केरल द्वारा बेसिलस सब्टिलिस को राज्य सूक्ष्मजीव घोषित करना

विज्ञान, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चेतना की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल

आधुनिक विज्ञान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पृथ्वी पर जीवन का आधार केवल दृश्य जैविक तत्व—जैसे वनस्पति, पशु या मानव—ही नहीं हैं, बल्कि वे अदृश्य सूक्ष्मजीव भी हैं जो हमारे चारों ओर, हमारे भीतर और हमारे पर्यावरण में निरंतर सक्रिय रहते हैं। सूक्ष्मजीव मानव स्वास्थ्य, कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और पारिस्थितिक संतुलन में मूक किंतु अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी वैज्ञानिक यथार्थ को औपचारिक मान्यता देते हुए केरल सरकार ने बेसिलस सब्टिलिस (Bacillus subtilis) को अपना आधिकारिक ‘राज्य सूक्ष्मजीव’ घोषित किया है।

यह घोषणा केवल एक प्रतीकात्मक निर्णय नहीं है, बल्कि यह विज्ञान आधारित नीति-निर्माण, अनुसंधान-केंद्रित विकास और सतत भविष्य की दिशा में केरल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस कदम के साथ केरल भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने किसी सूक्ष्मजीव को राज्य पहचान का दर्जा दिया है।

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ऐतिहासिक घोषणा और पृष्ठभूमि

हाल ही में तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक सार्वजनिक और ऐतिहासिक समारोह में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बेसिलस सब्टिलिस को राज्य सूक्ष्मजीव घोषित करने की औपचारिक घोषणा की। यह निर्णय केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (KSCSTE) की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित था।

अब तक भारत में राज्यों और राष्ट्रों द्वारा प्रतीकात्मक पहचान के रूप में राज्य पशु, पक्षी, पुष्प, वृक्ष या खेल को मान्यता दी जाती रही है। किंतु केरल ने इस परंपरा से आगे बढ़ते हुए ज्ञान-आधारित और वैज्ञानिक प्रतीक को अपनाया है। यह पहल केरल की उच्च साक्षरता, मजबूत शैक्षणिक परंपरा और अनुसंधान-अनुकूल वातावरण के अनुरूप है।

बेसिलस सब्टिलिस: एक वैज्ञानिक परिचय

वैज्ञानिक वर्गीकरण और स्वरूप

Bacillus subtilis एक ग्राम-पॉजिटिव, छड़ के आकार (Rod-shaped) का जीवाणु है, जो मुख्यतः—

  • मिट्टी
  • जल
  • वायु
  • किण्वित खाद्य पदार्थों
  • मानव और पशु पाचन तंत्र

में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।

यह जीवाणु जीवविज्ञान के क्षेत्र में एक मॉडल ऑर्गेनिज़्म के रूप में भी जाना जाता है, अर्थात् इसके माध्यम से कोशिकीय प्रक्रियाओं और आनुवंशिक तंत्रों का अध्ययन किया जाता है।

एंडोस्पोर निर्माण की अद्वितीय क्षमता

Bacillus subtilis की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी एंडोस्पोर (Endospore) बनाने की क्षमता है। एंडोस्पोर एक प्रकार की संरचना होती है, जो—

  • अत्यधिक तापमान
  • विकिरण
  • सूखा
  • रासायनिक आघात

जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवाणु को जीवित रहने में सक्षम बनाती है। यही गुण इसे औद्योगिक और कृषि उपयोग के लिए अत्यंत उपयोगी बनाता है।

GRAS दर्जा (Generally Recognized As Safe)

Bacillus subtilis को अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं औषधि संस्थाओं द्वारा “आम तौर पर सुरक्षित” (GRAS) माना गया है। इसका अर्थ है कि—

  • यह मानव उपभोग के लिए सुरक्षित है
  • इसके उपयोग से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए हैं
  • इसे खाद्य, औषधि और प्रोबायोटिक उत्पादों में प्रयोग किया जा सकता है

प्रोबायोटिक के रूप में भूमिका

Bacillus subtilis को ‘मित्र बैक्टीरिया’ या प्रोबायोटिक माना जाता है। यह—

  • आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है
  • पाचन क्रिया को सुचारु करता है
  • लाभकारी सूक्ष्मजीवों के संतुलन को बनाए रखता है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को सुदृढ़ करता है

आज के समय में जब जीवनशैली जनित रोग, पाचन संबंधी समस्याएँ और एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ रहा है, ऐसे में प्रोबायोटिक सूक्ष्मजीवों का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

कृषि क्षेत्र में बेसिलस सब्टिलिस की भूमिका

पौधों की वृद्धि को बढ़ावा (PGPR)

Bacillus subtilis को Plant Growth Promoting Rhizobacteria (PGPR) के रूप में जाना जाता है। यह—

  • पौधों की जड़ों के आसपास सक्रिय रहता है
  • पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है
  • फसलों की वृद्धि और उत्पादकता में वृद्धि करता है

