चीन में विश्व का सबसे बड़ा कंप्रेस्ड-एयर ऊर्जा भंडारण संयंत्र: हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

21वीं सदी की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक है—ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करते हुए पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और तकनीकी विस्तार के कारण विश्व की ऊर्जा खपत निरंतर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भरता ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दिया है। ऐसे समय में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों—जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा—की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

हालाँकि नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये अंतरालिक (Intermittent) होती हैं, अर्थात् इनका उत्पादन हर समय समान नहीं रहता। इसी समस्या के समाधान के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) तकनीकों का विकास आवश्यक हो गया है।

इसी दिशा में चीन ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उसने विश्व के सबसे बड़े कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (CAES) संयंत्र का संचालन शुरू कर दिया है, जो न केवल चीन की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक हरित ऊर्जा संक्रमण में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है।

कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (CAES) क्या है?

कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (Compressed Air Energy Storage – CAES) एक उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीक है, जिसे प्रायः “एयर पावर बैंक” कहा जाता है। इस तकनीक में बिजली को प्रत्यक्ष रूप से संग्रहित करने के बजाय, उसे संपीड़ित हवा (Compressed Air) के रूप में संग्रहित किया जाता है।

जब बिजली की मांग कम होती है, तब अतिरिक्त उपलब्ध बिजली का उपयोग हवा को अत्यधिक दबाव में संपीड़ित करने के लिए किया जाता है और इसे भूमिगत संरचनाओं में सुरक्षित रखा जाता है। बाद में, जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब इस संपीड़ित हवा को छोड़कर टर्बाइन घुमाई जाती है और बिजली का उत्पादन किया जाता है।

यह तकनीक विशेष रूप से बड़े पैमाने पर और दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

चीन का CAES संयंत्र: एक परिचय

चीन द्वारा शुरू किया गया यह CAES संयंत्र अब तक का विश्व का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत कंप्रेस्ड एयर ऊर्जा भंडारण संयंत्र है। यह परियोजना चीन की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति और कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

संयंत्र का स्थान

यह विशाल संयंत्र पूर्वी चीन के जियांग्सू (Jiangsu) प्रांत में स्थित है। जियांग्सू प्रांत चीन के औद्योगिक और आर्थिक रूप से विकसित क्षेत्रों में से एक है, जहाँ ऊर्जा की मांग अत्यधिक रहती है।

परियोजना का नाम

इस परियोजना का आधिकारिक नाम है—
गुओक्सिन सुयान हुआन (Guoxin Suyan Huai’an) साल्ट कैवर्न CAES प्रोजेक्ट

यह नाम इस तथ्य को दर्शाता है कि परियोजना में नमक की भूमिगत गुफाओं (Salt Caverns) का उपयोग किया गया है, जो CAES तकनीक के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती हैं।

निर्माता और संचालक

इस परियोजना का निर्माण और संचालन चीन की प्रमुख विद्युत उपकरण निर्माता कंपनी हार्बिन इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन (Harbin Electric Corporation) द्वारा किया गया है। यह कंपनी बड़े-पैमाने की ऊर्जा परियोजनाओं में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है।

संयंत्र की तकनीकी विशेषताएँ

1. उत्पादन और भंडारण क्षमता

  • स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता: 600 मेगावाट (MW)
  • ऊर्जा भंडारण क्षमता: 2,400 मेगावाट-घंटा (MWh)

यह क्षमता इस संयंत्र को विश्व का सबसे बड़ा CAES संयंत्र बनाती है। इतनी बड़ी भंडारण क्षमता के कारण यह लंबे समय तक ग्रिड को स्थिर बिजली आपूर्ति प्रदान कर सकता है।

2. ऊर्जा रूपांतरण दक्षता

इस संयंत्र की ऊर्जा रूपांतरण दक्षता लगभग 71% है, जो CAES तकनीक के क्षेत्र में अब तक की सबसे उच्च दक्षताओं में से एक मानी जाती है।

दक्षता का अर्थ यह है कि संग्रहित ऊर्जा का कितना प्रतिशत पुनः उपयोगी बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है। उच्च दक्षता से ऊर्जा हानि कम होती है और परियोजना आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनती है।

3. प्रयुक्त तकनीक: एडियाबेटिक CAES

इस संयंत्र में गैर-दहन (Non-Combustion) या एडियाबेटिक CAES तकनीक का उपयोग किया गया है।

