नमस्ते योजना (NAMASTE Scheme): स्वच्छता कर्मियों के सशक्तिकरण और शून्य मृत्यु दर की दिशा में भारत की महत्त्वाकांक्षी पहल

हाल ही में उत्तर प्रदेश में NAMASTE (National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem) योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें “शून्य मृत्यु दर” (Zero Fatality) के लक्ष्य को प्राप्त करने, स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। यह कार्यक्रम न केवल एक प्रशासनिक पहल था, बल्कि सामाजिक न्याय, मानव गरिमा और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

स्वच्छता कार्य से जुड़े कर्मियों को लंबे समय तक जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ा है, जिसके कारण अनेक दुर्घटनाएँ और असामयिक मृत्यु के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में NAMASTE योजना का उद्देश्य इस पारंपरिक और जोखिमपूर्ण प्रणाली को आधुनिक, सुरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है।

भारत जैसे विशाल और तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते देश में स्वच्छता व्यवस्था का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई से जुड़े कार्य लंबे समय से असंगठित, जोखिमपूर्ण और सामाजिक रूप से उपेक्षित माने जाते रहे हैं। इन कार्यों में लगे श्रमिकों को न केवल स्वास्थ्य संबंधी खतरे झेलने पड़ते हैं, बल्कि सामाजिक भेदभाव, आर्थिक असुरक्षा और मानवीय गरिमा के हनन का भी सामना करना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में NAMASTE योजना को एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण के साथ लागू किया गया है।

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नमस्ते (NAMASTE) योजना का परिचय

नमस्ते (NAMASTE) योजना, जिसका पूर्ण रूप National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem है, भारत सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता कार्यों को पूर्णतः यंत्रीकृत (Mechanised) बनाना, खतरनाक सफाई प्रथाओं को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर में समग्र सुधार लाना है। यह योजना केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानवाधिकार संरक्षण जैसे बहुआयामी उद्देश्यों को भी समाहित करती है।

यह योजना स्वच्छता कर्मियों को “सहायता प्राप्त श्रमिक” से “स्वावलंबी स्वच्छता उद्यमी” में परिवर्तित करने की अवधारणा पर आधारित है। इसके माध्यम से सरकार एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) विकसित करना चाहती है, जिसमें आधुनिक मशीनों, सुरक्षा उपकरणों, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा का समन्वित उपयोग हो सके।

मंत्रालयों की संयुक्त पहल

NAMASTE योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की संयुक्त पहल है। इन दोनों मंत्रालयों का समन्वय इस योजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। जहाँ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय स्वच्छता कर्मियों के पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है, वहीं आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय शहरी स्वच्छता ढाँचे, तकनीकी उपकरणों और यंत्रीकृत सफाई प्रणाली को सुदृढ़ करने का कार्य करता है।

यह संयुक्त मॉडल दर्शाता है कि सरकार इस समस्या को केवल स्वच्छता या श्रम मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक और मानवीय चुनौती के रूप में देख रही है।

पूर्ववर्ती योजना का प्रतिस्थापन

NAMASTE योजना ने पूर्ववर्ती ‘हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना’ (SRMS) का स्थान लिया है। SRMS का मुख्य उद्देश्य मैनुअल स्कैवेंजर्स के पुनर्वास और उन्हें वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराना था। हालांकि, समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि केवल पुनर्वास पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वच्छता कार्यों की प्रकृति को ही बदलना आवश्यक है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए NAMASTE योजना को अधिक व्यापक स्वरूप में तैयार किया गया, जिसमें पुनर्वास के साथ-साथ यंत्रीकरण, प्रशिक्षण, डिजिटल पहचान, वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी शामिल किया गया है।

योजना का विस्तार (2024-2026)

जून 2024 से NAMASTE योजना का दायरा और अधिक विस्तारित किया गया, जिसके अंतर्गत कूड़ा बीनने वालों (Waste Pickers) को भी एक लक्षित समूह के रूप में शामिल किया गया। यह कदम अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कूड़ा बीनने वाले भी स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें भी सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा वैकल्पिक आजीविका की आवश्यकता होती है।

इस विस्तार से योजना का स्वरूप और अधिक समावेशी (Inclusive) हो गया है, जिससे समाज के हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायता मिल रही है।

