भारत में रामसर स्थल | Ramsar Sites in India | 2025

रामसर स्थल रामसर कन्वेंशन के तहत एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि है, जिसे आर्द्रभूमि पर कन्वेंशन के रूप में भी जाना जाता है। यह रामसर स्थलों के संरक्षण और सतत उपयोग पर एक अंतरराष्ट्रीय यूनेस्को संधि है। यह 1975 से संचालित हो रहा है। रामसर कन्वेंशन का नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है, जहां यह 1971 में हुआ था। रामसर साइट पदनाम आर्द्रभूमि के संरक्षण और प्रबंधन और उनके संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देता है।

Table of Contents

रामसर स्थल क्या होते है? | What is Ramsar Site?

रामसर आर्द्रभूमि या नम भूमि रामसर कन्वेंशन के तहत “अंतर्राष्ट्रीय महत्व” के रूप में नामित आर्द्रभूमि हैं। अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए, विशेष रूप से जलपक्षी के आवास के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे वेटलैंड्स पर कन्वेंशन के रूप में भी जाना जाता है। इसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है, जहां 1971 में सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

रामसर अभिसमय क्या है? 

रामसर अभिसमय (रामसर वेटलैंड्स कन्वेंशन) एक अंतर-सरकारी संधि है, जिसको 2 फरवरी, 1971 को कैस्पियन सागर के दक्षिणी तट पर स्थित ईरानी शहर रामसर में अपनाया गया था। भारत में यह 1 फरवरी, 1982 को लागू किया गया, जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में घोषित किया गया।

आर्द्रभूमि किसे कहते हैं?

आर्द्रभूमि स्थलीय और जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के बीच संक्रमण वाले क्षेत्र हैं जहां जल स्तर सतह पर या उसके निकट होता है या जहां भूमि उथले पानी से ढकी होती है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस (WWD) | World Wet Day

विश्व आर्द्रभूमि दिवस (WWD) 2 फरवरी, 1971 को आर्द्रभूमि पर इस अंतर्राष्ट्रीय समझौते को अपनाने के उपलक्ष्य में विश्व भर में मनाया जाता है। इसका विषय ‘वेटलैंड्स एंड ह्यूमन वेलबीइंग’ है। यह हमारे मानव जीवन को बेहतर बनाने में आर्द्र्भूमि की महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। तथा इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे आर्द्रभूमियाँ बाढ़ सुरक्षा, स्वच्छ जल एवं जैवविविधता मानव जाति के स्वास्थ्य तथा समृद्धि के लिये आवश्यक हैं।

भारत में रामसर स्थल : परिचय एवं राज्यवार विवरण (जनवरी 2026 तक)

रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) हैं जिन्हें रामसर कन्वेंशन (1971) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्राप्त है। ये स्थल जैव विविधता संरक्षण, जल संतुलन, प्रवासी पक्षियों के आवास तथा स्थानीय आजीविका के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।

जनवरी 2026 तक भारत में कुल 98 रामसर स्थल हैं, जो लगभग 13,60,805.63 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। भारत में रामसर स्थलों की संख्या में 2014 के बाद तीव्र वृद्धि हुई है—जहाँ 2014 तक केवल 26 स्थल थे, वहीं उसके बाद 67 नए रामसर स्थल जोड़े गए।

इनमें तमिलनाडु (20 स्थल) सबसे अधिक रामसर स्थलों वाला राज्य है, इसके बाद उत्तर प्रदेश (10 स्थल) का स्थान आता है। हालांकि, WWF-India के अनुसार भारत की आर्द्रभूमियाँ अत्यधिक संकटग्रस्त पारितंत्रों में शामिल हैं, जिन पर अतिक्रमण, प्रदूषण, अत्यधिक विकास, आक्रामक प्रजातियाँ और सड़क निर्माण जैसे अनेक खतरे मंडरा रहे हैं।

