आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं की भाषागत एवं शैलीगत विशेषताएँ

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं की भाषागत एवं शैलीगत विशेषताएँ

आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) का स्थान केवल एक लेखक या निबंधकार के रूप में नहीं, बल्कि एक युगप्रवर्तक साहित्य-संस्कारक के रूप में सुरक्षित है। वे उस संक्रमणकाल के प्रतिनिधि साहित्यकार थे, जब हिंदी साहित्य भारतेन्दु युग की भावुकता, अलंकरणप्रियता और भाषिक असंयम से निकलकर वैचारिक परिपक्वता, सामाजिक उत्तरदायित्व … Read more

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का नाम एक ऐसे युगप्रवर्तक साहित्यकार के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने न केवल हिंदी भाषा को अनुशासित और व्यवस्थित किया, बल्कि उसे आधुनिक चेतना, बौद्धिक गंभीरता और राष्ट्रीय भावबोध से भी संपन्न किया। उनके साहित्यिक योगदान के कारण ही हिंदी साहित्य के इतिहास में … Read more

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का काव्य : शृंगार, प्रेम, भक्ति, राष्ट्रीय चेतना एवं काव्य-सौन्दर्य

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का काव्य : शृंगार, प्रेम, भक्ति, राष्ट्रीय चेतना एवं काव्य-सौन्दर्य

हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के प्रवर्तक के रूप में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का नाम अत्यन्त आदर और गौरव के साथ लिया जाता है। वे केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि नाटककार, निबन्धकार, पत्रकार, समाज-सुधारक और राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत भी थे। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की व्यापकता इतनी अधिक है कि उनके नाम पर हिन्दी … Read more

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र हिन्दी साहित्य के ऐसे युगप्रवर्तक साहित्यकार हैं, जिनके बिना आधुनिक हिन्दी साहित्य की कल्पना अधूरी प्रतीत होती है। उन्हें केवल हिन्दी गद्य का जनक ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण आधुनिक हिन्दी साहित्य का निर्माता कहा जाता है। जिस समय हिन्दी साहित्य रूढ़ परम्पराओं, सीमित विषय-वस्तु और अविकसित गद्य-रूप से जूझ रहा था, उस … Read more

जीवनी और जीवन-परिचय : स्वरूप, समानताएँ एवं अंतर का समेकित अध्ययन

जीवनी और जीवन-परिचय : स्वरूप, समानताएँ एवं अंतर का समेकित अध्ययन

हिंदी साहित्य, शैक्षणिक लेखन तथा व्यावहारिक जीवन में जीवनी और जीवन-परिचय—दोनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों ही किसी व्यक्ति के जीवन से संबंधित होते हैं, किंतु इनके उद्देश्य, विस्तार, शैली, भाषा और उपयोगिता में मौलिक अंतर पाया जाता है।अक्सर विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों में यह भ्रांति रहती है कि जीवनी और जीवन-परिचय एक ही … Read more

जीवन परिचय : परिभाषा, अर्थ, स्वरूप, भेद, उद्देश्य और महत्व

जीवन परिचय : परिभाषा, अर्थ, स्वरूप, भेद, उद्देश्य और महत्व

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में प्रत्येक व्यक्ति का जीवन किसी न किसी रूप में महत्त्वपूर्ण होता है। जब किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़ी प्रमुख जानकारियों को क्रमबद्ध, तथ्यपरक और उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे जीवन परिचय (Biography) कहा जाता है। जीवन परिचय के माध्यम से हम किसी … Read more

हिंदी व्याकरण में वचन: परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण

हिंदी व्याकरण में वचन: परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण

भाषा मानव की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। भाषा के माध्यम से मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं, अनुभूतियों और ज्ञान को दूसरों तक पहुँचाता है। किंतु भाषा तभी प्रभावी बनती है जब उसमें व्याकरणिक शुद्धता हो। व्याकरण भाषा की वह व्यवस्था है जो शब्दों के सही प्रयोग, वाक्य-रचना और अर्थ-बोध को सुनिश्चित करती है। हिंदी … Read more

संबंधबोधक अव्यय : परिभाषा, प्रकार, प्रयोग और उदाहरण

संबंधबोधक अव्यय : परिभाषा, प्रकार, प्रयोग और उदाहरण

हिंदी व्याकरण में अव्यय एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्रेणी है, क्योंकि इसके माध्यम से वाक्य की संरचना में सूक्ष्म अर्थ, दिशा, कारण, साधन और अनेक प्रकार के संबंध स्पष्ट होते हैं। अव्यय का वह रूप जो दो संज्ञाओं, दो सर्वनामों अथवा एक संज्ञा और सर्वनाम के बीच किसी संबंध का संकेत करता है, संबंधबोधक अव्यय कहलाता … Read more

निपात (अवधारक) : परिभाषा, भेद, उदाहरण और व्याकरणिक भूमिका

निपात (अवधारक) : परिभाषा, भेद, उदाहरण और व्याकरणिक भूमिका

हिंदी व्याकरण में अव्यय शब्दों की एक महत्वपूर्ण श्रेणी है, जिसके अंतर्गत निपातों का उल्लेख विशेष रूप से किया जाता है। निपात छोटे आकार वाले ऐसे अव्यय होते हैं, जो स्वयं किसी ठोस अर्थ को व्यक्त नहीं करते, लेकिन वाक्य के आशय को प्रबल बनाने, उसमें भावात्मक गहराई उत्पन्न करने, किसी शब्द पर बल देने, … Read more

विस्मयादिबोधक अव्यय : परिभाषा, प्रकार, प्रयोग और उदाहरण

विस्मयादिबोधक अव्यय : परिभाषा, प्रकार, प्रयोग और उदाहरण

हिंदी भाषा भावों की अभिव्यक्ति के लिए विश्व की सबसे समृद्ध और लचीली भाषाओं में से एक मानी जाती है। संवाद करते समय मनुष्य के भीतर अनेक प्रकार की संवेदनाएँ जन्म लेती हैं—कभी आनंद, कभी दुःख, कभी विस्मय, कभी घृणा तो कभी भय। इन संवेदनाओं को तुरंत व्यक्त करने के लिए भाषा में कुछ ऐसे … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.