एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 : भारतीय निशानेबाज़ों का दमदार प्रदर्शन, सम्राट राणा और सुरुचि सिंह ने जीता रजत पदक

भारतीय निशानेबाज़ी खेल ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तेज़ी से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, वह देश के खेल इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। इस प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाज़ों ने न केवल पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि सीनियर, जूनियर और यूथ—तीनों वर्गों में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन भी किया।

इस प्रतियोगिता की सबसे खास उपलब्धियों में से एक रही 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा, जिसमें भारत के मौजूदा विश्व चैंपियन सम्राट राणा और वर्ल्ड कप फाइनलिस्ट सुरुचि सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि ने न केवल भारत का नाम रोशन किया बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय निशानेबाज़ी अब निरंतर प्रगति के रास्ते पर है।

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भारतीय निशानेबाज़ी का उभरता स्वर्णिम दौर

भारत में शूटिंग खेल पिछले दो दशकों में लगातार विकास कर रहा है। ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भारतीय निशानेबाज़ों की सफलता ने इस खेल को देश में लोकप्रिय बनाया है। खेल मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) द्वारा खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, विश्व स्तरीय सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि देश में शूटिंग खेल केवल कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह एक मजबूत और व्यापक प्रतिभा प्रणाली में बदल चुका है।

सम्राट राणा और सुरुचि सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि

10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में सम्राट राणा और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने शानदार तालमेल और सटीक निशानेबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। यह मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी और रोमांचक रहा, जिसमें भारतीय जोड़ी ने अंतिम क्षण तक स्वर्ण पदक के लिए संघर्ष किया।

सम्राट राणा की भूमिका

सम्राट राणा वर्तमान समय में विश्व स्तर के सबसे सफल भारतीय पिस्टल निशानेबाज़ों में से एक माने जाते हैं। उनकी सटीकता, तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। विश्व चैंपियन होने के नाते उनसे बड़ी उम्मीदें थीं और उन्होंने अपने प्रदर्शन से उन उम्मीदों पर खरा उतरते हुए टीम को पोडियम तक पहुंचाया।

सुरुचि सिंह का शानदार योगदान

वर्ल्ड कप फाइनलिस्ट सुरुचि सिंह ने भी इस स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उनकी स्थिरता और दबाव में भी सटीक निशाना लगाने की क्षमता ने भारतीय टीम को मजबूत आधार प्रदान किया। सुरुचि सिंह की यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय महिला निशानेबाज़ भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरुष खिलाड़ियों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।

हालांकि भारतीय जोड़ी स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से चूक गई, लेकिन उनका यह रजत पदक एशियाई स्तर पर भारत की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।

दो दिनों में भारत का पदक दबदबा

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप के केवल दो दिनों के भीतर ही भारत ने पदक तालिका में शानदार बढ़त बना ली। दूसरे दिन के अंत तक भारत ने कुल 10 स्वर्ण, 5 रजत और 1 कांस्य पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया।

भारत का यह प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि उसने दूसरे स्थान पर रहे उज्बेकिस्तान को काफी पीछे छोड़ दिया। उज्बेकिस्तान के खाते में केवल तीन स्वर्ण पदक ही थे, जिससे भारत की बढ़ती ताकत और प्रभुत्व स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन का परिणाम नहीं है, बल्कि भारतीय निशानेबाज़ी की समग्र विकास प्रणाली का प्रमाण है।

सीनियर वर्ग में भारत की मजबूती

सीनियर वर्ग में भारतीय निशानेबाज़ों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। सम्राट राणा और सुरुचि सिंह का रजत पदक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों ने तकनीकी कौशल, मानसिक संतुलन और अनुभव का शानदार संयोजन दिखाया।

सीनियर खिलाड़ियों की सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है और यह सुनिश्चित करती है कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले।

जूनियर महिला निशानेबाज़ों का शानदार प्रदर्शन

भारत की सफलता केवल सीनियर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रही। जूनियर वर्ग में भी भारतीय महिला निशानेबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित किया।

रश्मिका सहगल और वंशिका चौधरी की उपलब्धि

10 मीटर एयर पिस्टल महिला जूनियर वर्ग में रश्मिका सहगल और वंशिका चौधरी ने क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत के पास भविष्य के लिए मजबूत प्रतिभा मौजूद है।

इन दोनों खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के दौरान असाधारण धैर्य और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया कि भारतीय जूनियर खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