भारत में रामसर स्थल : राज्य/केंद्रशासित प्रदेशवार तालिका

राज्य / केंद्रशासित प्रदेशरामसर स्थलों की संख्याप्रमुख रामसर स्थल
आंध्र प्रदेश1कोल्लेरू झील (Kolleru Lake)
असम1दीपोर बील (Deepor Beel)
बिहार6काबर झील (Kanwar Lake/Taal): बेगूसराय।
नागी पक्षी अभयारण्य (Nagi Bird Sanctuary): जमुई।
नकटी पक्षी अभयारण्य (Nakti Bird Sanctuary): जमुई।
गोगाबील झील (Gogabeel Lake): कटिहार।
गोकुल जलाशय (Gokul Jalashay): बक्सर।
उदयपुर झील (Udaypur Lake): पश्चिमी चंपारण। 
छत्तीसगढ़1कोपरा जलाशय (Kopra Reservoir)
गोवा1नंदा झील (Nanda Lake)
गुजरात4नलसरोवर पक्षी अभयारण्य, 
थोल झील वन्यजीव अभयारण्य, 
वधवाना आर्द्रभूमि, 
खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य,
और हाल ही में शामिल 
कच्छ छारी-ढांड
हरियाणा2सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान,
भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य
हिमाचल प्रदेश3रेणुका झील,
पौंग बांध झील,
चंद्रताल
जम्मू और कश्मीर5वुलर झील (Wular Lake), 
होकरसर आर्द्रभूमि (Hokersar Wetland), 
सुरिंसर-मंसार झीलें (Surinsar-Mansar Lakes), 
हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व (Haigam Wetland Conservation Reserve) 
शालबुग आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व (Shallabugh Wetland Conservation Reserve)
झारखंड1 उधवा झील पक्षी अभयारण्य (Udhwa Lake Bird Sanctuary)
कर्नाटक4रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य (Ranganathittu Bird Sanctuary),
अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिजर्व (Ankasamudra Bird Conservation Reserve),
मगदी केरे संरक्षण रिजर्व (Magadi Kere Conservation Reserve),
अघनाशिनी मुहाना (Aghanashini Estuary)
केरल3वेम्बनाड-कोले आर्द्रभूमि (Vembanad-Kol Wetland),
अष्टमुडी आर्द्रभूमि (Ashtamudi Wetland),
सस्थमकोट्टा झील (Sasthamkotta Lake)
लद्दाख2त्सो मोरीरी (Tso Moriri) झील,
त्सो कार (Tso Kar) आर्द्रभूमि परिसर
मध्य प्रदेश5भोज वेटलैंड (Bhoj Wetland),
सांख्य सागर (Sakhya Sagar),
सिरपुर तालाब (Sirpur Lake),
यशवंत सागर (Yashwant Sagar),
तवा जलाशय (Tawa Reservoir)
महाराष्ट्र3नंदुर-मध्यमेश्वर (Nandur Madhameshwar),
लोनार झील (Lonar Lake),
ठाणे क्रीक (Thane Creek)
मणिपुर1लोकटक झील (Loktak Lake)
मिजोरम1पाला आर्द्रभूमि (Pala Wetland) या पाला झील
ओडिशा6चिल्का झील (Chilika Lake),
भितरकनिका मैंग्रोव (Bhitarkanika Mangroves),
सतकोसिया गॉर्ज (Satkosia Gorge),
अंसुपा झील (Ansupa Lake),
हीराकुंड जलाशय (Hirakud Reservoir),
ताम्पारा झील (Tampara Lake)
पंजाब6हरिके वेटलैंड (Harike Wetland),
कांजली वेटलैंड (Kanjli Wetland),
रोपड़ वेटलैंड (Ropar Wetland),
केशोपुर-मियां सामुदायिक रिजर्व (Keshopur-Miani Community Reserve),
ब्यास संरक्षण रिजर्व (Beas Conservation Reserve),
नांगल वन्यजीव अभयारण्य (Nangal Wildlife Sanctuary)
राजस्थान5केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park),
सांभर झील (Sambhar Lake),
खिचन पक्षी अभयारण्य (Khichan Bird Sanctuary),
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स (Menar Wetland Complex),
सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake)
सिक्किम1खेचेओपालरी आर्द्रभूमि (Khecheopalri Wetland)
तमिलनाडु20पॉइंट कैलीमेरे वन्यजीव एवं पक्षी अभयारण्य
मन्नार की खाड़ी समुद्री बायोस्फीयर रिजर्व
सक्काराकोट्टई पक्षी अभयारण्य (रामनाथपुरम)
थेरथंगल पक्षी अभयारण्य (रामनाथपुरम)
कराईवेट्टी पक्षी अभयारण्य (अरियालुर)
लॉन्गवुड शोला रिजर्व फॉरेस्ट (नीलगिरी)
नंजरायन पक्षी अभयारण्य
काज़ुवेली पक्षी अभयारण्य
सुचिन्द्रम थेरूर आर्द्रभूमि कॉम्प्लेक्स
वडुवूर पक्षी अभयारण्य
कांजीरकुलम पक्षी अभयारण्य
पल्लिकरनाई मार्श रिजर्व फॉरेस्ट
पिचावरम मैंग्रोव
वेदांतंगल पक्षी अभयारण्य
करीकिली पक्षी अभयारण्य
कूनथकुलम पक्षी अभयारण्य
वेम्बन्नूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स
उधयमर्थंदपुरम पक्षी अभयारण्य
चितरांगुडी पक्षी अभयारण्य
वेलोड पक्षी अभयारण्य 
त्रिपुरा1रुद्रसागर झील (Rudrasagar Lake)
उत्तर प्रदेश10पटना पक्षी अभयारण्य (एटा): 2026 में शामिल।
बखीरा वन्यजीव अभयारण्य (संत कबीर नगर): 2022 में शामिल।
हैदरपुर वेटलैंड (मुजफ्फरनगर/बिजनौर): 2021 में शामिल।
सूर सरोवर (आगरा/कीठम झील),
सरसई नावर झील (इटावा),
सांडी पक्षी अभयारण्य (हरदोई),
समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली),
समन पक्षी अभयारण्य (मैनपुरी),
पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य (गोंडा),
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव),
ऊपरी गंगा नदी (ब्रजघाट से नरोरा): राज्य का पहला (2005) और सबसे बड़ा रामसर स्थल। 
उत्तराखंड1आसन संरक्षण अभयारण्य (Asan Conservation Reserve) 
पश्चिम बंगाल2सुंदरबन आर्द्रभूमि (Sundarban Wetland),
पूर्व कोलकाता आर्द्रभूमि (East Kolkata Wetlands)
कुल98

