भारत में परीक्षा केवल मूल्यांकन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं से जुड़ा एक भावनात्मक विषय बन चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती संख्या, अंकों की होड़, रैंक आधारित सफलता की अवधारणा और सामाजिक तुलना ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। ऐसे परिवेश में छात्रों के तनाव, भय और आत्म-संदेह को कम करने के लिए संवाद आधारित पहल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता के उत्तर के रूप में ‘परीक्षा पे चर्चा’ (Pariksha Pe Charcha – PPC) कार्यक्रम सामने आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किया गया यह कार्यक्रम शिक्षा को केवल अंक और परिणाम से आगे ले जाकर मानवीय, संवेदनशील और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। वर्ष 2026 में आयोजित परीक्षा पे चर्चा का नौवां संस्करण न केवल सहभागिता के स्तर पर ऐतिहासिक रहा, बल्कि इसके विचार और संदेश भी पहले से कहीं अधिक व्यापक और प्रासंगिक दिखाई दिए।
परीक्षा पे चर्चा : अवधारणा और उद्देश्य
‘परीक्षा पे चर्चा’ एक वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दबाव से मुक्त करना, असफलता के भय को कम करना और सीखने को आनंदमय बनाना है। यह कार्यक्रम केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों को भी समान रूप से संबोधित करता है, जिससे शिक्षा को एक साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जा सके।
इस पहल के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- परीक्षा-तनाव और मानसिक दबाव को कम करना
- छात्रों में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करना
- असफलता को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानना
- अभिभावकों को सहयोगी भूमिका अपनाने के लिए प्रेरित करना
- शिक्षकों को मार्गदर्शक और मेंटर की भूमिका में सशक्त करना
- रटंत शिक्षा के स्थान पर जिज्ञासा-आधारित सीखने को बढ़ावा देना
इस प्रकार PPC केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा-संस्कृति में दृष्टिकोण परिवर्तन का माध्यम बन चुका है।
परीक्षा पे चर्चा 2026 : आयोजन और ऐतिहासिक सहभागिता
वर्ष 2026 में ‘परीक्षा पे चर्चा’ का आयोजन 6 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया। यह कार्यक्रम अपने नौवें संस्करण में प्रवेश कर चुका था और इस बार इसकी सहभागिता ने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार—
- 4.19 करोड़ से अधिक छात्रों ने MyGov पोर्टल पर पंजीकरण कराया
- 24.84 लाख शिक्षक इस संवाद से जुड़े
- कुल मिलाकर लगभग 4.5 करोड़ छात्र, शिक्षक और अभिभावक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम से जुड़े
यह संख्या न केवल वर्ष 2025 के 3.53 करोड़ प्रतिभागियों के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से अधिक थी, बल्कि यह दर्शाती है कि परीक्षा पे चर्चा अब एक राष्ट्रीय शैक्षिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर किया गया, जिससे देश के दूर-दराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हुई।
छात्रों के साथ सीधा संवाद : परीक्षा ही जीवन नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से संवाद करते हुए सबसे पहले इसी धारणा को चुनौती दी कि परीक्षा ही जीवन का अंतिम फैसला होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“परीक्षाएँ जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक मील का पत्थर हैं।”
उन्होंने छात्रों को समझाया कि किसी एक परीक्षा का परिणाम उनके संपूर्ण व्यक्तित्व, क्षमता या भविष्य को परिभाषित नहीं कर सकता। जीवन में सफलता के अनेक रास्ते होते हैं और हर छात्र की यात्रा अलग होती है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को यह भी सलाह दी कि वे परीक्षा को “वॉरियर की तरह लें, वॉरियर नहीं”। अर्थात् परीक्षा से लड़ने के बजाय, उसे आत्मविश्वास, तैयारी और मानसिक शांति के साथ स्वीकार करें।
तुलना की संस्कृति और आत्मविश्वास
PPC 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों के बीच बढ़ती तुलना की प्रवृत्ति पर विशेष चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि—
- लगातार दूसरों से तुलना करना आत्मविश्वास को कमजोर करता है
- हर छात्र की अपनी अलग-अलग क्षमताएँ और रुचियाँ होती हैं
- सफलता का कोई एक मानक नहीं हो सकता
