भारत टैक्सी : सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग सेवा की नई क्रांति

भारत में सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने और गिग इकोनॉमी से जुड़े लाखों श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत की पहली सहकारी-आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ (Bharat Taxi) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध है। यह पहल न केवल परिवहन क्षेत्र में एक नया विकल्प प्रस्तुत करती है, बल्कि सहकार से समृद्धि की अवधारणा को व्यवहारिक रूप में लागू करने का प्रयास भी है।

भारत टैक्सी को देश का पहला सहकारी-आधारित डिजिटल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म माना जा रहा है, जो निजी एग्रीगेटर कंपनियों जैसे ओला और उबर के विकल्प के रूप में उभर रहा है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ड्राइवरों को मालिकाना हक प्रदान करना, यात्रियों को किफायती और पारदर्शी सेवाएं देना तथा गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। यह सेवा पारंपरिक निजी मॉडल के बजाय सहकारी मॉडल पर आधारित है, जिसमें लाभ का वितरण निवेशकों के बजाय सीधे श्रमिकों के बीच किया जाता है।

भारत टैक्सी क्या है?

भारत टैक्सी एक डिजिटल राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (Sahakar Taxi Cooperative Limited) द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत है। इसका मूल उद्देश्य ड्राइवरों को केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म का मालिक बनाना है।

भारत टैक्सी का मूल मंत्र है – “सारथी ही मालिक”। इस विचारधारा के तहत चालक स्वयं इस प्लेटफॉर्म के भागीदार बनते हैं और उन्हें आय का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ती है, बल्कि उन्हें सम्मान और आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है।

सरकार का लक्ष्य इस सेवा को अगले कुछ वर्षों में पूरे देश में विस्तारित करना है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं का विस्तार हो सके।

नाम समान होने से होने वाला भ्रम

यह ध्यान देने योग्य है कि “भारत टैक्सी” नाम से पहले से संचालित निजी कैब सेवा Bharat Taxi (आधिकारिक वेबसाइट) और हाल ही में शुरू की गई सहकारी आधारित “भारत टैक्सी” योजना दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं। Bharattaxi एक निजी ऑनलाइन टैक्सी बुकिंग प्लेटफॉर्म है, जो कई वर्षों से लोकल और आउटस्टेशन कैब सेवाएं प्रदान कर रहा है। वहीं, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू की गई नई “भारत टैक्सी” एक सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य ड्राइवरों को मालिकाना हक, बेहतर आय वितरण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसलिए आर्टिकल पढ़ते समय दोनों के बीच अंतर समझना आवश्यक है।

लॉन्च और पायलट प्रोजेक्ट

भारत टैक्सी के औपचारिक लॉन्च से पहले दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में दो महीने का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। यह परीक्षण सफल रहा और इसके सकारात्मक परिणामों के आधार पर अब इस सेवा को व्यावसायिक रूप से शुरू किया गया है।

पायलट प्रोजेक्ट के दौरान लाखों ड्राइवर और यात्री इस प्लेटफॉर्म से जुड़े, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सहकारी मॉडल पर आधारित डिजिटल मोबिलिटी सेवा की देश में व्यापक संभावनाएं हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, लाखों उपयोगकर्ता इस सेवा से जुड़ चुके हैं और ड्राइवरों की बड़ी संख्या इसमें शामिल हुई है।

सहकारी संस्थानों का समर्थन

भारत टैक्सी को देश के कई प्रमुख सहकारी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। इनमें शामिल हैं—

  • इफ्को (IFFCO)
  • अमूल (AMUL)
  • कृभको (KRIBHCO)
  • नाफेड (NAFED)
  • नाबार्ड (NABARD)

इन संस्थाओं का सहयोग भारत टैक्सी को आर्थिक और संस्थागत मजबूती प्रदान करता है। सहकारी क्षेत्र में इन संस्थानों का व्यापक अनुभव इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

भारत टैक्सी की प्रमुख विशेषताएं

1. जीरो कमीशन मॉडल

भारत टैक्सी की सबसे बड़ी विशेषता इसका जीरो कमीशन मॉडल है। निजी एग्रीगेटर कंपनियां आमतौर पर ड्राइवरों से 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लेती हैं, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। इसके विपरीत, भारत टैक्सी में किराए का पूरा हिस्सा ड्राइवर के खाते में सीधे भेजा जाता है।

यह मॉडल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है और उन्हें स्थिर आय प्रदान करता है। इससे श्रमिकों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे लंबे समय तक इस प्लेटफॉर्म से जुड़े रहते हैं।

2. नो-सर्ज प्राइसिंग

भारत टैक्सी यात्रियों के लिए भी राहत प्रदान करती है। इसमें मांग बढ़ने पर किराए में अचानक वृद्धि नहीं की जाती। निजी कंपनियों में सर्ज प्राइसिंग के कारण यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ता है, जबकि भारत टैक्सी स्थिर और पारदर्शी किराया सुनिश्चित करती है।

यह व्यवस्था यात्रियों में विश्वास पैदा करती है और सेवा को अधिक लोकप्रिय बनाती है।

3. सामाजिक सुरक्षा

भारत टैक्सी ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान देती है। इसके अंतर्गत—

  • ₹5 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा
  • ₹5 लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा
  • पेंशन और सेवानिवृत्ति कोष