भारत में रामसर स्थल : नामानुसार (Alphabetical Order)

(जनवरी 2026 तक)

नीचे भारत के सभी रामसर स्थलों को रामसर स्थल के नाम के अनुसार वर्णानुक्रम (A–Z / हिंदी वर्णक्रम) में व्यवस्थित किया गया है, ताकि अध्ययन और संदर्भ में आसानी हो।

क्रमरामसर स्थल का नामराज्य / केंद्रशासित प्रदेश
1अघनाशिनी मुहाना (Aghanashini Estuary)कर्नाटक
2अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिजर्वकर्नाटक
3अंसुपा झील (Ansupa Lake)ओडिशा
4आसन संरक्षण अभयारण्य (Asan Conservation Reserve)उत्तराखंड
5अष्टमुडी आर्द्रभूमि (Ashtamudi Wetland)केरल
6बखीरा वन्यजीव अभयारण्यउत्तर प्रदेश
7ब्यास संरक्षण रिजर्व (Beas Conservation Reserve)पंजाब
8भिंडावास वन्यजीव अभयारण्यहरियाणा
9भितरकनिका मैंग्रोव (Bhitarkanika Mangroves)ओडिशा
10भोज वेटलैंड (Bhoj Wetland)मध्य प्रदेश
11चंद्रतालहिमाचल प्रदेश
12चिल्का झील (Chilika Lake)ओडिशा
13चितरांगुडी पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
14दीपोर बील (Deepor Beel)असम
15पूर्व कोलकाता आर्द्रभूमि (East Kolkata Wetlands)पश्चिम बंगाल
16गोगाबील झील (Gogabeel Lake)बिहार
17गोकुल जलाशय (Gokul Jalashay)बिहार
18हैदरपुर वेटलैंडउत्तर प्रदेश
19हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वजम्मू और कश्मीर
20हरिके वेटलैंड (Harike Wetland)पंजाब
21हीराकुंड जलाशय (Hirakud Reservoir)ओडिशा
22होकरसर आर्द्रभूमि (Hokersar Wetland)जम्मू और कश्मीर
23काज़ुवेली पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
24कांजली वेटलैंड (Kanjli Wetland)पंजाब
25कांजीरकुलम पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
26काबर झील (Kanwar Lake/Taal)बिहार
27करिकिली पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
28कराईवेट्टी पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
29केशोपुर-मियां सामुदायिक रिजर्वपंजाब
30केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park)राजस्थान
31खेचेओपालरी आर्द्रभूमि (Khecheopalri Wetland)सिक्किम
32खिचन पक्षी अभयारण्यराजस्थान
33खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्यगुजरात
34कोल्लेरू झील (Kolleru Lake)आंध्र प्रदेश
35कोपरा जलाशय (Kopra Reservoir)छत्तीसगढ़
36कुनथकुलम पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
37लोकटक झील (Loktak Lake)मणिपुर
38लोनार झील (Lonar Lake)महाराष्ट्र
39लॉन्गवुड शोला रिजर्व फॉरेस्टतमिलनाडु
40मगदी केरे संरक्षण रिजर्वकर्नाटक
41मन्नार की खाड़ी समुद्री बायोस्फीयर रिजर्वतमिलनाडु
42मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्सराजस्थान
43नागी पक्षी अभयारण्यबिहार
44नकटी पक्षी अभयारण्यबिहार
45नलसरोवर पक्षी अभयारण्यगुजरात
46नंदा झील (Nanda Lake)गोवा
47नंदुर-मध्यमेश्वरमहाराष्ट्र
48नांगल वन्यजीव अभयारण्यपंजाब
49नंजरायन पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
50नवाबगंज पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
51पाला आर्द्रभूमि (Pala Wetland)मिजोरम
52पल्लिकरनाई मार्श रिजर्व फॉरेस्टतमिलनाडु
53पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
54पटना पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
55पिचावरम मैंग्रोवतमिलनाडु
56पॉइंट कैलीमेरे वन्यजीव एवं पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
57पौंग बांध झीलहिमाचल प्रदेश
58रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्यकर्नाटक
59रेणुका झीलहिमाचल प्रदेश
60रोपड़ वेटलैंड (Ropar Wetland)पंजाब
61रुद्रसागर झील (Rudrasagar Lake)त्रिपुरा
62सक्काराकोट्टई पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
63साख्य सागर (Sakhya Sagar)मध्य प्रदेश
64समन पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
65समसपुर पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
66सांभर झील (Sambhar Lake)राजस्थान
67सांडी पक्षी अभयारण्यउत्तर प्रदेश
68सरसई नावर झीलउत्तर प्रदेश
69सास्थमकोट्टा झील (Sasthamkotta Lake)केरल
70सतकोसिया गॉर्ज (Satkosia Gorge)ओडिशा
71शालबुग आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वजम्मू और कश्मीर
72सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake)राजस्थान
73सिरपुर तालाब (Sirpur Lake)मध्य प्रदेश
74सुचिन्द्रम थेरूर आर्द्रभूमि कॉम्प्लेक्सतमिलनाडु
75सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यानहरियाणा
76सुंदरबन आर्द्रभूमि (Sundarban Wetland)पश्चिम बंगाल
77सूर सरोवर (केथम झील)उत्तर प्रदेश
78सुरिंसर-मंसार झीलेंजम्मू और कश्मीर
79तम्पारा झील (Tampara Lake)ओडिशा
80तवा जलाशय (Tawa Reservoir)मध्य प्रदेश
81ठाणे क्रीक (Thane Creek)महाराष्ट्र
82थेरथंगल पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
83थोल झील वन्यजीव अभयारण्यगुजरात
84त्सो कार (Tso Kar) आर्द्रभूमि परिसरलद्दाख
85त्सो मोरीरी (Tso Moriri) झीललद्दाख
86उधयमर्थंदपुरम पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
87उधवा झील पक्षी अभयारण्यझारखंड
88उदयपुर झीलबिहार
89ऊपरी गंगा नदी (ब्रजघाट से नरोरा)उत्तर प्रदेश
90वडुवूर पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
91वधवाना आर्द्रभूमिगुजरात
92वेदांतंगल पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
93वेलोड पक्षी अभयारण्यतमिलनाडु
94वेम्बनाड-कोले आर्द्रभूमिकेरल
95वेम्बन्नूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्सतमिलनाडु
96वुलर झील (Wular Lake)जम्मू और कश्मीर
97यशवंत सागर (Yashwant Sagar)मध्य प्रदेश
98कच्छ छारी-ढांडगुजरात

कुल: 98 रामसर स्थल

नोट: यह सूची जनवरी 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित है। नए स्थलों को मान्यता मिलने पर यह संख्या बढ़ सकती है।

भारत में सबसे बड़ा, सबसे छोटा और सबसे पुराना रामसर स्थल

नीचे दी गई सारणी में भारत में सबसे बड़ी, सबसे छोटी और सबसे पुरानी रामसर साइट के बारे दिया गया है।

क्र.संभारत में रामसर साइटेंराज्यक्षेत्रफल (वर्ग किलोमीटर)
1सुंदरवन आर्द्रभूमि ( सबसे बड़ा )पश्चिम बंगाल4230
2रेणुका आर्द्रभूमि ( सबसे छोटा )हिमाचल प्रदेश0.2
3चिल्का झील ( सबसे पुरानी )ओडिशा1165

भारत में रामसर स्थल : परिचय एवं महत्व

रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) हैं जिन्हें रामसर कन्वेंशन (1971) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्राप्त है। ये आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता संरक्षण, जल संतुलन बनाए रखने, प्रवासी पक्षियों के आवास, तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
पारिस्थितिक दृष्टि से ये स्थल प्राकृतिक आपदा नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में रामसर स्थलों की वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026 तक)

