कवि सूरदास : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली
हिंदी साहित्य का भक्तिकाल भारतीय साहित्य के इतिहास में आध्यात्मिक चेतना, लोकभाषा की प्रतिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं के उत्कर्ष का स्वर्णयुग माना जाता है। इस काल में भक्ति को दो प्रमुख धाराओं—निर्गुण और सगुण—में विभाजित किया गया। सगुण भक्ति धारा के अंतर्गत रामभक्ति और कृष्णभक्ति की परंपरा विकसित हुई। कृष्णभक्ति शाखा में जिन कवियों ने … Read more