रायसीना डायलॉग 2026: वैश्विक भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख मंच

भारत की राजधानी नई दिल्ली में 5 से 7 मार्च 2026 तक रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, रणनीतिक विशेषज्ञों, उद्योग जगत के नेताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया। यह सम्मेलन भारत का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक (Geopolitical) और भू-अर्थशास्त्रीय (Geo-economic) मंच माना जाता है। दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, रणनीतिक विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और शिक्षाविदों के लिए यह एक ऐसा मंच बन चुका है, जहां वैश्विक व्यवस्था, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीक और विकास से जुड़े जटिल मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाता है।

इस वर्ष के सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई, जिनमें भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक संस्थाओं का सुधार, जलवायु परिवर्तन, व्यापार, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय प्रमुख रहे। रायसीना डायलॉग अब केवल भारत का कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा वैश्विक मंच बन चुका है जहां से विश्व राजनीति और वैश्विक सहयोग की नई दिशाओं पर विचार किया जाता है।

Table of Contents

रायसीना डायलॉग 2026: मुख्य विवरण

रायसीना डायलॉग 2026 के प्रमुख तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • तिथि: 5 से 7 मार्च 2026
  • स्थान: नई दिल्ली, भारत
  • संस्करण: 11वां
  • मुख्य अतिथि: फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब
  • थीम: “संस्कार: आग्रह, अनुकूलन, उन्नति”
    (Saṁskāra: Assertion, Accommodation, Advancement)

इस वर्ष की थीम भारतीय दार्शनिक विचार ‘संस्कार’ से प्रेरित है, जो मानव समाज के विकास, परिवर्तन और प्रगति की निरंतर प्रक्रिया को दर्शाती है। यह थीम बताती है कि वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन के इस दौर में देशों को अपने हितों की रक्षा करते हुए सहयोग और नवाचार के माध्यम से आगे बढ़ना होगा।

रायसीना डायलॉग 2026 की थीम: “संस्कार – आग्रह, अनुकूलन और उन्नति”

रायसीना डायलॉग 2026 की थीम को तीन प्रमुख आयामों में विभाजित किया गया है:

1. आग्रह (Assertion)

आग्रह का अर्थ है अपनी संप्रभुता, पहचान और राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता से रक्षा करना। आज की दुनिया में देश केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं बल्कि आर्थिक, तकनीकी और डिजिटल क्षेत्रों में भी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

इस संदर्भ में कुछ प्रमुख मुद्दे सामने आते हैं:

  • डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा
  • राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों की स्वतंत्रता
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रणनीतिक नियंत्रण
  • तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आत्मनिर्भरता

आज के समय में कई देश यह महसूस कर रहे हैं कि यदि वे अपने आर्थिक और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति अधिक दृढ़ता दिखानी होगी। इसलिए आग्रह वैश्विक राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है।

2. अनुकूलन (Accommodation)

दूसरा महत्वपूर्ण आयाम अनुकूलन है। वर्तमान वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। दुनिया अब एक बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कई शक्तियां उभर रही हैं।

इस बदलते परिदृश्य में देशों को नई परिस्थितियों के अनुसार अपने संबंधों और गठबंधनों को ढालना पड़ता है। अनुकूलन के अंतर्गत निम्नलिखित पहलू शामिल हैं:

  • नए और लचीले अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों का निर्माण
  • हित आधारित सहयोग
  • क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारियों का विस्तार
  • आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का पुनर्गठन

आज के दौर में स्थायी गठबंधन की जगह लचीले और बहुस्तरीय सहयोग का महत्व बढ़ गया है। इसी कारण वैश्विक मंचों पर अनुकूलन की रणनीति अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है।

3. उन्नति (Advancement)

तीसरा आयाम उन्नति है, जिसका अर्थ है नवाचार, प्रौद्योगिकी और ज्ञान के माध्यम से मानव समाज की प्रगति को सुनिश्चित करना।

आज की दुनिया में कई नई तकनीकें तेजी से विकसित हो रही हैं, जैसे:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
  • सेमीकंडक्टर तकनीक
  • जैव प्रौद्योगिकी
  • हरित ऊर्जा

