एक प्रेरणादायी जीवन यात्रा पर आधारित विस्तृत आलेख
21वीं सदी में जब पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता का क्षरण वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, ऐसे समय में कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो बिना शोर-शराबे के, बिना राजनीतिक मंचों के, जमीनी स्तर पर स्थायी परिवर्तन की नींव रखते हैं। कीर्तिदा मेकानी ऐसी ही एक असाधारण व्यक्तित्व थीं।
भारत में जन्म लेकर सिंगापुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाली कीर्तिदा मेकानी न केवल एक पर्यावरणविद थीं, बल्कि वे एक दृष्टा, मार्गदर्शक, शिक्षिका, कलाकार और सामाजिक प्रेरणा भी थीं। 19 जनवरी को 66 वर्ष की आयु में हृदयाघात से उनका निधन हो गया, किंतु उनके द्वारा लगाए गए पेड़, सहेजे गए उद्यान और प्रेरित किए गए लोग आज भी उनकी उपस्थिति का सजीव प्रमाण हैं।
प्रारंभिक जीवन : प्रकृति की गोद में पला व्यक्तित्व
कीर्तिदा मेकानी का पालन-पोषण कर्नाटक (भारत) के एक पारंपरिक पारिवारिक खेत में हुआ। उनका बचपन आधुनिक शहरी सुविधाओं से दूर, मिट्टी, पेड़ों, फसलों और पशुओं के बीच बीता।
यहीं उन्होंने प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का पहला पाठ सीखा। खेत में जैविक कचरे को खाद (कम्पोस्ट) में बदलते देखना, मौसम के अनुसार खेती करना, और मिट्टी के स्वास्थ्य का महत्व समझना—ये सभी अनुभव उनके जीवन में गहराई से रच-बस गए।
इन सरल लेकिन गहन अनुभवों ने उनके भीतर यह विश्वास पैदा किया कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला है। यही सोच आगे चलकर उनके संपूर्ण पर्यावरणीय दृष्टिकोण की नींव बनी।
सिंगापुर की यात्रा : हरियाली से उपजी प्रेरणा
वर्ष 1990 में कीर्तिदा अपने पति भरत मेकानी के साथ सिंगापुर गईं। यह यात्रा केवल भौगोलिक परिवर्तन नहीं थी, बल्कि उनके जीवन की दिशा बदलने वाला मोड़ साबित हुई।
हवाई अड्डे से शहर की ओर जाते समय सिंगापुर की सुव्यवस्थित हरियाली, सड़क किनारे लगे पेड़, साफ-सुथरे पार्क और शहरी नियोजन ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
उन्होंने महसूस किया कि यदि एक घनी आबादी वाला शहर प्रकृति के साथ संतुलन बना सकता है, तो यह मॉडल दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। यहीं से सिंगापुर को और अधिक हरित, टिकाऊ और सामुदायिक-केंद्रित बनाने का उनका संकल्प जन्मा।
पर्यावरण जागरूकता में नेतृत्व : सिंगापुर एनवायरनमेंट काउंसिल
वर्ष 1993 में कीर्तिदा मेकानी को Singapore Environment Council (SEC) की पहली कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया। यह पद उनके लिए केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं था, बल्कि एक मंच था जहाँ से वे व्यापक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत कर सकती थीं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने—
- 50 से अधिक पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों की शुरुआत की
- छात्रों, उद्योगों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ा
- दैनिक जीवन में सतत आदतों (Sustainable Practices) को अपनाने पर जोर दिया
उनका मानना था कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीति नहीं, बल्कि जीवनशैली होनी चाहिए।
‘प्लांट-ए-ट्री’ कार्यक्रम : एक जन-आधारित हरित आंदोलन
कीर्तिदा मेकानी की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक था 2007 में शुरू किया गया ‘Plant-A-Tree’ कार्यक्रम। यह कार्यक्रम उन्होंने National Parks Board, Singapore के सहयोग से प्रारंभ किया।
शुरुआत में कई लोगों को संदेह था—
- क्या आम नागरिक स्वेच्छा से पेड़ लगाने आएंगे?
- क्या यह पहल लंबे समय तक टिक पाएगी?
