वैदिक संस्कृत : इतिहास, उत्पत्ति, विकास, व्याकरण और वैदिक साहित्य

वैदिक संस्कृत : इतिहास, उत्पत्ति, विकास, व्याकरण और वैदिक साहित्य

(1500 ई.पू. – 800 ई.पू. का महान भाषाई एवं सांस्कृतिक युग) भारतीय भाषाओं के इतिहास में वैदिक संस्कृत का स्थान अत्यंत प्राचीन, महत्वपूर्ण और आधारभूत माना जाता है। 1500 ई.पू. से लगभग 800 ई.पू. तक प्रचलित यह भाषा मानव सभ्यता में उपलब्ध सबसे पुरानी, शुद्ध और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक मानी जाती है। इसका … Read more

भारतीय आर्य भाषा : उत्पत्ति, स्वरूप और सांस्कृतिक–भाषाई विकास

भारतीय आर्य भाषा : उत्पत्ति, स्वरूप और सांस्कृतिक–भाषाई विकास

भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाई परंपरा अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और विविधताओं से भरी रही है। हिंदी तथा अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं का इतिहास वस्तुतः वैदिक युग से प्रारंभ माना जाता है, किन्तु वैदिक संस्कृत के उद्भव से पहले भारत की भाषिक स्थिति क्या थी, इसका कोई प्रत्यक्ष लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भारतीय आर्य भाषा का … Read more

अवधी भाषा : इतिहास, क्षेत्र, साहित्य, विशेषताएँ और महत्त्व

अवधी भाषा : इतिहास, क्षेत्र, साहित्य, विशेषताएँ और महत्त्व

भारतीय भाषिक परंपरा अत्यंत संपन्न और बहुरंगी है। उत्तर भारत के भाषायी मानचित्र को देखें तो हिंदी की विभिन्न बोलियाँ एक अनूठे सांस्कृतिक संसार की रचना करती हैं। इनमें अवधी अपनी माधुर्यता, सहजता, भाषिक विविधता तथा अद्वितीय साहित्यिक धरोहर के कारण सबसे प्रतिष्ठित मानी जाती है। यह बोली केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि उत्तरी … Read more

छत्तीसगढ़ी भाषा : इतिहास, क्षेत्र, विशेषताएँ, साहित्य और सांस्कृतिक महत्व

छत्तीसगढ़ी भाषा : इतिहास, क्षेत्र, विशेषताएँ, साहित्य और सांस्कृतिक महत्व

भारत की भाषिक विविधता विश्वभर में अद्वितीय मानी जाती है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, और मध्य भारत से पूर्वी भारत तक, हर क्षेत्र में भाषाओं और बोलियों का समृद्ध संसार बिखरा हुआ है। इन्हीं भाषाई धरोहरों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, मधुर और विशिष्ट भाषा है—छत्तीसगढ़ी। यह बोली सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ … Read more

बघेली भाषा : इतिहास, क्षेत्र, भाषिक विशेषताएँ और सांस्कृतिक महत्व

बघेली भाषा : इतिहास, क्षेत्र, भाषिक विशेषताएँ और सांस्कृतिक महत्व

भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा में क्षेत्रीय भाषाएँ एवं बोलियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। वे केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक धरोहर तथा ऐतिहासिक निरंतरता का प्रतीक भी हैं। इन्हीं में से एक है बघेली, जिसे प्राचीन परंपरा और विशिष्ट भाषाई स्वरूप के कारण विशेष महत्व प्राप्त है। बघेली को कभी-कभी … Read more

पूर्वी हिन्दी : विकास, बोलियाँ, भाषिक विशेषताएँ और साहित्यिक योगदान

पूर्वी हिन्दी : विकास, बोलियाँ, भाषिक विशेषताएँ और साहित्यिक योगदान

भारत की भाषाएँ सदियों से निरन्तर विकसित होती रही हैं। इन्हीं में से एक महत्त्वपूर्ण भाषा-समूह है पूर्वी हिन्दी, जिसे हिन्दी भाषा के पूर्वी शाखा-समूह के अंतर्गत अत्यधिक महत्त्व प्राप्त है। पूर्वी हिन्दी का साहित्यिक, भाषिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक मूल्य इतना समृद्ध है कि उसने हिन्दी की सम्पूर्ण संरचना और साहित्य-परंपरा को गहराई से प्रभावित … Read more

गढ़वाली भाषा : उत्पत्ति, विकास, उपबोलियाँ और सांस्कृतिक धरोहर

गढ़वाली भाषा : उत्पत्ति, विकास, उपबोलियाँ और सांस्कृतिक धरोहर

भारत की भाषिक और सांस्कृतिक विविधता में हिमालयी क्षेत्रों का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में बोली जाने वाली गढ़वाली भाषा न केवल एक संप्रेषण माध्यम है, बल्कि यहाँ की लोकआस्था, लोकसंस्कृति और सामुदायिक जीवन का आधार भी है। गढ़वाली भाषा साहित्य, कला, संगीत, प्रकृति और लोकानुभव के साथ गहराई … Read more

दक्खिनी भाषा (दक्षिणी हिंदी) : इतिहास, उत्पत्ति, विकास, साहित्य, लिपि और भाषिक विशेषताएं

दक्खिनी भाषा : इतिहास, उत्पत्ति, विकास, साहित्य, लिपि और भाषिक विशेषताएं

भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाई विविधता विश्व में अद्वितीय मानी जाती है। इस सांस्कृतिक और भाषाई विशालता में एक ऐसी भाषा भी शामिल है जिसने उत्तर भारत की खड़ी बोली और दक्षिण भारत की द्रविड़ भाषाओं का अनोखा संगम प्रस्तुत किया — दक्खिनी भाषा। दक्खिनी न केवल एक बोलचाल की भाषा थी, बल्कि यह मध्यकालीन दक्षिणी … Read more

पश्चिमी हिन्दी : उद्भव, विकास, प्रमुख बोलियाँ और साहित्यिक परंपरा

पश्चिमी हिन्दी : उद्भव, विकास, प्रमुख बोलियाँ और साहित्यिक परंपरा

भारतीय भाषाओं का इतिहास अत्यंत समृद्ध और बहुआयामी है। आधुनिक हिन्दी, जिसे आज भारत की सर्वाधिक बोली-समझी जाने वाली भाषा होने का गौरव प्राप्त है, अपने विकास क्रम में अनेक भाषिक चरणों, उपभाषाओं और बोलियों से होकर गुज़री है। आधुनिक मानकीकृत हिन्दी की जड़ें व्यापक रूप से पश्चिमी हिन्दी (Western Hindi) के नाम से पहचाने … Read more

कुमाउनी भाषा: स्वरूप, इतिहास, उपबोलियाँ और भाषायी विशेषताएँ

कुमाउनी भाषा: स्वरूप, इतिहास, उपबोलियाँ और भाषायी विशेषताएँ

हिंद-आर्यभाषा परिवार की उत्तर-भारतीय पहाड़ी शाखा में कुमाउनी भाषा एक विशिष्ट, प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भाषा मानी जाती है। यह भाषा उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाती है, जिसे ऐतिहासिक रूप से कुर्मांचल या कुर्माचल प्रदेश कहा जाता था। भाषा-वैज्ञानिकों के अनुसार कुमाउनी का विकास अनेक भाषाओं, जनजातियों और क्षेत्रों के संपर्क … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.