भारत का चंद्रयान–3 मिशन न केवल चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने की ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया, बल्कि इससे जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों ने भी अंतरिक्ष अनुसंधान को एक नई दिशा दी। इन उपकरणों में से एक महत्वपूर्ण उपकरण है चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (Chandra’s Surface Thermophysical Experiment – ChaSTE)। यह प्रयोग चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर में स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह और उपसतह के तापीय गुणों का अध्ययन करना था। इसने दक्षिणी ध्रुव के पास की सतह से तापमान डेटा प्रदान करके चंद्रमा के पर्यावरण को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) क्या है?
ChaSTE (Chandra’s Surface Thermophysical Experiment) चंद्रयान-3 मिशन का एक वैज्ञानिक पेलोड है, जिसे विशेष रूप से चंद्र सतह के तापीय गुणों का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उपकरण विक्रम लैंडर पर लगाया गया था, जो 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरा। ChaSTE का मुख्य कार्य चंद्रमा की सतह और उपसतह के तापमान में होने वाले परिवर्तनों को मापना और ऊष्मीय प्रवाह का मूल्यांकन करना है।
चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) का उद्देश्य
चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) के प्रमुख उद्देश्यों को निम्नलिखित रूप में विभाजित किया जा सकता है:
- चंद्रमा की सतह और उपसतह के तापमान की माप – यह उपकरण चंद्र सतह के विभिन्न स्तरों पर तापमान को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे चंद्र मिट्टी (regolith) के तापीय गुणों को समझा जा सके।
- ऊष्मीय प्रवाह का अध्ययन – ChaSTE सतह से उपसतह तक ऊष्मा के प्रवाह को मापकर, वहां की ऊष्मीय चालकता (thermal conductivity) और ऊष्मीय जड़त्व (thermal inertia) के बारे में जानकारी देता है।
- भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी – चंद्र सतह की तापीय प्रकृति को समझना भविष्य में वहां रोबोट या मानव मिशनों के लिए आवश्यक है, जिससे सुरक्षित लैंडिंग, आवास और संचालन की योजना बनाई जा सके।
- जल-बर्फ जमा की संभावना का मूल्यांकन – दक्षिणी ध्रुव पर तापमान डेटा यह संकेत देता है कि वहां बर्फ के रूप में पानी जमा हो सकता है, जो भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकता है।
ChaSTE की संरचना और कार्यप्रणाली
चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) उपकरण को खासतौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह चंद्र सतह में प्रवेश करके गहराई तक तापमान माप सके। इसमें निम्नलिखित प्रमुख घटक होते हैं:
1. तापीय प्रोब (Thermal Probe)
यह एक लंबी और पतली संरचना है जिसमें 10 तापमान सेंसर लगे होते हैं। ये सेंसर प्रोब की पूरी लंबाई में 1 सेमी की दूरी पर लगाए गए हैं, विशेष रूप से नोक (nose-tip) के पास। इसका कार्य है सतह और उपसतह के तापमान को उच्च संवेदनशीलता के साथ मापना।
2. घूर्णन आधारित प्रणाली (Rotation-based Deployment Mechanism)
ChaSTE एक घूर्णन प्रणाली का उपयोग करता है, जो इसे सतह में धीरे-धीरे प्रवेश करने में मदद करती है। यह पारंपरिक हथौड़ा-आधारित प्रणाली की तुलना में अधिक सटीक और सतह को कम क्षति पहुँचाने वाली तकनीक है।
3. मोटर और नियंत्रण प्रणाली
मोटर घूर्णन के माध्यम से प्रोब को नीचे की ओर धकेलती है। जैसे-जैसे प्रोब चंद्र सतह में प्रवेश करता है, उसकी नोक मिट्टी से संपर्क करती है और सेंसर डेटा रिकॉर्ड करना शुरू कर देते हैं।
ChaSTE का संचालन: गहराई में तापमान की निगरानी
ChaSTE ने सफलतापूर्वक 10 सेंटीमीटर गहराई तक चंद्र सतह में प्रवेश किया और वहां के तापमान में होने वाले बदलावों को मापा। 23 अगस्त 2023 को विक्रम लैंडर की लैंडिंग के बाद से 2 सितंबर 2023 तक यह उपकरण लगातार डेटा एकत्र करता रहा। इस अवलोकन से चंद्र मिट्टी के तापीय गुणों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
ChaSTE द्वारा प्राप्त डेटा और निष्कर्ष
ChaSTE के अवलोकनों ने कई अहम वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर किया है:
1. अधिकतम तापमान मापन
ChaSTE ने शिवशक्ति लैंडिंग साइट पर चंद्र सतह का अधिकतम तापमान 355 केल्विन (82 डिग्री सेल्सियस) मापा, जो कि पहले अनुमानित 330 केल्विन से लगभग 25 केल्विन अधिक था। यह अंतर दर्शाता है कि चंद्र सतह पर तापमान अपेक्षा से अधिक हो सकता है।
2. तापमान में क्षेत्रीय भिन्नता
ChaSTE के डेटा से पता चला कि चंद्रमा के उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में तापमान में अत्यधिक अंतर देखा गया, जबकि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में यह अंतर तुलनात्मक रूप से कम था। यह जानकारी चंद्रमा की भू-स्थानिक विशेषताओं को समझने में मदद करती है।
3. चंद्र मिट्टी की तापीय संरचना
ChaSTE ने चंद्र मिट्टी (regolith) के तापीय जड़त्व और चालकता जैसे गुणों की पुष्टि की। इन गुणों से यह समझने में मदद मिलती है कि सतह कितनी तेजी से गर्म होती है या ठंडी होती है, जो भविष्य की आवास परियोजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिक महत्व और संभावित उपयोग
ChaSTE का वैज्ञानिक महत्व बहुआयामी है। यह उपकरण न केवल चंद्र सतह के तापीय व्यवहार को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भविष्य की कई योजनाओं और अनुसंधानों के लिए आधार भी तैयार करता है:
- मानव उपस्थिति की योजना – चंद्र सतह पर मानव बस्तियाँ स्थापित करने से पहले वहां की तापीय स्थितियों को समझना अनिवार्य है। ChaSTE का डेटा इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
- रोवर और स्वचालित मिशनों की दक्षता – तापमान में तीव्र अंतर से रोवर के यंत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है। ChaSTE के डेटा से इन मिशनों के उपकरणों को बेहतर डिज़ाइन किया जा सकता है।
- जल-बर्फ जमा की संभावना – तापीय डेटा संकेत देता है कि दक्षिणी ध्रुव जैसे स्थानों पर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में जल-बर्फ मौजूद हो सकती है, जिसे भविष्य के मिशनों में संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
ChaSTE उपकरण ने चंद्रमा की सतह और उपसतह के तापीय गुणों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चंद्रयान-3 मिशन के तहत इस उपकरण से प्राप्त डेटा न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मूल्यवान है, बल्कि यह भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं को आकार देने में भी सहायक सिद्ध होगा। ChaSTE का अभिनव डिजाइन और इसकी कार्यप्रणाली यह दर्शाती है कि भारत अब चंद्र विज्ञान में अग्रणी देशों की श्रेणी में सम्मिलित हो चुका है।
चंद्रमा के तापीय व्यवहार की यह गहराई से की गई खोज, भविष्य में मानव सभ्यता के चंद्रमा पर स्थायी निवास की संभावना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है।
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