार – 3.8 ट्रिलियन डॉलर (2025) से अधिक, जो विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- G20 सदस्यता – भारत अब वैश्विक आर्थिक चर्चाओं का केंद्र है।
- विकासशील देशों की आवाज़ – IMF जैसे संस्थानों में भारत अन्य विकासशील देशों के हितों की रक्षा भी करता है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और फिनटेक – भारत का अनुभव दुनिया के लिए मॉडल बन रहा है।
उर्जित पटेल जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री की नियुक्ति से भारत की आवाज और मजबूत होगी।
उर्जित पटेल की नई भूमिका से संभावित लाभ
भारत के लिए
- IMF में नीतिगत फैसलों पर भारत का प्रभाव बढ़ेगा।
- विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा जा सकेगा।
- भारत की मौद्रिक नीतियों और डिजिटल भुगतान मॉडल को वैश्विक पहचान मिलेगी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में
- ऋण संकट झेल रहे देशों (जैसे श्रीलंका, पाकिस्तान, अफ्रीकी देश) के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाए जा सकेंगे।
- वित्तीय स्थिरता और मुद्रा प्रबंधन में नए दृष्टिकोण सामने आएंगे।
- वैश्विक दक्षिण (Global South) को मजबूत नेतृत्व मिलेगा।
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
हालाँकि उर्जित पटेल की नियुक्ति स्वागत योग्य है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी होंगी:
- IMF पर विकसित देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व।
- ऋण वितरण में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना।
- भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देशों के बीच प्रतिस्पर्धा।
- जलवायु परिवर्तन और हरित वित्त (Green Finance) जैसे नए मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण।
निष्कर्ष
डॉ. उर्जित पटेल की IMF में कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्ति भारत के आर्थिक कूटनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उनका करियर, अनुभव और वैश्विक दृष्टिकोण न केवल भारत बल्कि पूरे विकासशील विश्व के लिए लाभकारी होगा।
भारत ने जिस तरह IMF, विश्व बैंक और अन्य संस्थानों में अपनी पकड़ मजबूत की है, वह आने वाले समय में इसे एक वैश्विक आर्थिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करेगा। उर्जित पटेल की यह भूमिका भारत की आवाज को और सशक्त करेगी तथा वैश्विक वित्तीय नीतियों में एक भारतीय दृष्टिकोण को स्थान दिलाएगी।
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