प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली
हिन्दी साहित्य का विकास केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के विद्वानों ने हिन्दी को समृद्ध, व्यापक और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दक्षिण भारत के अनेक विद्वानों ने हिन्दी को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि उसे अपनी साधना और अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। ऐसे … Read more