पारंपरिक CAES संयंत्रों में संपीड़ित हवा को पुनः गर्म करने के लिए प्राकृतिक गैस का उपयोग किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है। लेकिन एडियाबेटिक CAES में संपीड़न के दौरान उत्पन्न ऊष्मा को संग्रहित कर लिया जाता है और उसी ऊष्मा का उपयोग विस्तार (Expansion) के समय किया जाता है।

इस कारण:

  • किसी जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता नहीं होती
  • प्रक्रिया पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन वाली बन जाती है

CAES संयंत्र की कार्यप्रणाली

CAES प्रणाली की कार्यप्रणाली मुख्यतः दो चरणों में पूरी होती है:

1. भंडारण चरण (Compression Phase)

जब बिजली की मांग कम होती है—जैसे रात के समय या जब सौर-पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है—तब अतिरिक्त बिजली का उपयोग किया जाता है:

  • शक्तिशाली कंप्रेसर हवा को अत्यधिक दबाव में संपीड़ित करते हैं
  • यह संपीड़ित हवा भूमिगत नमक की विशाल गुफाओं (Salt Caverns) में संग्रहित कर दी जाती है
  • नमक की गुफाएँ हवा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आदर्श होती हैं, क्योंकि इनमें रिसाव की संभावना कम होती है

2. उत्पादन चरण (Expansion Phase)

जब बिजली की मांग चरम पर होती है—जैसे दिन के व्यस्त समय में—तब:

  • संपीड़ित हवा को नियंत्रित रूप से छोड़ा जाता है
  • यह हवा टर्बाइन को घुमाती है
  • टर्बाइन जनरेटर से जुड़ी होती है, जिससे बिजली का उत्पादन होता है
  • उत्पन्न बिजली सीधे ग्रिड में भेज दी जाती है

इस प्रकार CAES प्रणाली बिजली उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाए रखती है।

संयंत्र का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

1. घरेलू बिजली आपूर्ति

यह संयंत्र हर वर्ष लगभग 6 लाख घरों की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ आवासीय उपभोक्ताओं को भी स्थिर और विश्वसनीय बिजली मिल सकेगी।

2. ग्रिड स्थिरता

बड़े-पैमाने पर ऊर्जा भंडारण के कारण बिजली ग्रिड अधिक स्थिर बनता है। इससे:

  • ब्लैकआउट की संभावना कम होती है
  • वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी में संतुलन बना रहता है

नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में भूमिका

सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। CAES संयंत्र इस समस्या का समाधान प्रदान करता है:

  • अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को संग्रहित करता है
  • आवश्यकता पड़ने पर उसे पुनः ग्रिड में भेजता है
  • इससे नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ती है

इस प्रकार CAES, हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) का एक मजबूत स्तंभ बनता है।

चीन का दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्य

चीन ने घोषणा की है कि वह 2027 तक 180 गीगावाट (GW) से अधिक नई ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखता है।

यह CAES संयंत्र इस लक्ष्य की दिशा में एक प्रमुख कदम है और भविष्य में इसी तरह की कई परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

पर्यावरणीय लाभ

1. कोयले की बचत

अनुमान है कि यह संयंत्र हर वर्ष लगभग 2.7 लाख टन मानक कोयले की बचत करेगा।

2. कार्बन उत्सर्जन में कमी

इस परियोजना से:

  • लगभग 5.2 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में वार्षिक कमी आएगी
  • वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा

3. भूगर्भीय लाभ

नमक की गुफाओं के उपयोग से:

  • भूमि धंसने जैसी समस्याओं में कमी आती है
  • परित्यक्त या अप्रयुक्त भूमिगत संरचनाओं का पुनर्चक्रण संभव होता है

वैश्विक महत्व

चीन का यह CAES संयंत्र केवल एक राष्ट्रीय परियोजना नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक महत्व है:

  • यह अन्य देशों के लिए एक तकनीकी मॉडल प्रस्तुत करता है
  • ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोलता है
  • विकासशील देशों को बड़े-पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरणा देता है

निष्कर्ष

चीन में शुरू हुआ विश्व का सबसे बड़ा कंप्रेस्ड-एयर ऊर्जा भंडारण संयंत्र आधुनिक ऊर्जा इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के सिद्धांतों को भी साकार करती है।

CAES जैसी उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकें भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा को मुख्यधारा में लाने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी। चीन का यह कदम स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि आने वाला समय स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा का होगा, और ऊर्जा भंडारण तकनीकें उस भविष्य की रीढ़ बनेंगी।


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