जनवरी 2026 तक भारत में कुल 98 रामसर स्थल अधिसूचित किए जा चुके हैं, जो लगभग 13,60,805.63 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विस्तारित हैं।
यह उपलब्धि भारत को विश्व के उन देशों में अग्रणी बनाती है जहाँ आर्द्रभूमि संरक्षण को नीति-स्तर पर प्राथमिकता दी गई है।

2014 के बाद रामसर स्थलों में तीव्र वृद्धि

भारत में रामसर स्थलों की संख्या में 2014 के बाद उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि देखने को मिली है।

  • 2014 तक भारत में केवल 26 रामसर स्थल थे।
  • 2014 से 2026 के बीच कुल 67 नए रामसर स्थल जोड़े गए।

यह परिवर्तन भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण नीति में गुणात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ संरक्षण को केवल पर्यावरणीय मुद्दा न मानकर सतत विकास से जोड़ा गया।

वार्षिक वृद्धि का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य : 2022 बनाम 2024

रामसर स्थलों की वृद्धि को वर्षवार देखने पर स्पष्ट होता है कि—

  • 1982–2013 की अवधि में कुल 26 स्थल जोड़े गए।
  • 2014–2024 के बीच लगभग 59 नए स्थल शामिल हुए।
  • सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 2022 में हुई, जब 19 रामसर स्थल एक ही वर्ष में अधिसूचित किए गए।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि 2024 सबसे अधिक वृद्धि वाला वर्ष नहीं था, बल्कि वृद्धि एक कई-वर्षों में फैली सतत प्रक्रिया रही है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2024 और नए रामसर स्थल

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2024 (2 फरवरी) की पूर्व संध्या पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पाँच नई आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल घोषित किया।
इस घोषणा के साथ भारत में रामसर स्थलों की संख्या 75 से बढ़कर 80 हो गई।

इन पाँच स्थलों में—

  • कर्नाटक (3 स्थल)
    • अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिज़र्व
    • अघनाशिनी मुहाना
    • मगादी केरे संरक्षण रिज़र्व
  • तमिलनाडु (2 स्थल)
    • कराईवेट्टी पक्षी अभयारण्य
    • लॉन्गवुड शोला रिज़र्व वन

2024 में यह विस्तार नीतिगत और प्रतीकात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, हालांकि यह सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि नहीं थी।

राज्यवार वितरण : तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की अग्रणी भूमिका

राज्यवार दृष्टि से—

  • तमिलनाडु भारत में सबसे अधिक रामसर स्थल (20 स्थल) वाला राज्य है।
  • इसके बाद उत्तर प्रदेश (10 स्थल) का स्थान आता है।

यह वितरण दर्शाता है कि कुछ राज्यों ने आर्द्रभूमि संरक्षण को राज्य स्तरीय प्राथमिकता के रूप में अपनाया है।

2025–2026 तक निरंतर विस्तार

2024 के बाद भी रामसर स्थलों में वृद्धि जारी रही—

  • 2025 में 4–6 से अधिक नए स्थल जोड़े गए।
  • 2026 की शुरुआत तक कुल संख्या 98 तक पहुँच गई।

इससे स्पष्ट है कि भारत में रामसर स्थल विस्तार एक निरंतर और क्रमिक प्रक्रिया रही है, न कि किसी एक वर्ष तक सीमित घटना।

आर्द्रभूमियों पर मंडराते खतरे

हालाँकि संख्या में वृद्धि हुई है, फिर भी WWF-India के अनुसार भारत की आर्द्रभूमियाँ सबसे अधिक संकटग्रस्त पारितंत्रों में शामिल हैं।
इन पर प्रमुख खतरे हैं—

  • अतिक्रमण
  • प्रदूषण
  • अनियंत्रित शहरी एवं औद्योगिक विकास
  • आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ
  • सड़क एवं अवसंरचना निर्माण

ये सभी कारक आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक संतुलन और दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत में रामसर स्थलों की वृद्धि 2014 के बाद तेज, सतत और बहुवर्षीय रही है।

  • 2022 सबसे अधिक वृद्धि वाला वर्ष रहा।
  • 2024 एक महत्वपूर्ण लेकिन तुलनात्मक रूप से सीमित वृद्धि वर्ष था।

आगे की चुनौती केवल संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि इन आर्द्रभूमियों के प्रभावी संरक्षण और सतत प्रबंधन की है।


इन्हें भी देखें –

Leave a Comment

Table of Contents

Contents
सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.