लेकिन कीर्तिदा को आम जनता की सामूहिक शक्ति पर अटूट विश्वास था।
आज इस कार्यक्रम के अंतर्गत—
- 76,000 से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं
- अनेक देशज (नेटिव) प्रजातियाँ संरक्षित की गईं
- हजारों स्वयंसेवक सक्रिय रूप से जुड़े
यह पहल धीरे-धीरे सिंगापुर का एक प्रमुख जन-आधारित हरित आंदोलन बन गई, जिसने नागरिकों को प्रकृति का संरक्षक बनने का अवसर दिया।
सामुदायिक उद्यान और सामाजिक जुड़ाव
कीर्तिदा मेकानी का दृष्टिकोण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं था। वे मानती थीं कि प्रकृति लोगों को जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है।
इसी सोच के तहत उन्होंने Community in Bloom कार्यक्रम में राजदूत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज सिंगापुर में—
- हजारों सामुदायिक उद्यान
- दसियों हजार स्वयंसेवक
इन उद्यानों के माध्यम से न केवल हरियाली बढ़ी, बल्कि सामाजिक समरसता, पड़ोसियों के बीच संवाद और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी सुदृढ़ हुई।
शिक्षा और नवाचार : भविष्य की पीढ़ियों में निवेश
कीर्तिदा मेकानी शिक्षा को दीर्घकालिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानती थीं।
वे United World College of South East Asia Foundation की ट्रस्टी रहीं, जहाँ उन्होंने छात्रों द्वारा संचालित वर्षावन पुनर्स्थापन परियोजनाओं को समर्थन दिया।
वर्ष 2016 में उन्होंने Biomimicry Singapore Network की सह-स्थापना की। इसका उद्देश्य था—
- प्रकृति से सीख लेकर
- टिकाऊ तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना
यह पहल विज्ञान, डिजाइन और पर्यावरण के बीच सेतु का कार्य करती है।
कला और संस्कृति : रचनात्मकता और प्रकृति का संगम
पर्यावरण के साथ-साथ कीर्तिदा मेकानी कला और संस्कृति में भी सक्रिय रहीं।
वे—
- LASALLE College of the Arts
- Singapore Indian Fine Arts Society
के बोर्ड की सदस्य रहीं।
एक कुशल सिरेमिक कलाकार के रूप में उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
वैश्विक संरक्षण प्रयास
कीर्तिदा का योगदान सिंगापुर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर कार्य किया।
वे WWF Singapore के बोर्ड में रहीं और—
- पौध संरक्षण
- समुद्री जैवविविधता
- कुसु द्वीप के आसपास प्रवाल भित्ति (कोरल) पुनर्स्थापन
जैसी परियोजनाओं का समर्थन किया।
पुरस्कार और सम्मान : सेवाओं की वैश्विक स्वीकृति
उनकी आजीवन सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला—
- 2015 : President’s Award for the Environment
- 2024 : Singapore Women’s Hall of Fame में Champion of the Environment के रूप में सम्मान
ये पुरस्कार उनके कार्यों की नहीं, बल्कि उनके दृष्टिकोण और समर्पण की पहचान थे।
व्यक्तित्व और स्मृति
जो लोग उन्हें जानते थे, वे उन्हें विनम्र, संवेदनशील और करुणामयी व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं।
उनके पति भरत मेकानी के अनुसार, वे उद्देश्य और करुणा से भरा जीवन जीती थीं। वे कभी भी अपने कार्यों का श्रेय स्वयं नहीं लेती थीं, बल्कि समुदाय को आगे रखती थीं।
विरासत : पेड़ों से आगे की कहानी
कीर्तिदा मेकानी की विरासत केवल लगाए गए पेड़ों तक सीमित नहीं है।
उनकी असली विरासत है—
- पर्यावरण को लेकर बदली हुई सोच
- सक्रिय नागरिक भागीदारी
- और आने वाली पीढ़ियों में बोया गया संरक्षण का बीज
उनका जीवन यह सिखाता है कि एक व्यक्ति भी प्रेम, धैर्य और प्रतिबद्धता के साथ बड़ा बदलाव ला सकता है।
उपसंहार
आज जब हम कीर्तिदा मेकानी को याद करते हैं, तो यह स्मरण केवल एक पर्यावरणविद का नहीं, बल्कि एक शांत क्रांति की प्रतीक का है।
वे भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनके लगाए पेड़ हवा में सांस लेते हैं, उनके संजोए उद्यान लोगों को जोड़ते हैं और उनके विचार भविष्य को दिशा देते हैं।
कीर्तिदा मेकानी की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि धरती की रक्षा करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है।
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