सुमित्रानन्दन पन्त की ‘गीत विहग’ कविता का काव्य-सौन्दर्य, भावार्थ और संदेश

सुमित्रानन्दन पन्त की ‘गीत विहग’ कविता का काव्य-सौन्दर्य, भावार्थ और संदेश

हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानन्दन पन्त प्रकृति, सौन्दर्य, मानवता और आध्यात्मिक चेतना के अमर गायक रहे हैं। उनकी काव्य-रचनाओं में कोमल भावनाओं, संगीतात्मकता, प्रतीकात्मकता तथा मानव-जीवन के उच्च आदर्शों का अद्भुत समन्वय मिलता है। ‘गीत विहग’ उनकी ऐसी ही प्रेरणादायी कविता है, जो उनके काव्य-संग्रह उत्तरा से ली … Read more

‘बापू के प्रति’ कविता के भाव एवं विचार — सुमित्रानन्दन पन्त द्वारा महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व का काव्यात्मक निरूपण

‘बापू के प्रति’ कविता के भाव एवं विचार — सुमित्रानन्दन पन्त द्वारा महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व का काव्यात्मक निरूपण

हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक कविवर सुमित्रानन्दन पन्त ने अपनी कविताओं में प्रकृति, मानवता, सौन्दर्य और आध्यात्मिक चेतना का अत्यंत सुकुमार एवं मार्मिक चित्रण किया है। उनके काव्य में जहाँ एक ओर कोमल भावनाओं की तरलता है, वहीं दूसरी ओर युग-चेतना, राष्ट्रीयता और मानवीय आदर्शों का सशक्त स्वर भी … Read more

‘परिवर्तन’ कविता का कथ्य, शिल्प एवं काव्य-सौन्दर्य : दार्शनिक दृष्टि से विस्तृत विवेचन

'परिवर्तन’ कविता का कथ्य, शिल्प एवं काव्य-सौन्दर्य : दार्शनिक दृष्टि से विस्तृत विवेचन

‘परिवर्तन’ सुमित्रानन्दन पन्त की अत्यंत महत्त्वपूर्ण और दीर्घ कविता है, जो उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह पल्लव में संकलित है। पन्त जी छायावाद के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं और उनकी काव्य-दृष्टि में प्रकृति, सौन्दर्य, मानवीय संवेदना तथा दार्शनिक चिंतन का अद्भुत समन्वय मिलता है। ‘परिवर्तन’ कविता उनके काव्य-विकास के उस चरण की प्रतिनिधि रचना है, … Read more

पन्त काव्य में प्रकृति-चित्रण : सुकुमारता, विविध रूप और काव्य-सौन्दर्य का समालोचनात्मक विवेचन

पन्त काव्य में प्रकृति-चित्रण : सुकुमारता, विविध रूप और काव्य-सौन्दर्य का समालोचनात्मक विवेचन

हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में सुमित्रानन्दन पन्त का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल छायावाद के प्रतिनिधि कवि ही नहीं, बल्कि प्रकृति के अनुपम उपासक और सुकुमार संवेदना के स्रष्टा भी हैं। इसी कारण उन्हें प्रायः “प्रकृति का सुकुमार कवि” कहा जाता है। यह विशेषण मात्र … Read more

सुमित्रानन्दन पन्त : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

सुमित्रानन्दन पन्त : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिन्दी साहित्य के छायावादी युग में यदि प्रकृति की कोमलतम छवियों को शब्दों में मूर्त करने वाले कवि की खोज की जाए तो वह व्यक्तित्व निस्संदेह सुमित्रानन्दन पन्त का है। उन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है, क्योंकि उनकी संवेदनशील दृष्टि ने प्रकृति के सूक्ष्मतम रूपों को आत्मानुभूति के साथ व्यक्त किया। छायावादी काव्य … Read more

जयशंकर प्रसाद कृत ‘लहर’ (काव्य-संग्रह) : संपूर्ण परिचय, प्रमुख कविताएँ, विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जयशंकर प्रसाद कृत 'लहर' (काव्य-संग्रह)

हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद एक स्वर्णिम युग के रूप में प्रतिष्ठित है। इस युग ने काव्य को आत्मानुभूति, प्रकृति-सौंदर्य, रहस्य-चेतना और मानवीय संवेदनाओं की नई दिशा प्रदान की। इस युग के चार प्रमुख स्तंभों—जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला—में जयशंकर प्रसाद का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने न केवल … Read more

जयशंकर प्रसाद कृत ‘आँसू’ एक श्रेष्ठ विरह काव्य है : सोदाहरण विश्लेषण | ‘आँसू’ की काव्यगत विशेषताएं

‘आँसू’ एक श्रेष्ठ विरह काव्य

हिंदी साहित्य के छायावादी युग में जिन कवियों ने काव्य की भावभूमि को सूक्ष्म संवेदनाओं, करुणा, रहस्य और आत्मानुभूति से समृद्ध किया, उनमें महाकवि जयशंकर प्रसाद का स्थान अत्यंत ऊँचा है। प्रसाद की काव्य प्रतिभा का सर्वाधिक मार्मिक, संवेदनशील और हृदयस्पर्शी रूप उनकी प्रसिद्ध काव्यरचना ‘आँसू’ में दृष्टिगोचर होता है। ‘आँसू’ मूलतः एक विरह प्रधान … Read more

जयशंकर प्रसाद कृत ‘बीती विभावरी’ : मूल भाव, प्रतीकात्मकता और काव्य-सौष्ठव

जयशंकर प्रसाद कृत ‘बीती विभावरी’ : मूल भाव, प्रतीकात्मकता और काव्य-सौष्ठव

‘बीती विभावरी’ हिंदी काव्य की उन मधुर, संगीतात्मक और भावप्रवण रचनाओं में से एक है, जो पाठक के हृदय में नवचेतना का संचार कर देती हैं। यह गीत महान छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की अमर कृति है, जो उनके काव्य-संग्रह “लहर” में संकलित है। यह केवल एक प्रकृति-चित्रण मात्र नहीं, बल्कि एक सशक्त जागरण-गीत है—ऐसा … Read more

कामायनी के ‘श्रद्धा-मनु’ सर्ग में श्रद्धा का सौन्दर्य-वर्णन

कामायनी के ‘श्रद्धा-मनु’ सर्ग में श्रद्धा का सौन्दर्य-वर्णन

हिन्दी साहित्य के छायावाद युग में जिन कवियों ने काव्य को दार्शनिक गहराई, भावात्मक ऊँचाई और कलात्मक सौष्ठव प्रदान किया, उनमें जयशंकर प्रसाद का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका महाकाव्य कामायनी न केवल छायावादी काव्यधारा का शिखर है, बल्कि भारतीय चिंतन, संस्कृति और मानवीय मनोविज्ञान का अद्भुत काव्य-प्रस्ताव भी है। यह … Read more

श्रेष्ठ छायावादी कवि ‘जयशंकर प्रसाद’ की काव्यगत विशेषताएँ

श्रेष्ठ छायावादी कवि ‘जयशंकर प्रसाद’ की काव्यगत विशेषताएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद को काव्य का स्वर्णिम युग कहा जाता है। इस युग ने हिंदी कविता को केवल विषय-विस्तार ही नहीं दिया, बल्कि उसे संवेदनात्मक गहराई, कलात्मक सौष्ठव और दार्शनिक ऊँचाई भी प्रदान की। छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों—जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा—में जयशंकर प्रसाद का स्थान … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.