इन तकनीकों के विकास से मानव समाज के सामने नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और चुनौतियां भी। इसलिए रायसीना डायलॉग में इस बात पर विचार किया जाएगा कि किस प्रकार तकनीकी नवाचार को मानवता के हित में उपयोग किया जा सकता है।

रायसीना डायलॉग 2026 की महत्वपूर्ण पहल: रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव

रायसीना डायलॉग 2026 में एक नई पहल रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (RSDI) की शुरुआत की गई है।

यह पहल विज्ञान, तकनीक और कूटनीति के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। आज की दुनिया में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास का अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए विज्ञान और कूटनीति के बीच संवाद को मजबूत करना आवश्यक हो गया है।

इस पहल के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • उभरती प्रौद्योगिकियों के शासन (Technology Governance) पर चर्चा
  • वैज्ञानिक अनुसंधान की सुरक्षा
  • वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना
  • तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना

यह पहल इस बात का संकेत है कि भविष्य की वैश्विक राजनीति में विज्ञान और तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी

रायसीना डायलॉग 2026 में चर्चा के प्रमुख विषय

रायसीना डायलॉग में कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई, जिन्हें विभिन्न विषयगत स्तंभों में विभाजित किया गया।

1. प्रतिस्पर्धी सीमाएं (Contested Frontiers)

आज की दुनिया में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ नए संघर्ष क्षेत्रों का भी उदय हो रहा है।

इनमें शामिल हैं:

  • साइबरस्पेस
  • अंतरिक्ष
  • डिजिटल नेटवर्क
  • सूचना युद्ध

इन नए क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक सुरक्षा के नए आयाम पैदा कर दिए हैं। इसलिए इस विषय पर विशेषज्ञ यह चर्चा करेंगे कि इन उभरते हुए क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय नियम और सहयोग कैसे स्थापित किया जा सकता है।

2. वैश्विक संस्थाओं का सुधार (Repairing the Commons)

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित कई वैश्विक संस्थाएं आज की बदलती दुनिया के अनुरूप नहीं रह गई हैं। इसलिए उनके सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

इन संस्थाओं में प्रमुख हैं:

  • संयुक्त राष्ट्र (UN)
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO)
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं

रायसीना डायलॉग में यह चर्चा की गई कि इन संस्थाओं को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अनुरूप कैसे ढाला जा सकता है, ताकि वे अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बन सकें।

3. सतत विकास लक्ष्य (SDG 2030)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य (SDGs) वर्ष 2030 तक वैश्विक विकास को दिशा देने के लिए बनाए गए हैं।

इन लक्ष्यों के अंतर्गत शामिल हैं:

  • गरीबी उन्मूलन
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  • लैंगिक समानता
  • जलवायु संरक्षण
  • आर्थिक विकास

रायसीना डायलॉग में इस बात पर चर्चा की गई कि विकास की आकांक्षाओं और वैश्विक जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है।

4. जलवायु और संघर्ष (Climate and Conflict)

जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है।

इस विषय के अंतर्गत निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा होगी:

  • ग्रीन फाइनेंस
  • जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न संघर्ष
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा
  • ऊर्जा संक्रमण

जलवायु परिवर्तन के कारण कई क्षेत्रों में संसाधनों की कमी और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए इस विषय पर वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है।

5. टेक्नोलॉजी और एआई (Tomorrowland)

तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर रही है।

इस विषय के अंतर्गत चर्चा के प्रमुख मुद्दे हैं:

  • एआई गवर्नेंस
  • सेमीकंडक्टर उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा
  • डिजिटल संप्रभुता
  • डेटा सुरक्षा

इन तकनीकों के कारण वैश्विक शक्ति संतुलन में भी बदलाव आ रहा है। इसलिए तकनीकी नीति और वैश्विक सहयोग पर गंभीर विचार आवश्यक है।

6. व्यापार और टैरिफ (Trade in Times of Tariff)

आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापार और टैरिफ से जुड़ी नीतियां तेजी से बदल रही हैं।

कई देश अब अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए:

  • संरक्षणवादी नीतियां अपना रहे हैं
  • रणनीतिक उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन कर रहे हैं

इस विषय में यह चर्चा होगी कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए

रायसीना डायलॉग क्या है?

