क्रिया-विशेषण (Adverb): परिभाषा, प्रकार और 100+ उदाहरण

क्रिया-विशेषण (Adverb): परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

भाषा की संरचना में शब्दों का अपना-अपना विशिष्ट स्थान होता है। वाक्य निर्माण के क्रम में प्रत्येक शब्द किसी न किसी रूप में अर्थ, भाव और अभिप्राय को व्यक्त करता है। भाषा के इन्हीं अंगों में क्रिया-विशेषण (Kriya Visheshan) एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्रेणी है। यह न केवल वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का विस्तार करता है, … Read more

देवनागरी लिपि : जन्म, विकास, स्वरूप, विशेषताएँ, गुण–दोष और महत्व

देवनागरी लिपि : जन्म, विकास, स्वरूप, विशेषताएँ, गुण–दोष और महत्व

भारतीय सभ्यता के इतिहास में देवनागरी लिपि को अद्वितीय महत्व प्राप्त है। यह न केवल भारतीय भाषाओं का वाहक है, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक विकास की महान साक्षी भी है। यह लिपि आज 120 से अधिक भाषाओं में प्रयुक्त होती है और उपयोग के आधार पर विश्व की चौथी सबसे बड़ी लेखन-पद्धति … Read more

भारत और विश्व के भाषा परिवार: उत्पत्ति, विकास और विस्तार

भारत और विश्व के भाषा परिवार: उत्पत्ति, विकास और विस्तार

भाषा केवल संचार का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव-सभ्यता के विकास, प्रवास, संस्कृति और मानसिक संरचना का दर्पण भी है। जिस प्रकार मनुष्य का एक परिवार होता है, उसी प्रकार भाषाओं का भी एक परिवार होता है—जहाँ अनेक भाषाएँ एक ही मूल स्रोत से जन्म लेती हैं और समय के साथ विकसित होकर अलग-अलग … Read more

मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा | 500 ई.पू. – 1000 ईस्वी | उत्पत्ति, विकास और भाषिक संरचना

मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा | 500 ई.पू. – 1000 ईस्वी | उत्पत्ति, विकास और भाषिक संरचना

भारतीय भाषाओं के इतिहास में मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा का कालखंड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वही दौर था जब भाषा केवल विद्वानों और राजदरबारों की संपत्ति न रहकर लोकजीवन से जुड़ी और संचार, साहित्य व धर्म के प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित हुई। संस्कृत की जटिल व्याकरणिक संरचना से निकलकर जब भाषा जनसाधारण … Read more

प्राचीन भारतीय आर्यभाषा | 1500 ई.पू. – 500 ई.पू. | उत्पत्ति, विकास और भाषिक संरचना

प्राचीन भारतीय आर्यभाषा | 1500 ई.पू. – 500 ई.पू. | उत्पत्ति, विकास और भाषिक संरचना

भारतीय भाषाओं के इतिहास में प्राचीन भारतीय आर्यभाषा एक महत्वपूर्ण और आधारभूत चरण मानी जाती है। यह भाषा-परंपरा न केवल भारत के वैचारिक, दार्शनिक और धार्मिक विकास का दर्पण है, बल्कि भारतीय सभ्यता के ज्ञान-विस्तार का मूल स्रोत भी रही है। प्राचीन भारतीय आर्य भाषा का स्वरूप समय के साथ वैदिक, उत्तरवैदिक, लौकिक संस्कृत, प्राकृत, … Read more

आधुनिक भारतीय आर्यभाषा : परिचय, विकास, स्वरूप, विकास क्रम और वर्गीकरण

आधुनिक भारतीय आर्यभाषा : परिचय, विकास, स्वरूप, विकास क्रम और वर्गीकरण

भारतीय उपमहाद्वीप विश्व की सबसे समृद्ध और विविध भाषिक परंपराओं में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ बोली जाने वाली भाषाओं का विशाल समूह न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि भाषावैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी एक अनूठा आधार प्रदान करता है। इन भाषाओं में भारतीय आर्यभाषाओं का स्थान सर्वोपरि है, जो … Read more

अपभ्रंश भाषा (तृतीय प्राकृत): इतिहास, विशेषताएँ, वर्गीकरण और काल निर्धारण

अपभ्रंश भाषा (तृतीय प्राकृत): इतिहास, विशेषताएँ, वर्गीकरण और काल निर्धारण

भारतीय आर्यभाषा-परिवार के इतिहास में अपभ्रंश भाषा का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह भाषा संस्कृत और प्राकृत जैसी प्राचीन भाषाओं तथा आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के बीच की एक कड़ी के रूप में विकसित हुई। अपभ्रंश न तो पूर्णतः प्राकृत है और न ही आधुनिक भाषाओं के समान, परंतु दोनों के बीच संक्रमण की यह … Read more

प्राकृत भाषा (द्वितीय प्राकृत): उत्पत्ति, विकास, वर्गीकरण और साहित्यिक स्वरूप

प्राकृत भाषा: उत्पत्ति, विकास, वर्गीकरण और साहित्यिक स्वरूप

प्राकृत भाषा भारतीय आर्यभाषाओं के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। 1 ई. से 500 ई. तक प्रचलित इस भाषा को ‘द्वितीय प्राकृत’ कहा गया है। यह वह काल था जब संस्कृत अपने साहित्यिक और धार्मिक गौरव में प्रतिष्ठित हो चुकी थी, और आम जनमानस की भाषा एक सरल, बोलचाल पर आधारित, स्वाभाविक भाषिक … Read more

पालि भाषा (प्रथम प्राकृत): उद्भव, विकास, साहित्य और व्याकरणिक परंपरा

पालि भाषा: उद्भव, विकास, साहित्य और व्याकरणिक परंपरा

भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा में पालि भाषा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भाषा न केवल बौद्ध धर्म की मौलिक ध्वनि रही है, बल्कि इसे भारत की प्रथम देश भाषा भी कहा जाता है। पालि भाषा ने बौद्ध साहित्य, विशेषतः त्रिपिटकों के माध्यम से भारत सहित दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों—लंका, बर्मा, तिब्बत … Read more

लौकिक संस्कृत : इतिहास, उत्पत्ति, स्वरूप, विशेषताएँ और साहित्य

लौकिक संस्कृत : इतिहास, उत्पत्ति, स्वरूप, विशेषताएँ और साहित्य

भारतीय भाषाओं और साहित्य के विस्तृत संसार में संस्कृत भाषा का स्थान सर्वोपरि है। यह न केवल भारत की शास्त्रीय भाषा है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक तथा धार्मिक उपलब्धियों का प्रमुख माध्यम भी रही है। संस्कृत का इतिहास अत्यन्त प्राचीन और बहुआयामी है, जिसे मुख्यतः दो रूपों में विभाजित किया जाता है—वैदिक संस्कृत … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.