भारत की BRICS अध्यक्षता 2026: वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में जन-केंद्रित और समावेशी नेतृत्व की दिशा

21वीं सदी के तीसरे दशक में विश्व व्यवस्था तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी क्रांति और विकासशील देशों के सामने बढ़ती असमानताएँ वैश्विक शासन तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। ऐसे समय में BRICS जैसे मंचों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक आवाज़ को वैश्विक स्तर पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हैं।

इसी वैश्विक संदर्भ में भारत ने BRICS अध्यक्षता 2026 की औपचारिक तैयारियाँ प्रारंभ कर दी हैं। इस क्रम में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा नई दिल्ली में BRICS 2026 का आधिकारिक लोगो, थीम और समर्पित वेबसाइट का सार्वजनिक रूप से शुभारंभ किया गया। यह पहल न केवल भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता की शुरुआत है, बल्कि BRICS के 20 वर्षों की यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को भी चिह्नित करती है।

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क्यों है यह खबर में?

भारत की BRICS अध्यक्षता 1 जनवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है।
हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने:

का उद्घाटन किया।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी की आशंकाएँ और बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं। ऐसे में भारत की BRICS अध्यक्षता को जन-केंद्रित, समावेशी और सहयोगात्मक वैश्विक नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।

BRICS: परिचय और विकास यात्रा

BRICS क्या है?

BRICS प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग, राजनीतिक संवाद और विकास संबंधी समन्वय को बढ़ावा देना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • 2006: BRIC (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) के रूप में स्थापना
  • 2010: दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से BRICS बना
  • 2024–25 के बाद विस्तार:
    • मिस्र
    • इथियोपिया
    • ईरान
    • सऊदी अरब
    • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
    • इंडोनेशिया

इस विस्तार ने BRICS को ग्लोबल साउथ का सबसे प्रभावशाली मंच बना दिया है।

वैश्विक महत्व

वर्तमान में BRICS:

  • विश्व की लगभग 49.5% आबादी
  • लगभग 40% वैश्विक GDP
  • करीब 26% वैश्विक व्यापार

का प्रतिनिधित्व करता है।
यह आँकड़े BRICS को वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक विमर्श में एक निर्णायक शक्ति बनाते हैं।

भारत और BRICS: नेतृत्व की निरंतरता

भारत पहले भी तीन बार BRICS की अध्यक्षता कर चुका है और प्रत्येक अवसर पर उसने:

  • विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को उठाया
  • संस्थागत सुधारों पर बल दिया
  • सहयोग को व्यावहारिक परिणामों में बदलने की कोशिश की

2026 की अध्यक्षता भारत के लिए इसलिए भी विशेष है क्योंकि:

  • BRICS के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं
  • मंच का विस्तार हो चुका है
  • वैश्विक चुनौतियाँ अधिक जटिल हो गई हैं

BRICS अध्यक्षता 2026 की थीम और दर्शन

आधिकारिक थीम

“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
(लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण)

मार्गदर्शक दर्शन

यह थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Humanity-first” और “People-centric” दृष्टिकोण से प्रेरित है।

इसका मूल उद्देश्य है:

  • वैश्विक विकास में मानव हित को सर्वोपरि रखना
  • केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देना
  • सहयोग को केवल कूटनीतिक बयान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक समाधान में बदलना

भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 की प्रमुख प्राथमिकताएँ

1. जन-केंद्रित विकास (People-centric Development)

भारत का मानना है कि वैश्विक नीतियों का अंतिम लक्ष्य आम नागरिक का जीवन बेहतर बनाना होना चाहिए।
इसलिए:

  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खाद्य सुरक्षा
  • डिजिटल समावेशन

जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

2. लचीलापन (Resilience)

महामारी, जलवायु आपदाएँ और आर्थिक झटके यह दिखा चुके हैं कि वैश्विक प्रणाली कितनी अस्थिर है।
भारत की अध्यक्षता में:

  • आपदा प्रबंधन
  • आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन
  • ऊर्जा सुरक्षा

पर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

3. नवाचार और प्रौद्योगिकी

  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
  • फिनटेक
  • AI और उभरती तकनीकें

भारत अपने अनुभव साझा कर BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करेगा।

4. सततता (Sustainability)

जलवायु परिवर्तन BRICS देशों के लिए एक साझा चुनौती है।
भारत:

  • हरित ऊर्जा
  • जलवायु वित्त
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs)

पर सहयोग को प्राथमिकता देगा।

BRICS 2026 लोगो: प्रतीकात्मक अर्थ और संदेश

भारत द्वारा लॉन्च किया गया BRICS 2026 का आधिकारिक लोगो गहरे प्रतीकात्मक अर्थ से युक्त है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कमल से प्रेरित डिज़ाइन
    • भारतीय संस्कृति में कमल शुद्धता, समृद्धि और लचीलापन का प्रतीक है
  • नमस्ते मुद्रा
    • सम्मान, संवाद और सहयोग का संदेश
    • “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का प्रतिबिंब
  • पंखुड़ियों में सदस्य देशों के रंग
    • एकता में विविधता
    • समानता और पारस्परिक सम्मान

समग्र संदेश

लोगो यह दर्शाता है कि BRICS:

  • अपनी विविध पहचान को बनाए रखते हुए
  • सामूहिक शक्ति और साझा उद्देश्यों के साथ
  • भविष्य की ओर अग्रसर है

BRICS 2026 वेबसाइट: डिजिटल कूटनीति का केंद्र

वेबसाइट का उद्देश्य

brics2026.gov.in भारत की अध्यक्षता के दौरान एक केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगी।

प्रमुख भूमिकाएँ

  • सभी आधिकारिक बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी
  • घोषणापत्र, दस्तावेज़ और परिणाम
  • परियोजनाओं और पहलों का विवरण
  • समाचार और अपडेट

महत्व

  • पारदर्शिता में वृद्धि
  • सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय
  • नागरिकों और शोधकर्ताओं की पहुँच

यह वेबसाइट भारत की डिजिटल कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में BRICS की प्रासंगिकता

डॉ. एस. जयशंकर के अनुसार, आज की दुनिया:

  • भू-राजनीतिक तनाव
  • आर्थिक अनिश्चितता
  • जलवायु संकट
  • तेज़ तकनीकी बदलाव
  • विकास अंतर

जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

ऐसे में BRICS:

  • संवाद का मंच
  • सहयोग का माध्यम
  • और संतुलित वैश्विक व्यवस्था का समर्थक

बनकर उभरता है।

भारत की अध्यक्षता का लक्ष्य BRICS को:

  • अधिक परिणामोन्मुख
  • अधिक विश्वसनीय
  • और अधिक समावेशी

मंच बनाना है।

BRICS और ग्लोबल साउथ की आवाज़

BRICS केवल आर्थिक समूह नहीं है, बल्कि:

  • यह ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का प्रतिनिधि है
  • वैश्विक संस्थानों में सुधार की माँग को बल देता है
  • विकासशील देशों को वैकल्पिक मंच प्रदान करता है

भारत की अध्यक्षता में यह भूमिका और सशक्त होने की संभावना है।

निष्कर्ष

भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 केवल एक कूटनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की परीक्षा है।
लोगो और वेबसाइट का लॉन्च इस बात का संकेत है कि भारत:

  • स्पष्ट दृष्टि
  • मजबूत तैयारी
  • और समावेशी सोच

के साथ इस भूमिका को निभाने के लिए तैयार है।

BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत की अध्यक्षता:

  • जन-केंद्रित विकास
  • व्यावहारिक सहयोग
  • और सतत भविष्य

की दिशा में एक नया अध्याय लिख सकती है।

यदि यह दृष्टि प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो BRICS न केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच रहेगा, बल्कि 21वीं सदी की वैश्विक शासन व्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है।


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