योजना की व्याप्ति और क्रियान्वयन

NAMASTE योजना को देश के 4800 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies – ULBs) में वर्ष 2025-26 तक लागू किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यापक क्रियान्वयन रणनीति इस तथ्य को दर्शाती है कि भारत सरकार स्वच्छता सुधार को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देख रही है।

शहरी क्षेत्रों में सीवर और सेप्टिक टैंक की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे सफाई कार्यों की जटिलता भी बढ़ी है। ऐसे में यह योजना आधुनिक मशीनों, रोबोटिक तकनीक और प्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से स्वच्छता प्रणाली को सुरक्षित और प्रभावी बनाने का कार्य कर रही है।

ERSU (Emergency Response Sanitation Units) का सुदृढ़ीकरण

खतरनाक सफाई कार्यों के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए NAMASTE योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSUs) को सुदृढ़ किया जा रहा है। इन इकाइयों को उन्नत सुरक्षा उपकरण, गैस डिटेक्शन उपकरण, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, आधुनिक मशीनें और सुरक्षात्मक पोशाक (PPE Kits) से लैस किया जा रहा है।

ERSU का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रशिक्षित और सुरक्षित टीम तुरंत मौके पर पहुँचकर कार्य को सुरक्षित ढंग से पूरा कर सके। इससे दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने की उम्मीद है।

NAMASTE योजना के मुख्य उद्देश्य

1. शून्य मृत्यु दर (Zero Fatality) का लक्ष्य

NAMASTE योजना का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को पूरी तरह समाप्त करना है। आधुनिक मशीनों, रोबोटिक उपकरणों और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मानव को सीधे खतरनाक वातावरण में प्रवेश करने की आवश्यकता को कम किया जा रहा है।

यह लक्ष्य केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक वर्ष होने वाली दुर्घटनाएँ इस बात की ओर संकेत करती हैं कि पारंपरिक सफाई पद्धतियों में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

2. मानवीय गरिमा की रक्षा

NAMASTE योजना का एक प्रमुख उद्देश्य अस्वच्छ और अमानवीय प्रथाओं को समाप्त करना है। मानव मल के सीधे संपर्क से जुड़े कार्य न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि यह मानव गरिमा के विरुद्ध भी हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है।

इस योजना के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान कर उनकी गरिमा और सम्मान को संरक्षित किया जा रहा है।

3. आर्थिक सशक्तिकरण

योजना का उद्देश्य केवल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि स्वच्छता कर्मियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास और रियायती ऋण की सुविधा के माध्यम से उन्हें स्वच्छता उद्यमी (Sanitation Entrepreneurs) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इससे उनकी आय में वृद्धि होती है, सामाजिक स्थिति में सुधार आता है और वे आत्मनिर्भर बनते हैं।

4. व्यापक सुरक्षा चक्र (Social Security Net)

NAMASTE योजना के अंतर्गत प्रमाणित स्वच्छता कर्मियों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसमें स्वास्थ्य बीमा, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और वैकल्पिक आजीविका के अवसर शामिल हैं। यह एक समग्र सुरक्षा तंत्र तैयार करता है, जो श्रमिकों के जीवन के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है।

योजना के प्रमुख लाभ

डिजिटल प्रोफाइलिंग और सत्यापन

फरवरी 2026 तक देशभर में लगभग 89,114 सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (SSWs) तथा लगभग 1.52 लाख कूड़ा बीनने वालों का डिजिटल सत्यापन और प्रोफाइलिंग की जा चुकी है। यह डिजिटल डेटाबेस नीति निर्माण, लाभ वितरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में अत्यंत सहायक है।

डिजिटल प्रोफाइलिंग से यह सुनिश्चित होता है कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे।

स्वास्थ्य सुरक्षा और बीमा

प्रमाणित स्वच्छता कर्मियों को आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है। यह सुविधा उनके और उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का कार्य करती है, विशेष रूप से तब जब वे जोखिमपूर्ण कार्यों से जुड़े होते हैं।

इसके अतिरिक्त, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी योजना के अंतर्गत प्रोत्साहित की जाती हैं।

वित्तीय सहायता और सब्सिडी

NAMASTE योजना के तहत स्वच्छता उपकरणों की खरीद के लिए ₹5 लाख तक की परियोजनाओं पर 50% तक की पूंजीगत सब्सिडी और रियायती ऋण प्रदान किया जाता है। इससे श्रमिक आधुनिक मशीनें खरीदकर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

