India–US Interim Trade Framework: भारत–अमेरिका व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़

7 फरवरी, 2026 को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने जिस ‘अंतरिम व्यापार ढांचे’ (Interim Trade Framework) की घोषणा की, वह केवल एक अस्थायी समझौता नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की दिशा में एक निर्णायक और दूरगामी कदम है। यह ढांचा ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला संकट, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और संरक्षणवाद जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

भारत और अमेरिका—दोनों लोकतांत्रिक, बाजार-आधारित और नवाचार-प्रेरित अर्थव्यवस्थाएँ—अब अपने संबंधों को केवल रणनीतिक या रक्षा सहयोग तक सीमित न रखकर व्यापक आर्थिक साझेदारी (Comprehensive Economic Partnership) की ओर ले जा रहे हैं। यह अंतरिम व्यापार ढांचा इसी दृष्टिकोण की ठोस अभिव्यक्ति है।

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अंतरिम व्यापार ढांचे की पृष्ठभूमि

भारत–अमेरिका व्यापार संबंध लंबे समय से अवसरों और विवादों का मिश्रण रहे हैं। एक ओर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक 190 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका था, वहीं दूसरी ओर टैरिफ विवाद, डिजिटल टैक्स, डेटा लोकलाइजेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित शुल्क जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहे।

अगस्त 2025 में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के कारण अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, जिससे व्यापारिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों ने यह महसूस किया कि विवादों को पीछे छोड़ते हुए एक व्यावहारिक, चरणबद्ध और विश्वास-आधारित व्यापार ढांचा विकसित करना आवश्यक है।

India–US Interim Trade Framework के प्रमुख प्रावधान

1. टैरिफ में ऐतिहासिक कटौती

इस अंतरिम ढांचे की सबसे बड़ी विशेषता अमेरिकी टैरिफ नीति में किया गया व्यापक सुधार है।

  • अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले औसत टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है।
  • अगस्त 2025 में लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क पूर्णतः हटा लिया गया है।
  • यह 18% टैरिफ विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों पर लागू होगा:
    • टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स
    • लेदर और फुटवियर
    • प्लास्टिक और रबर उत्पाद
    • ऑर्गेनिक केमिकल्स
    • होम डेकोर और हस्तशिल्प
    • कुछ मशीनरी और औद्योगिक उत्पाद

👉 यह कदम भारत के श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों के लिए अमेरिकी बाजार को पहले से कहीं अधिक सुलभ बनाता है।

2. शून्य शुल्क (Zero Tariff) की दिशा में प्रगति

अंतरिम ढांचे का एक और महत्वपूर्ण पहलू कुछ रणनीतिक उत्पादों पर टैरिफ को शून्य (0%) करने का लक्ष्य है।

इनमें शामिल हैं:

  • जेनेरिक दवाएँ
  • Dried Distillers’ Grains (DDGs)
  • पशु चारा (लाल ज्वार)
  • ड्राई फ्रूट
  • सोयाबीन तेल
  • विमान और उनके कल-पुर्जे

यह प्रावधान न केवल व्यापार लागत घटाएगा बल्कि स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और विमानन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी मजबूती देगा।

3. संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: भारत की स्पष्ट नीति

भारत ने इस समझौते में यह स्पष्ट कर दिया है कि:

  • कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं किया गया है।
  • भारतीय किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

यह रुख भारत की उस दीर्घकालिक नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य संप्रभुता और ग्रामीण आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

क्षेत्रीय पहुंच और बाजार विस्तार

4. अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य

भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदने की योजना की घोषणा की है। यह आयात मुख्यतः निम्न क्षेत्रों से होगा:

(क) ऊर्जा क्षेत्र

  • कच्चा तेल
  • LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस)
  • कोकिंग कोल

👉 इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और मध्य पूर्व तथा रूस पर निर्भरता में संतुलन आएगा।

(ख) रक्षा और विमानन

  • विमान
  • विमान के कल-पुर्जे
  • रक्षा उपकरण

(ग) प्रौद्योगिकी

  • सेमीकंडक्टर
  • डेटा सेंटर से संबंधित उन्नत तकनीक

डिजिटल व्यापार और तकनीकी सहयोग

5. डिजिटल व्यापार नियमों की रूपरेखा

भारत और अमेरिका पहली बार “डिजिटल व्यापार नियमों” को परिभाषित करने के लिए औपचारिक रूप से साथ आए हैं।