ये सुविधाएं गिग वर्कर्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पारंपरिक गिग प्लेटफॉर्म्स में ऐसी सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती।

4. महिला सशक्तिकरण

भारत टैक्सी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी प्रयासरत है। इसके तहत ‘बाइक दीदी’ पहल शुरू की गई है, जिसमें महिला चालकों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं।

यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने में सहायक है।

5. डिजिटल एकीकरण

भारत टैक्सी आधुनिक तकनीक पर आधारित प्लेटफॉर्म है। इसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।

यह सेवा निम्न सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी हुई है—

  • डिजी लॉकर (DigiLocker)
  • उमंग (UMANG)
  • API सेतु

इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़ाव के कारण ड्राइवर और यात्रियों का सत्यापन तेजी से और सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।

6. मल्टी-मोबिलिटी विकल्प

भारत टैक्सी विभिन्न प्रकार की परिवहन सेवाएं प्रदान करती है, जैसे—

  • ऑटो रिक्शा
  • बाइक टैक्सी
  • इकोनॉमी कार
  • सेडान
  • XL श्रेणी वाहन

यह विविधता यात्रियों को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार सेवा चुनने का विकल्प देती है।

अन्य राइड-हेलिंग ऐप्स से अंतर

भारत टैक्सी पारंपरिक राइड-हेलिंग ऐप्स से कई मायनों में अलग है। निजी कंपनियों में ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता होते हैं, जबकि भारत टैक्सी में वे प्लेटफॉर्म के भागीदार और मालिक होते हैं।

यह मॉडल चार प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है—

  1. मालिकाना हक
  2. सामाजिक सुरक्षा
  3. गरिमा
  4. समावेशी विकास

यह व्यवस्था ड्राइवरों को सम्मान और स्थिर आय प्रदान करती है, जिससे गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार होता है।

ड्राइवरों की आय और कमीशन मॉडल

भारत टैक्सी ड्राइवर-हितैषी आय मॉडल अपनाती है। इसमें कमाई का अधिकांश हिस्सा ड्राइवरों को मिलता है। इससे उनकी आय बढ़ती है और आर्थिक असुरक्षा कम होती है।

यह मॉडल निजी प्लेटफॉर्म्स की तुलना में अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत माना जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद प्रतिस्पर्धी कंपनियों को भी अपने कमीशन ढांचे में बदलाव करना पड़ा।

गिग इकोनॉमी में सुधार

भारत टैक्सी को गिग इकोनॉमी में सुधार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। गिग वर्कर्स अक्सर अस्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की कमी का सामना करते हैं। सहकारी मॉडल उन्हें स्थिरता और अधिकार प्रदान करता है।

यह पहल प्लेटफॉर्म कोऑपरेटिविज्म की अवधारणा को मजबूत करती है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का स्वामित्व श्रमिकों के पास होता है।

आर्थिक समावेशन में भूमिका

भारत टैक्सी आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देती है। इसमें लाभ का वितरण निवेशकों के बजाय श्रमिकों के बीच होता है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

यह मॉडल छोटे शहरों और कस्बों में रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।

स्वदेशी विकल्प और डेटा संप्रभुता

भारत टैक्सी विदेशी निवेश वाले एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स का स्वदेशी विकल्प प्रस्तुत करती है। यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूत करती है और स्थानीय नियंत्रण को प्राथमिकता देती है।

डेटा संप्रभुता के दृष्टिकोण से भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहता है।

विस्तार योजना

सरकार की योजना भारत टैक्सी को अगले कुछ वर्षों में पूरे देश में विस्तारित करने की है। इसका लक्ष्य कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक सेवा उपलब्ध कराना है।

यह विस्तार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को सुलभ बनाएगा और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेगा।

प्रारंभिक सफलता और भविष्य की संभावनाएं

भारत टैक्सी ने लॉन्च के शुरुआती चरण में ही बड़ी सफलता हासिल की है। लाखों ड्राइवर और यात्री इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। कई बड़ी कंपनियों के साथ समझौते की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे इसके विस्तार को और मजबूती मिलेगी।

भविष्य में यह प्लेटफॉर्म भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है और सहकारी मॉडल को नई पहचान दे सकता है।

चुनौतियां और संभावित समाधान

हालांकि भारत टैक्सी की अवधारणा अत्यंत प्रभावशाली है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं—

  • निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा
  • तकनीकी संरचना का विस्तार
  • सेवा गुणवत्ता बनाए रखना
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और सहकारी संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा।

निष्कर्ष

भारत टैक्सी भारत के परिवहन और सहकारिता क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल है। यह केवल एक राइड-हेलिंग सेवा नहीं, बल्कि श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने का एक नया मॉडल है।

जीरो कमीशन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल एकीकरण जैसी विशेषताएं इसे अन्य प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाती हैं। यह पहल गिग इकोनॉमी में सुधार, आर्थिक समावेशन और स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यदि भारत टैक्सी अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो यह न केवल भारत बल्कि विश्व के लिए सहकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म का एक आदर्श मॉडल बन सकती है। आने वाले वर्षों में यह सेवा परिवहन क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने और लाखों लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

स्रोत / संदर्भ

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)


इन्हें भी देखें –

Leave a Comment

Contents
सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.