भारत की सभ्यता केवल अतीत की गौरवगाथाओं में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में भी निहित है। इस भविष्य का सबसे सशक्त वाहक युवा वर्ग है। इसी कारण भारत में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को—महान संन्यासी, दार्शनिक, राष्ट्रचिंतक और युवा प्रेरणा-स्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है।
वर्ष 2026 में स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें दी गई श्रद्धांजलि यह संकेत देती है कि विवेकानंद केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आज भी भारत की नीतियों, युवाओं की आकांक्षाओं और वैश्विक दृष्टि के मूल में विद्यमान हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि युवा आत्मचिंतन, राष्ट्रीय पुनर्जागरण और नैतिक नेतृत्व का उत्सव है।
स्वामी विवेकानंद : जीवन और व्यक्तित्व का संक्षिप्त परिचय
जन्म और प्रारंभिक जीवन
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। बचपन से ही वे असाधारण मेधा, जिज्ञासा और तर्कशीलता के प्रतीक थे। पश्चिमी दर्शन, संगीत, साहित्य और भारतीय शास्त्र—सबका उन्होंने गहन अध्ययन किया।
गुरु रामकृष्ण परमहंस और आध्यात्मिक जागरण
नरेन्द्रनाथ के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब वे रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आए। रामकृष्ण ने उन्हें यह अनुभव कराया कि—
“धर्म केवल ग्रंथों में नहीं, प्रत्यक्ष अनुभूति में है।”
गुरु के सान्निध्य में नरेन्द्रनाथ ने संन्यास ग्रहण किया और स्वामी विवेकानंद के रूप में मानवता की सेवा का व्रत लिया।
शिकागो धर्म संसद (1893): भारत की आत्मा की वैश्विक उद्घोषणा
ऐतिहासिक भाषण
1893 में अमेरिका के शिकागो नगर में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद का वह ऐतिहासिक उद्घोष—
“Sisters and Brothers of America…”
सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की आत्मा का उद्घोष था।
मुख्य संदेश
- सभी धर्म सत्य की ओर जाने वाले मार्ग हैं
- सहिष्णुता नहीं, स्वीकार्यता (Acceptance) आवश्यक है
- भारत केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि मानवता का मार्गदर्शक है
इस भाषण के बाद भारत को पहली बार पश्चिम ने केवल एक उपनिवेश नहीं, बल्कि दार्शनिक राष्ट्र के रूप में देखा।
स्वामी विवेकानंद का दर्शन : व्यावहारिक वेदांत
1. व्यावहारिक वेदांत (Practical Vedanta)
विवेकानंद ने वेदांत को जीवन से जोड़ दिया। उनके अनुसार—
- धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं
- ईश्वर की सच्ची आराधना है—मनुष्य की सेवा
उन्होंने ‘दरिद्र नारायण’ की अवधारणा दी—
“गरीब, पीड़ित और शोषित मनुष्य में ही ईश्वर का वास है।”
इस प्रकार वेदांत सामाजिक सेवा का आधार बन गया।
2. राष्ट्रवाद और आध्यात्मिक शक्ति
विवेकानंद का राष्ट्रवाद—
- सांस्कृतिक था
- नैतिक था
- आत्मबल पर आधारित था
उन्होंने कहा—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
यह केवल व्यक्तिगत प्रेरणा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का मंत्र है।
उनका राष्ट्रवाद किसी से घृणा नहीं सिखाता, बल्कि आत्म-सम्मान सिखाता है।
3. शिक्षा पर विचार : चरित्र निर्माण का साधन
स्वामी विवेकानंद के अनुसार—
“शिक्षा मनुष्य के भीतर निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।”
उनकी शिक्षा-दृष्टि में—
- केवल सूचना नहीं
- चरित्र निर्माण
- आत्मनिर्भरता
- नैतिक साहस
शामिल हैं। आज की नई शिक्षा नीति (NEP) में विवेकानंद की यही चेतना परिलक्षित होती है।
4. सार्वभौमिक सहिष्णुता और स्वीकार्यता
विवेकानंद ने कहा—
- सभी धर्म सत्य के मार्ग हैं
- टकराव नहीं, संवाद आवश्यक है
उन्होंने सहिष्णुता से आगे बढ़कर स्वीकार्यता (Acceptance) का विचार दिया, जो आज के बहुसांस्कृतिक विश्व में अत्यंत प्रासंगिक है।
सामाजिक सुधारक विवेकानंद
रामकृष्ण मिशन (1897)
गुरु रामकृष्ण की स्मृति में स्थापित रामकृष्ण मिशन—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- आपदा राहत
- महिला सशक्तिकरण
के क्षेत्र में आज भी भारत और विश्व में कार्यरत है।
सामाजिक बुराइयों पर प्रहार
विवेकानंद ने—
- जातिवाद
- छुआछूत
- महिला अशिक्षा
का प्रखर विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति महिलाओं की स्थिति से मापी जाती है।
राष्ट्रीय युवा दिवस : उद्देश्य और महत्व
घोषणा
भारत सरकार ने 1984 में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया।
उद्देश्य
- युवाओं में आत्मविश्वास
- राष्ट्रीय चेतना
- नैतिक नेतृत्व
- सामाजिक उत्तरदायित्व
का विकास करना।
यह दिवस युवाओं को उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनने की प्रेरणा देता है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विवेकानंद की प्रासंगिकता
1. विकसित भारत @ 2047
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘विकसित भारत @ 2047’ का सपना—
- आत्मनिर्भर युवा
- कौशलयुक्त समाज
- नैतिक नेतृत्व
पर आधारित है—जो विवेकानंद के विचारों का ही आधुनिक रूप है।
2. विश्व बंधुत्व और G20 : वसुधैव कुटुंबकम
भारत की विदेश नीति में—
“वसुधैव कुटुंबकम”
का भाव विवेकानंद के शिकागो संदेश से प्रेरित है। आज भारत—
- शांति
- संवाद
- सहयोग
का वैश्विक संदेशवाहक बन रहा है।
3. मानसिक स्वास्थ्य, योग और युवा
आज के युवाओं में—
- तनाव
- अवसाद
- अस्थिरता
बढ़ रही है। विवेकानंद द्वारा प्रचारित—
- राजयोग
- ध्यान
- आत्मअनुशासन
मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
निष्कर्ष : युवा भारत का पथप्रदर्शक
स्वामी विवेकानंद—
- अतीत की स्मृति नहीं
- भविष्य की दिशा हैं
राष्ट्रीय युवा दिवस हमें स्मरण कराता है कि—
“युवा शक्ति जब आध्यात्मिक चेतना से जुड़ती है, तब राष्ट्र महाशक्ति बनता है।”
आज के भारत को केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक रूप से भी महान बनने के लिए विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करना होगा।
समापन पंक्ति
स्वामी विवेकानंद केवल एक संन्यासी नहीं थे—वे भारत की आत्मा के जागृत स्वर थे।
राष्ट्रीय युवा दिवस उसी स्वर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प है।
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