यह पहल उन्हें मजदूरी आधारित कार्य से उद्यमिता आधारित कार्य की ओर अग्रसर करती है।

वैकल्पिक आजीविका के अवसर

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में आयोजित वर्ष 2026 के जागरूकता कार्यक्रम में कौशल प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को सिलाई मशीनें वितरित की गईं। इसका उद्देश्य यह था कि स्वच्छता कर्मी और उनके परिवार वैकल्पिक आजीविका अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

वैकल्पिक आजीविका कार्यक्रम विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

जागरूकता कार्यक्रमों का महत्व

NAMASTE योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में आयोजित 2026 का जागरूकता अभियान इस दिशा में एक उल्लेखनीय कदम था। इस कार्यक्रम में स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षा उपकरणों के उपयोग, मशीनों के संचालन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभों के बारे में जानकारी दी गई।

जागरूकता अभियान यह सुनिश्चित करते हैं कि श्रमिक अपने अधिकारों, सुरक्षा मानकों और उपलब्ध संसाधनों के प्रति जागरूक हों।

तकनीकी नवाचार और यंत्रीकरण की भूमिका

यंत्रीकृत सफाई प्रणाली NAMASTE योजना का मूल आधार है। रोबोटिक सीवर क्लीनिंग मशीनें, सक्शन-कम-जेटिंग मशीनें, गैस डिटेक्टर, हाई-प्रेशर जेटिंग सिस्टम और आधुनिक सुरक्षात्मक उपकरण इस योजना के प्रमुख तकनीकी घटक हैं। इन तकनीकों के उपयोग से मानव हस्तक्षेप कम होता है और दुर्घटनाओं की संभावना घटती है।

तकनीकी नवाचार स्वच्छता कार्यों को अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी बनाते हैं।

सामाजिक प्रभाव और परिवर्तन

NAMASTE योजना का सामाजिक प्रभाव अत्यंत व्यापक है। यह योजना न केवल स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर में सुधार ला रही है, बल्कि समाज में उनके प्रति सम्मान और संवेदनशीलता भी बढ़ा रही है। लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा का सामना करने वाले इन कर्मियों को अब पहचान, सम्मान और सुरक्षा मिल रही है।

यह योजना सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा देती है और समानता आधारित समाज की दिशा में एक मजबूत कदम है।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालाँकि NAMASTE योजना एक महत्त्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल है, फिर भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं, जैसे—

  • पूर्ण यंत्रीकरण के लिए पर्याप्त मशीनों की उपलब्धता
  • स्थानीय निकायों की क्षमता में अंतर
  • प्रशिक्षण और तकनीकी कौशल की कमी
  • सामाजिक मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता

इन चुनौतियों के समाधान के लिए निरंतर नीति सुधार, वित्तीय निवेश, तकनीकी प्रशिक्षण और जन-जागरूकता आवश्यक है।

निष्कर्ष

नमस्ते (NAMASTE) योजना भारत सरकार की एक ऐतिहासिक और मानवीय पहल है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता लाना है। यह योजना केवल स्वच्छता सुधार कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और तकनीकी प्रगति का समन्वित मॉडल है। शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य, यंत्रीकृत सफाई प्रणाली, डिजिटल प्रोफाइलिंग, स्वास्थ्य सुरक्षा, वित्तीय सहायता और वैकल्पिक आजीविका जैसे बहुआयामी उपाय इस योजना को अत्यंत प्रभावी बनाते हैं।

उत्तर प्रदेश में आयोजित 2026 का जागरूकता कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि सरकार और प्रशासन स्वच्छता कर्मियों के सशक्तिकरण के प्रति गंभीर हैं। यदि इस योजना का प्रभावी और व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो निकट भविष्य में भारत न केवल मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथाओं को पूर्णतः समाप्त कर सकेगा, बल्कि एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आधुनिक स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना भी कर पाएगा।

इस प्रकार, NAMASTE योजना “स्वच्छता से सम्मान” और “सुरक्षा से सशक्तिकरण” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो भारत को एक अधिक समावेशी, सुरक्षित और गरिमामय समाज की ओर अग्रसर कर रहा है।


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