प्रथम स्वतंत्रता संग्राम | 1857 की क्रांति | 1857-1858

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम | 1857 की क्रांति | 1857-1858

भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम दुनिया द्वारा आदर्श स्वतंत्रता संग्राम के रूप में देखा जाता है। भारतीयों द्वारा औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाने के लिए सर्वप्रथम वर्ष 1857 ई. में वृहद् स्तर पर क्रांति की गयी थी, इस क्रांति को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है। अंग्रेजों के अत्याचारी शासन … Read more

विजयनगर साम्राज्य | 1336 ई. – 1485 ई.

विजयनगर साम्राज्य | 1336 ई. - 1485 ई.

विजयनगर, जिसका का शाब्दिक अर्थ है- ‘जीत का शहर’। प्रायः इस नगर को मध्ययुग का प्रथम हिन्दू साम्राज्य माना जाता है। चौदहवी शताब्दी में उत्पन्न विजयनगर साम्राज्य को मध्ययुग और आधुनिक औपनिवेशिक काल के बीच का संक्रान्ति-काल कहा जाता है। इस साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में दक्षिण भारत में तुग़लक़ सत्ता के विरुद्ध होने वाले राजनीतिक तथा सांस्कृतिक आन्दोलन के … Read more

सम्राट हर्षवर्धन | 590-647 ई.

सम्राट हर्षवर्धन | 590-647 ई.

हर्षवर्धन (590-647 ई.) प्राचीन भारत में एक राजा थे, जिन्होंने उत्तरी भारत में 606 ई. से 647 ई. तक शासन किया। वह वर्धन राजवंश के शासक प्रभाकरवर्धन के पुत्र थे। इनके पिता प्रभाकरवर्धन ने हूणों को पराजित किया था। हर्षवर्धन का छोटा भाई राज्यवर्धन और एक बहन थी, जिसका नाम राजश्री था। हर्षवर्धन बैस वंश के थे। ईसा की छठी शताब्दी में उत्तर भारत में एक शक्तिशाली … Read more

चौहान वंश | 7वीं शताब्दी-12वीं शताब्दी

चौहान वंश | 7वीं शताब्दी-12वीं शताब्दी

राजपूतों के प्रसिद्ध वशों में से एक वंश है चौहान वंश। ‘चव्हाण’ या ‘चौहान’ वंश उत्तर भारत की आर्य जाति का एक वंश है। चौहान गोत्र राजपूतों में आता है। कई विद्वानों का कहना है कि चौहान सांभर झील, पुष्कर, आमेर और वर्तमान जयपुर (राजस्थान) में होते थे, जो अब सारे उत्तर भारत में फैले चुके हैं। इसके अतिरिक्त मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) एवं अलवर ज़िले में भी इनकी अच्छी-ख़ासी संख्या … Read more

सम्राट स्कन्दगुप्त | 455 ईस्वी – 467 ईस्वी

सम्राट स्कन्दगुप्त | 455 ईस्वी – 467 ईस्वी

स्कन्दगुप्त प्राचीन भारत में शासन करने वाले गुप्त राजवंश के सातवें राजा थे। अपने पूर्वजों की भांति इन्होने भी अपनी राजधानी पाटलिपुत्र को ही बना रखी थी। पाटलिपुत्र आज के समय के बिहार की राजधानी पटना का ही पुराना नाम है। इनके समय में गुप्त साम्राज्य पर हूणों का आक्रमण हुआ था, जिसको स्कन्दगुप्त ने अपने शौर्य और पराक्रम … Read more

बहमनी वंश | 1347 ई.-1538 ई.

बहमनी वंश | 1347 ई.-1538 ई.

बहमनी वंश दक्कन का एक इस्लामी राज्य था। इस वंश की स्थापना 3 अगस्त 1347 ई. को एक तुर्क- अफगान सूबेदार अलाउद्दीन बहमन शाह ने की थी। इसका प्रतिद्वंदी साम्राज्य विजयनगर था, जो एक हिन्दू साम्राज्य था। 1518 ई. में इसका विघटन हो गया जिसके फलस्वरूप – बरार, बीदर, अहमदनगर, गोलकुण्डा और बीजापुर के राज्यों का उदय हुआ। इन पाँचों को सम्मिलित रूप से दक्कन सल्तनत भी कहा जाता … Read more

परमार वंश | 800-1327 ई.

परमार वंश | 800-1327 ई.

परमार वंश का प्रारंभ नवीं शताब्दी के आरम्भ में नर्मदा नदी के उत्तर मालवा (प्राचीन अवन्ती) क्षेत्र में उपेन्द्र अथवा कृष्णराज द्वारा हुआ था। इस वंश के शासकों ने 800ई. से 1327 ई. तक शासन किया। मालवा के परमार वंशी शासक संभवतः राष्ट्रकूटों या प्रतिहारों के सामना थे। परमार वंश एक राजवंश का नाम है, यह वंश मध्ययुग के प्रारम्भिक काल में महत्वपूर्ण … Read more

चोल साम्राज्य | 300 ई.पू.-1279 ई.

चोल साम्राज्य

चोल साम्राज्य भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण राजस्थलों में से एक था जो दक्षिण भारत में स्थित था। इस साम्राज्य की स्थापना लगभग 3वीं शती ईसा पूर्व (300 ई.पू.) में हुई थी। यह अपने शक्तिशाली और प्रभावशाली साम्राज्यत्व के लिए प्रसिद्ध था। चोल साम्राज्य का मुख्य केंद्र थांबण्नल्लूर (वर्तमान तंजावुर) था। नवीं सदी के मध्य से … Read more

कुमारगुप्त प्रथम | परमदैवत, महेंद्रादित्य | 415 ई.- 455 ई.

कुमारगुप्त प्रथम | परमदैवत, महेंद्रादित्य | 415 ई.- 455 ई

कुमारगुप्त प्रथम, गुप्त वंश के सम्राट एवं चन्द्रगुप्त द्वितीय के पुत्र थे। पिता चन्द्रगुप्त द्वितीय की मृत्यु के बाद वह राजगद्दी पर बैठे। इनकी माता का नाम पट्टमहादेवी ध्रुवदेवी था। उनके शासन काल में विशाल गुप्त साम्राज्य अक्षुण रूप से क़ायम रहा। बल्ख से बंगाल की खाड़ी तक उनका अबाधित शासन था। सब राजा, सामन्त, गणराज्य और प्रत्यंतवर्ती जनपद कुमारगुप्त के साम्राज्य के अधीन … Read more

महात्मा गांधी ‘बापू’ | 1869-1948 ई.

महात्मा गांधी 'बापू' | 1869-1948 ई.

महात्मा गांधी को मोहनदास करमचन्द गांधी के नाम से भी जाना जाता है, महात्मा गाँधी भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के एक अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव पूरी तरह से अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी, जिसने भारत को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम दिलाकर पूरे विश्व में … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.