इसके अंतर्गत:

  • सीमा पार डेटा प्रवाह को सुगम बनाया जाएगा
  • डिजिटल सेवाओं में भेदभावपूर्ण प्रथाओं को समाप्त किया जाएगा
  • डेटा सुरक्षा और उपभोक्ता गोपनीयता पर सहयोग बढ़ेगा

👉 इससे भारतीय IT और सेवा क्षेत्र को अमेरिकी डेटा बाजार में अधिक स्पष्टता और सुरक्षा मिलेगी।

6. बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता

दोनों देश उन नीतियों और प्रथाओं को समाप्त करने पर सहमत हुए हैं जो:

  • डिजिटल सेवाओं में बाधा डालती हैं
  • सीमा पार डेटा प्रवाह को अनावश्यक रूप से सीमित करती हैं
  • तकनीकी सहयोग को धीमा करती हैं

7. उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग

इस ढांचे के तहत:

  • GPU (Graphics Processing Units)
  • डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले उन्नत उपकरण

के व्यापार और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह पहल AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत की क्षमता को सशक्त करेगी।

आपूर्ति श्रृंखला और भू-आर्थिक रणनीति

8. सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत और अमेरिका ने:

  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

को मजबूत करने के लिए ‘गैर-बाजार नीतियों’ (Non-Market Policies) के खिलाफ एकजुट होने पर सहमति जताई है।

👉 इसका स्पष्ट संकेत चीन-केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने की रणनीति है।

9. iCET (Initiative on Critical and Emerging Technologies) का विस्तार

यह अंतरिम व्यापार ढांचा iCET के उद्देश्यों को केवल रणनीतिक दस्तावेज़ से निकालकर व्यावहारिक व्यापारिक धरातल पर उतारता है।

iCET के तहत:

  • सेमीकंडक्टर
  • AI
  • क्वांटम
  • डेटा सुरक्षा

जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आर्थिक आयाम मिला है।

अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और प्रावधान

  • अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद अमेरिका:
    • जेनेरिक दवाइयों
    • रत्न-आभूषण
    • विमान पुर्जों
    पर लगाए गए Reciprocal Tariff हटाएगा।
  • अमेरिका भारत से आने वाले:
    • एल्यूमिनियम
    • स्टील
    • कॉपर
    पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित टैरिफ भी हटाएगा।
  • तकनीकी नियमों को सरल बनाने के लिए Conformity Assessment Procedures पर चर्चा होगी।
  • भारत को ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए प्रेफरेंशियल टैरिफ कोटा मिलेगा।

आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव

1. निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन

टेक्सटाइल, चमड़ा, हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में:

  • रोजगार सृजन
  • MSME को बढ़ावा
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

मिलेगी।

2. IT और सेवा क्षेत्र को नई उड़ान

डिजिटल व्यापार नियमों में स्पष्टता से:

  • भारतीय IT कंपनियों को कानूनी सुरक्षा
  • डेटा सेवाओं में नए अवसर
  • अमेरिकी बाजार में स्थिरता

मिलेगी।

3. ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की भूमिका

यह समझौता भारत को:

  • चीन के विकल्प
  • विश्वसनीय उत्पादन केंद्र
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के प्रमुख नोड

के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

4. तकनीकी संप्रभुता और चीन पर निर्भरता में कमी

सेमीकंडक्टर, डेटा और डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका से सहयोग:

  • भारत की तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करेगा
  • रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा

निष्कर्ष

India–US Interim Trade Framework केवल एक व्यापारिक दस्तावेज़ नहीं बल्कि 21वीं सदी की भू-आर्थिक और तकनीकी साझेदारी का खाका है। यह समझौता भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक आत्मविश्वासी, प्रतिस्पर्धी और रणनीतिक रूप से सक्षम बनाता है, वहीं अमेरिका के लिए भारत एक विश्वसनीय साझेदार और उभरता हुआ आर्थिक स्तंभ बनकर सामने आता है।

यह अंतरिम ढांचा आने वाले वर्षों में पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का आधार बनेगा और भारत–अमेरिका संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” से आगे बढ़ाकर व्यापक आर्थिक साझेदारी में रूपांतरित करेगा।


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