उन्होंने अंकों और रैंक से आगे बढ़कर निरंतर सुधार, अनुशासन और सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, छोटे-छोटे सुधार और आत्म-मूल्यांकन ही दीर्घकालिक सफलता की नींव रखते हैं।
जिज्ञासा-आधारित सीखना : पुस्तकों से आगे शिक्षा
परीक्षा पे चर्चा 2026 का एक प्रमुख विषय था—जिज्ञासा आधारित सीखना (Curiosity-Driven Learning)। प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे—
- प्रश्न पूछने की आदत विकसित करें
- केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें
- जीवन के रोज़मर्रा के अनुभवों से सीखें
- अपनी रुचियों और प्रतिभाओं को पहचानें
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि समस्या-समाधान, रचनात्मक सोच और जीवन कौशल विकसित करना होना चाहिए।
अनुशासन और दिनचर्या का महत्व
प्रधानमंत्री ने छात्रों को अनुशासन और संरचित दिनचर्या के महत्व पर भी विस्तार से समझाया। उनके अनुसार—
- नियमित दिनचर्या तनाव को कम करती है
- समय प्रबंधन से आत्मविश्वास बढ़ता है
- नींद, खेल और अध्ययन का संतुलन आवश्यक है
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अनुशासन कठोरता नहीं, बल्कि स्व-नियंत्रण और आत्म-सम्मान का प्रतीक है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और शिक्षा
PPC 2026 में पहली बार आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के संदर्भ में भी स्पष्ट संदेश दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि—
- AI सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है
- यह व्यक्तिगत सीखने में सहायक हो सकता है
- लेकिन AI मेहनत, सोच और कल्पनाशक्ति का विकल्प नहीं है
उन्होंने छात्रों को जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की सलाह दी, ताकि तकनीक मानव क्षमता को बढ़ाए, न कि उसे प्रतिस्थापित करे।
अभिभावकों के लिए संदेश : दबाव नहीं, विश्वास
परीक्षा पे चर्चा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह अभिभावकों को भी सीधे संबोधित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि—
- अत्यधिक अपेक्षाएँ और दबाव बच्चों के प्रदर्शन को नुकसान पहुँचाते हैं
- हर बच्चे की सीखने की गति और रुचि अलग होती है
- तुलना और निरंतर निगरानी आत्मविश्वास को तोड़ सकती है
उन्होंने अभिभावकों को समर्थक, प्रेरक और विश्वासपूर्ण वातावरण बनाने की सलाह दी। उनके अनुसार, भावनात्मक सुरक्षा और विश्वास बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और दीर्घकालिक सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
शिक्षकों की भूमिका : मार्गदर्शक और मेंटर
यद्यपि प्रश्न में शिक्षकों पर विस्तार से सामग्री नहीं दी गई थी, फिर भी PPC की मूल भावना के अनुरूप प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को ज्ञानदाता से अधिक मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की आवश्यकता पर बल दिया। शिक्षक छात्रों में—
- जिज्ञासा
- आत्मविश्वास
- नैतिकता
- सीखने की खुशी
को विकसित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
परीक्षा पे चर्चा : एक सामाजिक संदेश
परीक्षा पे चर्चा 2026 केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है—कि शिक्षा को डर और दबाव से मुक्त किया जाए। यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और जीवन कौशल जैसे विषयों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करता है।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें समग्र विकास, बहुआयामी प्रतिभा और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा पर ज़ोर दिया गया है।
उपसंहार
निष्कर्षतः, परीक्षा पे चर्चा 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की शिक्षा प्रणाली अब केवल अंकों और रैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहाँ संवाद, संवेदनशीलता और आत्म-विश्वास को प्राथमिकता दी जाती है।
रिकॉर्ड तोड़ सहभागिता यह दर्शाती है कि देश के करोड़ों विद्यार्थी इस पहल से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। PPC 2026 ने यह संदेश मजबूती से दिया कि—
“परीक्षा जीवन का एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं।”
इस दृष्टिकोण के साथ भारत के ‘एग्ज़ाम वॉरियर्स’ न केवल परीक्षाओं का सामना आत्मविश्वास से करेंगे, बल्कि जीवन की चुनौतियों को भी सकारात्मकता और साहस के साथ अपनाने में सक्षम बनेंगे।
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