श्रेष्ठ छायावादी कवि ‘जयशंकर प्रसाद’ की काव्यगत विशेषताएँ

श्रेष्ठ छायावादी कवि ‘जयशंकर प्रसाद’ की काव्यगत विशेषताएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद को काव्य का स्वर्णिम युग कहा जाता है। इस युग ने हिंदी कविता को केवल विषय-विस्तार ही नहीं दिया, बल्कि उसे संवेदनात्मक गहराई, कलात्मक सौष्ठव और दार्शनिक ऊँचाई भी प्रदान की। छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों—जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा—में जयशंकर प्रसाद का स्थान … Read more

जयशंकर प्रसाद : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

जयशंकर प्रसाद : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिन्दी साहित्य के इतिहास में जयशंकर प्रसाद का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ ही नहीं, बल्कि आधुनिक हिन्दी साहित्य के सर्वांगीण प्रतिभा-संपन्न रचनाकारों में अग्रगण्य थे। कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबन्ध—सभी विधाओं में उन्होंने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया कि … Read more

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के आधुनिक युग में मैथिलीशरण गुप्त का नाम एक ऐसे कवि के रूप में स्थापित है, जिन्होंने कविता को केवल भावात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित न रखकर उसे राष्ट्र, संस्कृति और मानव-मूल्यों की सशक्त वाणी बनाया। उनका संपूर्ण साहित्य भारतीय सभ्यता की आत्मा, नैतिक आदर्शों और राष्ट्रीय चेतना का संवाहक है। इसलिए उनके जीवन … Read more

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में जब भाषा, भाव और विचार की नई चेतना आकार ले रही थी, तब जिन साहित्यकारों ने खड़ी बोली को काव्य-भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का साहस और सफल प्रयास किया, उनमें अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का नाम अत्यंत आदर और गौरव के साथ लिया जाता है। वे द्विवेदी … Read more

कविवर जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

कविवर जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

कविवर जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ आधुनिक हिंदी साहित्य के उन विरल कवियों में गिने जाते हैं जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण किया। वे आधुनिक काल में ब्रजभाषा के सर्वश्रेष्ठ और अंतिम समर्थ कवि माने जाते हैं। उनकी काव्य-प्रतिभा बहुआयामी थी, किंतु उसका सर्वाधिक गरिमामय और प्रभावशाली रूप काव्य के क्षेत्र … Read more

वीर रस के महाकवि भूषण : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

वीर रस के महाकवि भूषण : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के रीतिकाल में जहाँ एक ओर अधिकांश कवि दरबारी संरक्षण में शृंगार, नायिका‑भेद, नख‑शिख वर्णन और विलासिता की अभिव्यक्ति में संलग्न थे, वहीं दूसरी ओर एक ऐसे कवि का प्रादुर्भाव हुआ जिसने अपनी ओजस्वी वाणी से राष्ट्र, स्वाभिमान और वीरता का सिंहनाद किया। यह कवि थे — महाकवि भूषण। भूषण केवल वीर रस … Read more

रीतिकाल के प्रतिनिधि कवि बिहारी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

रीतिकाल के प्रतिनिधि कवि बिहारी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के इतिहास में रीतिकाल एक विशिष्ट एवं महत्त्वपूर्ण कालखंड के रूप में प्रतिष्ठित है। इस काल में काव्य का केंद्र मुख्यतः श्रृंगार रस, नायिका-भेद, नख-शिख वर्णन, रस, अलंकार और काव्यांगों के सूक्ष्म प्रयोग पर आधारित रहा। रीतिकालीन कवियों में जिन कवियों ने मुक्तक काव्य को चरम उत्कर्ष तक पहुँचाया, उनमें महाकवि बिहारी का … Read more

गोस्वामी तुलसीदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

गोस्वामी तुलसीदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण और अद्वितीय है। वे सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ और प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। जिस प्रकार वाल्मीकि संस्कृत में रामकथा के प्रथम महाकवि हैं, उसी प्रकार हिंदी में तुलसीदास रामकथा के महाकवि हैं। उनका महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ न केवल हिंदी साहित्य की अमूल्य … Read more

कवि सूरदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

कवि सूरदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल भारतीय साहित्य के इतिहास में आध्यात्मिक चेतना, लोकभाषा की प्रतिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं के उत्कर्ष का स्वर्णयुग माना जाता है। इस काल में भक्ति को दो प्रमुख धाराओं—निर्गुण और सगुण—में विभाजित किया गया। सगुण भक्ति धारा के अंतर्गत रामभक्ति और कृष्णभक्ति की परंपरा विकसित हुई। कृष्णभक्ति शाखा में जिन कवियों ने … Read more

संत कबीरदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

संत कबीरदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के इतिहास में संत कबीरदास का नाम अत्यंत सम्मान और आदर के साथ लिया जाता है। वे न केवल भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख स्तंभ हैं, बल्कि एक ऐसे संत, कवि और समाज-सुधारक भी हैं, जिन्होंने अपने समय की सामाजिक, धार्मिक और नैतिक विकृतियों पर निर्भीक प्रहार किया। कबीर का काव्य … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.