यूथ महिला खिलाड़ियों की शानदार सफलता

जूनियर वर्ग के साथ-साथ यूथ वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

प्रियंशी पूर्वा और चहेक कोहला का स्वर्णिम प्रदर्शन

यूथ वर्ग की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में प्रियंशी पूर्वा और चहेक कोहला ने भी पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत में निशानेबाज़ी खेल की जड़ें अब और मजबूत हो चुकी हैं।

इन खिलाड़ियों की सफलता यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत टीम होगी।

टीम स्पर्धाओं में भारत की शानदार बढ़त

भारतीय खिलाड़ियों ने केवल व्यक्तिगत स्पर्धाओं में ही नहीं, बल्कि टीम इवेंट्स में भी शानदार प्रदर्शन किया।

महिला जूनियर एयर पिस्टल टीम की स्वर्णिम जीत

महिला जूनियर एयर पिस्टल टीम में रश्मिका सहगल, वंशिका चौधरी और अगम ग्रेवाल की टीम ने कुल 1714 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। इस मुकाबले में भारत ने कज़ाखस्तान को 43 अंकों के बड़े अंतर से हराया।

यह जीत भारतीय टीम की एकजुटता और सामूहिक प्रदर्शन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

महिला यूथ एयर पिस्टल टीम की उपलब्धि

महिला यूथ एयर पिस्टल टीम में प्रियंशी पूर्वा, चहेक कोहला और शिक्षा सरन ने कुल 1709 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में भी भारत ने कज़ाखस्तान को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

टीम इवेंट्स में मिली इन सफलताओं ने भारत की पदक तालिका में बढ़त को और मजबूत किया।

भारत की मजबूत प्रतिभा पाइपलाइन

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 के परिणाम यह दर्शाते हैं कि भारत में निशानेबाज़ी के क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सीनियर, जूनियर और यूथ—तीनों स्तरों पर खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह साबित करता है कि देश में खिलाड़ियों को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताएँ, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र और विदेशी प्रशिक्षकों की मदद से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया जा रहा है।

मानसिक मजबूती और तकनीकी दक्षता का संयोजन

निशानेबाज़ी एक ऐसा खेल है जिसमें केवल शारीरिक कौशल ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। एशियन चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि वे दबाव की परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।

सम्राट राणा और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने इसका बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी प्रकार युवा खिलाड़ियों ने भी कठिन परिस्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखते हुए शानदार प्रदर्शन किया।

मेज़बान देश होने का लाभ

नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत को मेज़बान देश होने का लाभ भी मिला। घरेलू मैदान पर खेलने से खिलाड़ियों को दर्शकों का समर्थन मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

इसके अलावा खिलाड़ियों को स्थानीय परिस्थितियों और प्रशिक्षण सुविधाओं का भी लाभ मिला, जिसने उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा

भारतीय निशानेबाज़ों की सफलता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है। एशियाई स्तर पर भारत का लगातार शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि आने वाले ओलंपिक और विश्व प्रतियोगिताओं में भी भारत से बड़ी उम्मीदें की जा सकती हैं।

भारतीय खिलाड़ियों की सफलता अन्य खेलों के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करती है और देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देती है।

भविष्य की संभावनाएँ

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रदर्शन भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है। युवा खिलाड़ियों की शानदार सफलता यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में भारत निशानेबाज़ी खेल में वैश्विक शक्ति बन सकता है।

यदि खिलाड़ियों को इसी प्रकार प्रशिक्षण, संसाधन और समर्थन मिलता रहा, तो भारत ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में और अधिक पदक जीत सकता है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में आयोजित एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 भारतीय निशानेबाज़ी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज की जाएगी। सम्राट राणा और सुरुचि सिंह द्वारा जीता गया रजत पदक भारत की निरंतर श्रेष्ठता और तकनीकी दक्षता का प्रतीक है।

इसके साथ ही जूनियर और यूथ खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह साबित करता है कि भारत के पास भविष्य के लिए मजबूत प्रतिभा मौजूद है। टीम इवेंट्स में मिली सफलताओं ने भारत की सामूहिक शक्ति और खेल प्रणाली की मजबूती को दर्शाया है।

भारतीय निशानेबाज़ों का यह शानदार प्रदर्शन देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है और यह संकेत देता है कि भारत आने वाले वर्षों में निशानेबाज़ी खेल में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा।


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