भारत की आर्थिक नीति में 01 फरवरी 2026 एक अहम पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 प्रस्तुत किया। यह बजट केवल अगले वित्त वर्ष के लिए आय–व्यय का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों के लिए कर प्रणाली, प्रशासनिक ढांचे और निवेश व्यवहार की दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ भी है।
इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें व्यक्तिगत आयकर, कर प्रशासन सुधार और कर प्रणाली की सरलता को केंद्र में रखा गया है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि करदाताओं का भरोसा बढ़ाना, अनुपालन को आसान बनाना और अर्थव्यवस्था में तरलता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नया आयकर अधिनियम, 2025: 1 अप्रैल 2026 से नई शुरुआत
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जुलाई 2025 में अधिसूचित नया आयकर अधिनियम, 2025 अब 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। यह कानून मौजूदा आयकर अधिनियम की जटिलताओं को दूर करने और इसे अधिक नागरिक-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें:
- भाषा को सरल और स्पष्ट बनाया गया है
- अस्पष्ट प्रावधानों को हटाया गया है
- पुराने और अप्रासंगिक संदर्भों को समाप्त किया गया है
सरकार का दावा है कि यह कानून करदाताओं के लिए समझने में आसान, पारदर्शी और विवाद-मुक्त होगा।
आईटी नियम और रिटर्न फॉर्म: पहले से मिलेगी तैयारी का समय
बजट में यह भी घोषणा की गई कि:
- नए आयकर नियम
- आयकर रिटर्न (ITR) के नए फॉर्म
को काफी पहले अधिसूचित किया जाएगा, ताकि करदाता समय रहते खुद को नई व्यवस्था के अनुरूप ढाल सकें।
नए रिटर्न फॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि:
- आम नागरिक
- वेतनभोगी वर्ग
- छोटे व्यापारी और फ्रीलांसर
सभी के लिए अनुपालन आसान हो। यह बदलाव उस शिकायत को दूर करने की दिशा में है, जिसमें करदाता अक्सर यह कहते रहे हैं कि आयकर फॉर्म अत्यधिक तकनीकी और जटिल होते हैं।
छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम: 2027 की दिशा
वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि वित्त वर्ष 2027 के बजट में छोटे करदाताओं के लिए नियम-आधारित स्वचालित (ऑटोमेटेड) कर प्रक्रिया लागू की जाएगी।
इस व्यवस्था के तहत:
- कम आय वाले करदाताओं के मामलों में
- न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप होगा
- सिस्टम स्वयं नियमों के आधार पर कर निर्धारण करेगा
इससे न केवल करदाताओं को राहत मिलेगी, बल्कि कर प्रशासन की दक्षता भी बढ़ेगी।
पिछले बजट की निरंतरता: वेतनभोगी वर्ग पर फोकस
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी याद दिलाया कि केंद्रीय बजट 2025–26 में व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए थे।
उन सुधारों का उद्देश्य था:
- वेतनभोगी वर्ग को राहत देना
- डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाना
- खपत को प्रोत्साहित करना
- आर्थिक विकास को गति देना
बजट 2026–27 उसी नीति की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें करदाता को केवल राजस्व का स्रोत नहीं बल्कि आर्थिक विकास का साझेदार माना गया है।
कर प्रशासन सुधार: ICDS और IndAS का एकीकरण
कर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। बजट में घोषणा की गई कि:
- कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA)
- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)
की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी।
इस समिति का उद्देश्य:
- आय गणना एवं प्रकटीकरण मानकों (ICDS)
- भारतीय लेखा मानकों (IndAS)
को एकीकृत करना है।
2027–28 से बड़ा बदलाव
इस एकीकरण के बाद:
- कर वर्ष 2027–28 से
- ICDS के अंतर्गत अलग से लेखा-पालन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी
इससे:
- दोहराव कम होगा
- अनुपालन लागत घटेगी
- कंपनियों के लिए कर व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी
शेयर बायबैक (Share Buyback) पर कर व्यवस्था: दुरुपयोग पर रोक