जैव-कीटनाशक और जैव-कवकनाशी

यह जीवाणु कई प्रकार के हानिकारक कवकों और रोगजनकों के विरुद्ध प्रभावी होता है। इसलिए—

  • यह रासायनिक कीटनाशकों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है
  • मिट्टी की जैव विविधता को नुकसान नहीं पहुँचाता
  • सतत और जैविक कृषि को प्रोत्साहित करता है

मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि

Bacillus subtilis—

  • मिट्टी की संरचना सुधारता है
  • जैविक गतिविधि बढ़ाता है
  • दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित करता है

मानव स्वास्थ्य में योगदान

मानव शरीर में अरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें माइक्रोबायोम कहा जाता है। Bacillus subtilis—

  • आंत माइक्रोबायोम को संतुलित करता है
  • संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है
  • पोषण अवशोषण को बेहतर बनाता है

विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत माइक्रोबायोम—

  • मधुमेह
  • मोटापा
  • हृदय रोग
  • प्रतिरक्षा विकार

जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक हो सकता है।

पर्यावरणीय स्थिरता में भूमिका

भारी धातुओं का अवशोषण

Bacillus subtilis प्रदूषित स्थलों से—

  • निकल
  • कैडमियम
  • अन्य भारी धातुओं

को अवशोषित करने में सक्षम है। यह बायोरिमेडिएशन (Bioremediation) की प्रक्रिया में सहायक होता है।

सेल्फ-हीलिंग कंक्रीट

निर्माण क्षेत्र में Bacillus subtilis का उपयोग Self-Healing Concrete बनाने में किया जा रहा है। यह—

  • कंक्रीट में दरारें भरने में मदद करता है
  • संरचनाओं की आयु बढ़ाता है
  • संसाधनों की बचत करता है

यह नवाचार सतत शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

केरल द्वारा चयन के प्रमुख कारण

KSCSTE की विशेषज्ञ समिति ने Bacillus subtilis के चयन के पीछे निम्नलिखित कारण बताए—

  1. बहुआयामी उपयोग (स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण)
  2. वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित लाभ
  3. पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित प्रकृति
  4. केरल की जैव विविधता और अनुसंधान प्राथमिकताओं से सामंजस्य

माइक्रोबायोम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoEM)

स्थापना की घोषणा

राज्य सूक्ष्मजीव की घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने माइक्रोबायोम में उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence in Microbiome – CoEM) की स्थापना की घोषणा की।

उद्देश्य

CoEM के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • मानव स्वास्थ्य और पोषण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका का अध्ययन
  • कृषि, मत्स्य पालन और पर्यावरण संरक्षण में अनुप्रयोग
  • रोग नियंत्रण और उत्पादकता वृद्धि
  • माइक्रोबायोम आधारित नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन

संस्थागत सहयोग

यह केंद्र—

  • KSCSTE के अंतर्गत कार्य करेगा
  • केरल विकास एवं नवाचार रणनीतिक परिषद (K-DISC) के सहयोग से संचालित होगा

यह भारत का पहला ऐसा संस्थान होगा जो माइक्रोबायोम आधारित अनुप्रयुक्त अनुसंधान को एकीकृत मंच प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय और वैश्विक संदर्भ

भारत का राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव

भारत ने अक्टूबर 2012 में
Lactobacillus delbrueckii subsp. bulgaricus को
‘राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव’ घोषित किया था, जो दही निर्माण में उपयोगी है।

इस पृष्ठभूमि में केरल का निर्णय राष्ट्रीय वैज्ञानिक परंपरा को आगे बढ़ाता है।

वैश्विक महत्व

विश्व स्तर पर माइक्रोबायोम अनुसंधान—

  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध
  • जलवायु परिवर्तन
  • मिट्टी क्षरण
  • खाद्य सुरक्षा

जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायक माना जा रहा है।

क्यों चर्चा में है?

  • केरल भारत का पहला राज्य बना जिसने राज्य सूक्ष्मजीव घोषित किया
  • विज्ञान आधारित प्रतीक को मान्यता
  • माइक्रोबायोम अनुसंधान को संस्थागत समर्थन
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप पहल

निष्कर्ष

बेसिलस सब्टिलिस को राज्य सूक्ष्मजीव घोषित करना केरल का एक दूरदर्शी, विज्ञान-आधारित और नवाचार-उन्मुख निर्णय है। यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि—

  • मानव स्वास्थ्य
  • कृषि उत्पादकता
  • पर्यावरणीय स्थिरता
  • अनुसंधान एवं नवाचार

के क्षेत्रों में वास्तविक परिवर्तन की क्षमता रखती है।

केरल ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल बड़े ढाँचों या औद्योगिक प्रतीकों से नहीं, बल्कि सूक्ष्मतम जीवन रूपों की समझ और सम्मान से भी संभव है। यह निर्णय आने वाले समय में अन्य राज्यों और देशों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।


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