रायसीना डायलॉग भारत का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जो भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।

इसका आयोजन प्रतिवर्ष नई दिल्ली में किया जाता है और यह विश्व के प्रमुख रणनीतिक मंचों में से एक बन चुका है।

रायसीना डायलॉग की शुरुआत

रायसीना डायलॉग का पहला आयोजन वर्ष 2016 में किया गया था। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक नीति-निर्माण और रणनीतिक संवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना था।

धीरे-धीरे यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित मंच बन गया और आज इसमें दुनिया भर से प्रमुख नेता और विशेषज्ञ भाग लेते हैं।

आयोजक

रायसीना डायलॉग का आयोजन दो प्रमुख संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है:

  1. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) – यह नई दिल्ली स्थित एक प्रमुख थिंक टैंक है।
  2. भारत का विदेश मंत्रालय – जो भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संचालन करता है।

इन दोनों संस्थाओं के सहयोग से यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर आयोजित किया जाता है।

नाम का आधार

रायसीना डायलॉग का नाम रायसीना हिल्स से लिया गया है।

रायसीना हिल्स नई दिल्ली का वह क्षेत्र है जहां:

  • राष्ट्रपति भवन
  • प्रधानमंत्री कार्यालय
  • भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालय

स्थित हैं। इसलिए यह स्थान भारत की राजनीतिक शक्ति और प्रशासनिक केंद्र का प्रतीक माना जाता है।

रायसीना डायलॉग का उद्देश्य

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों पर बहु-हितधारक संवाद को बढ़ावा देना है।

इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर तलाशना
  • वैश्विक समस्याओं पर नीति-निर्माण को प्रोत्साहित करना
  • सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद स्थापित करना
  • नई वैश्विक व्यवस्था पर विचार करना

यह मंच विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को खुलकर विचार साझा करने का अवसर देता है।

प्रतिभागी

रायसीना डायलॉग में दुनिया भर से कई प्रमुख हस्तियां भाग लेती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्राध्यक्ष
  • प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री
  • राजनयिक और नीति-निर्माता
  • सैन्य अधिकारी
  • उद्योग जगत के नेता
  • मीडिया प्रतिनिधि
  • शिक्षाविद और शोधकर्ता

इन विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच संवाद से वैश्विक मुद्दों पर व्यापक दृष्टिकोण विकसित होता है।

वैश्विक महत्व

रायसीना डायलॉग का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे दुनिया के प्रमुख रणनीतिक सम्मेलनों की श्रेणी में रखा जाने लगा है।

इसे अक्सर निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय मंचों की तर्ज पर देखा जाता है:

  • जर्मनी का म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन
  • सिंगापुर का शांगरी-ला डायलॉग

इन मंचों की तरह ही रायसीना डायलॉग भी वैश्विक सुरक्षा और रणनीति से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र बन चुका है।

रायसीना डायलॉग 2025: पिछले संस्करण की झलक

रायसीना डायलॉग का 10वां संस्करण 17 से 19 मार्च 2025 के बीच आयोजित किया गया था।

उस सम्मेलन की थीम थी:

“कालचक्र: पीपल, पीस एंड प्लेनेट”

इस सम्मेलन में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन मुख्य अतिथि थे। इसमें वैश्विक शांति, सतत विकास और मानव कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई थी।

निष्कर्ष

रायसीना डायलॉग 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि वैश्विक संवाद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। बदलती विश्व व्यवस्था, उभरती प्रौद्योगिकियों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसे मंचों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।

इस सम्मेलन के माध्यम से भारत न केवल अपनी रणनीतिक सोच को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है बल्कि दुनिया भर के देशों के साथ सहयोग और संवाद को भी मजबूत करता है।

संस्कार: आग्रह, अनुकूलन और उन्नति” की थीम इस बात का संकेत देती है कि भविष्य की दुनिया में देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा करते हुए बदलती परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाना होगा और नवाचार के माध्यम से मानवता की प्रगति को सुनिश्चित करना होगा।

इस प्रकार रायसीना डायलॉग 2026 वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक के भविष्य पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है और यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी प्रतीक है।


इन्हें भी देखें –

Leave a Comment

Table of Contents

Contents
सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.