कर्नाटक युद्ध | 1744 ई.–1763 ई.

कर्नाटक का युद्ध

कर्नाटक युद्ध भारत में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच अट्ठारहवी शताब्दी के मध्य में अपने आप को ज्यादा ताकतवर राष्ट्र बताने की एक होड़ लग गई। दोनों राष्ट्रों के बीच अपना वर्चस्व साबित करने की इस होड़ ने एक युद्ध का रूप ले लिया। इस युद्ध को कर्नाटक का युद्ध के नाम से जाना गया। इस युद्ध … Read more

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिनियम | 1773-1945

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिनियम

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अधिनियम के माध्यम से, ब्रिटिश सरकार की संसद ने कई महत्वपूर्ण, आर्थिक और प्रशासनिक सुधार स्थापित किए। इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से ब्रिटिश क्राउन के शासन को औपचारिक रूप से भारत को लाया। इसने भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिनियम … Read more

आंग्ल-मराठा युद्ध | 1775 ई. -1818 ई.

आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1818ई.)

भारत के इतिहास में तीन बार आंग्ल-मराठा युद्ध हुए हैं। ये तीनों युद्ध 1775 ई. से 1818 ई. तक चले। ये युद्ध ब्रिटिश सेनाओं और ‘मराठा महासंघ’ के बीच हुए थे। इन युद्धों का परिणाम यह हुआ कि मराठा महासंघ का पूरी तरह से विनाश हो गया। मराठों में पहले से ही आपस में काफ़ी भेदभाव थे, … Read more

शेरशाह सूरी | 1485 ई.- 1545 ई.

शेरशाह सूरी

शेरशाह सूरी सूर राजवंश की नींव रखने वाले एक ऐसे शासक थे, जिनकी बहादुरी औऱ साहस के किस्से भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे गए हैं। अपनी वीरता के बल पर शेर शाह सूरी दिल्ली के गद्दी पर बैठा और दिल्ली को उसने अपनी राजधानी बनाया। साल 1540 में शेरशाह ने मुगल साम्राज्य पर शासन किया … Read more

महाराणा प्रताप | 1540 ई.-1597 ई.

Maharana Pratap

महाराणा प्रताप का नाम भारतीय इतिहास में हमेशा उनकी वीरता और दृढ़ प्रतिज्ञा के लिए लिया जाता रहेगा। महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। वह अत्यंत पराक्रमी और एक शूरवीर योद्धा थे, जिन्होंने आखिरी दम तक मुगलों के साथ संघर्ष किया और कभी भी हार नहीं मानी। वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर ‘मेवाड़-मुकुट मणि’ राणा … Read more

तैमूर लंग | 1336 ई. – 1405 ई.

तैमूर लंग

तैमूर लंग अथवा तैमूर (1336 ई. – 1405 ई.) चौदहवीं शताब्दी का एक शासक था, जिसने महान् तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी। ‘तैमूर’ का शुद्ध शब्द ‘तिमुर’ है, जिसका अरबी भाषा में अर्थ है लोहा। तैमूर 1369 ई. में समरकंद के शासक के रूप में अपने पिता के सिंहासन पर बैठा और इसके बाद ही विश्व-विजय के लिए निकल पड़ा मेसोपोटामिया, फ़ारस और अफ़ग़ानिस्तान को … Read more

खिज्र खां | 1414 ई. – 1421 ई.

खिज्र खां | 1414 ई. - 1421 ई.

खिज्र खां सैयद वंश का संस्थापक था। ख़िज़्र ख़ाँ ने 1414 ई. में दिल्ली की राजगद्दी पर अधिकार कर लिया। ख़िज़्र ख़ाँ ने सुल्तान की उपाधि न धारण कर अपने को ‘रैयत-ए-आला’ की उपाधि से ही खुश रखा। खिज्र खान का संक्षिप्त परिचय दिल्ली के 25वें सुल्तान – खिज्र खान शासन 28 मई 1414 – 20 मई 1421 राज्याभिषेक 28 … Read more

इब्राहिम लोदी | 1480 ई.-1526 ई.

इब्राहिम लोदी | 1480 ई.-1526 ई.

इब्राहिम लोदी, लोदी वंश का अंतिम शासक था, जो अपने पिता सिकंदर लोदी के बाद लोदी वंश के सिंहासन पर अफगान सरदारों की सर्वसम्मति से बैठा। दिल्ली सल्लतनत का अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी के अंदर एक शासक के सारे गुण थे, लेकिन उसके द्धारा जल्दबाजी में लिए गए कुछ फैसलों की वजह से उसे अपने … Read more

फिरोजशाह तुगलक | 1309 ई.-1388 ई.

फिरोजशाह तुगलक

फिरोज शाह तुगलक (शासन अवधि 1351-88 ई.) मुहम्मद तुगलक का चचेरा भाई था। उसका जन्म 1309 ई. में हुआ था। उसका पिता ‘रजब’ मुहम्मद तुगलक का सिपहसालार था और माता बीबी जैला अबूहर के राजपूत सरदार रणमल की पुत्री थी। फिरोज शाह तुगलक 1351 ई. में दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर तुगलक वंश के शासक के रूप … Read more

मुहम्मद बिन तुगलक | 1300 ई.-1351 ई.

मुहम्मद बिन तुगलक

मुहम्मद बिन तुगलक मध्यकालीन भारत में तुगलक राजवंश के एक सफल शासकों में थे, जो कि इतिहास में अपनी कट्टरता के लिए काफी प्रसिद्ध थे। मुहम्मद बिन तुगलक एक बेहद विद्धान और कुशल शासक था, जिन्हें दर्शनशास्त्र, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, भौतिक विज्ञान का अच्छा ज्ञान था। इसके साथ ही मुहम्मद बिन तुगलक को संस्कृत, … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.