बजट 2026–27 में शेयर बायबैक से जुड़े कर नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार का मानना है कि अब तक बायबैक का इस्तेमाल डिविडेंड टैक्स से बचने के लिए कर आर्बिट्राज के रूप में किया जाता रहा है।
नया प्रावधान
अब:
- सभी शेयरधारकों के लिए
- उनकी श्रेणी की परवाह किए बिना
- शेयर बायबैक से होने वाली आय पर
पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) के रूप में कर लगाया जाएगा।
प्रमोटरों पर अतिरिक्त भार
दुरुपयोग को रोकने के लिए:
- प्रमोटरों पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाया जाएगा
परिणामस्वरूप:
- कॉर्पोरेट प्रमोटरों पर प्रभावी कर दर ≈ 22%
- गैर-कॉर्पोरेट प्रमोटरों पर ≈ 30%
इसका उद्देश्य कर निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
TCS युक्तिकरण: नकदी प्रवाह को राहत
बजट में स्रोत पर कर संग्रह (TCS) की दरों को तर्कसंगत बनाने की घोषणा की गई है, ताकि व्यापार और उपभोक्ताओं पर नकदी का अनावश्यक दबाव न पड़े।
नई TCS दरें
- स्क्रैप, खनिज, मादक शराब → 2%
- तेंदू पत्ते → 5% से घटाकर 2%
विदेश प्रेषण (LRS) में राहत
- ₹10 लाख से अधिक के विदेशी प्रेषण पर
- शिक्षा और चिकित्सा → TCS 2%
- अन्य उद्देश्यों → 20% (यथावत)
यह कदम विदेश में पढ़ाई या इलाज कराने वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
डेरिवेटिव्स बाजार: STT में बढ़ोतरी
बजट में डेरिवेटिव्स बाजार में बढ़ती सट्टेबाज़ी पर चिंता जताते हुए प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया।
नई दरें
- फ्यूचर्स → 0.02% से बढ़ाकर 0.05%
- ऑप्शंस → प्रीमियम और एक्सरसाइज़ पर 0.15%
सरकार का मानना है कि इससे:
- अत्यधिक सट्टेबाज़ी पर रोक लगेगी
- बाजार में स्थिरता आएगी
- दीर्घकालिक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
MAT में ऐतिहासिक सुधार: अंतिम कर व्यवस्था
बजट 2026–27 में न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) से जुड़ा एक ऐतिहासिक बदलाव किया गया है।
1 अप्रैल 2026 से
- MAT को अंतिम कर बना दिया जाएगा
- नया MAT क्रेडिट जमा नहीं होगा
दर में कटौती
- MAT दर 15% से घटाकर 14%
पुराना MAT क्रेडिट
- 31 मार्च 2026 तक जमा MAT क्रेडिट
- आगे भी सेट-ऑफ के लिए उपलब्ध रहेगा
- लेकिन केवल:
- नई कर व्यवस्था के तहत
- कर देयता के अधिकतम 25% तक
इसका उद्देश्य कंपनियों को नई और सरल कर व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
मुख्य कर शब्दों की सरल व्याख्या
न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT):
ऐसा कर प्रावधान, जिसके तहत कंपनियों को न्यूनतम कर देना होता है, भले ही छूट के कारण उनका सामान्य कर कम हो।
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT):
स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की खरीद-बिक्री पर लगाया जाने वाला कर।
स्रोत पर संकलित कर (TCS):
विक्रेता द्वारा बिक्री के समय खरीदार से वसूला गया कर, जो बाद में सरकार को जमा किया जाता है।
निष्कर्ष: कर सुधारों का संतुलित रोडमैप
केंद्रीय बजट 2026–27 को यदि एक वाक्य में समझा जाए तो यह कहा जा सकता है कि यह सरलीकरण, पारदर्शिता और कर निष्पक्षता का बजट है।
जहां एक ओर:
- व्यक्तिगत करदाताओं को राहत
- अनुपालन को आसान बनाने की पहल
की गई है, वहीं दूसरी ओर:
- कर आर्बिट्राज
- सट्टेबाज़ी
- जटिल लेखा प्रक्रियाओं
पर सख्ती भी दिखाई देती है।
यह बजट न केवल अगले वित्त वर्ष की दिशा तय करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारत की कर प्रणाली अब आधुनिक, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनने की ओर तेजी से बढ़ रही है।
इन्हें भी देखें –
- केंद्रीय बजट 2026–27: आम आदमी के लिए राहत और चुनौतियों का संतुलित दस्तावेज़
- आम बजट 2026: सेवाक्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना पर केंद्रित ऐतिहासिक बजट
- आर्यन वर्शनेय: भारत के 92वें शतरंज ग्रैंडमास्टर
- Google TranslateGemma: ओपन-सोर्स AI अनुवाद की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल
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