डॉ. सम्पूर्णानन्द : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

डॉ. सम्पूर्णानन्द : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भारतीय बौद्धिक परंपरा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि राजनीति, दर्शन, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना—सभी क्षेत्रों में समान अधिकार से अपनी छाप छोड़ते हैं। डॉ. सम्पूर्णानन्द ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व थे। वे एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर विचारक, महान शिक्षाविद् और समर्थ साहित्यकार थे। उनके जीवन … Read more

अध्यापक सरदार पूर्णसिंह : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

अध्यापक सरदार पूर्णसिंह : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिन्दी निबन्ध साहित्य के इतिहास में जिन लेखकों ने अपने सीमित रचना-कार्य के बावजूद अमिट छाप छोड़ी है, उनमें अध्यापक सरदार पूर्णसिंह का नाम अत्यन्त सम्मान और आदर के साथ लिया जाता है। वे युगीन निबन्धकारों में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। भावात्मक निबन्धों के क्षेत्र में उनकी पहचान इतनी सशक्त है कि उन्हें हिन्दी … Read more

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का नाम एक ऐसे युगप्रवर्तक साहित्यकार के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने न केवल हिंदी भाषा को अनुशासित और व्यवस्थित किया, बल्कि उसे आधुनिक चेतना, बौद्धिक गंभीरता और राष्ट्रीय भावबोध से भी संपन्न किया। उनके साहित्यिक योगदान के कारण ही हिंदी साहित्य के इतिहास में … Read more

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र हिन्दी साहित्य के ऐसे युगप्रवर्तक साहित्यकार हैं, जिनके बिना आधुनिक हिन्दी साहित्य की कल्पना अधूरी प्रतीत होती है। उन्हें केवल हिन्दी गद्य का जनक ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण आधुनिक हिन्दी साहित्य का निर्माता कहा जाता है। जिस समय हिन्दी साहित्य रूढ़ परम्पराओं, सीमित विषय-वस्तु और अविकसित गद्य-रूप से जूझ रहा था, उस … Read more

जीवनी और जीवन-परिचय : स्वरूप, समानताएँ एवं अंतर का समेकित अध्ययन

जीवनी और जीवन-परिचय : स्वरूप, समानताएँ एवं अंतर का समेकित अध्ययन

हिंदी साहित्य, शैक्षणिक लेखन तथा व्यावहारिक जीवन में जीवनी और जीवन-परिचय—दोनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों ही किसी व्यक्ति के जीवन से संबंधित होते हैं, किंतु इनके उद्देश्य, विस्तार, शैली, भाषा और उपयोगिता में मौलिक अंतर पाया जाता है।अक्सर विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों में यह भ्रांति रहती है कि जीवनी और जीवन-परिचय एक ही … Read more

जीवन परिचय : परिभाषा, अर्थ, स्वरूप, भेद, उद्देश्य और महत्व

जीवन परिचय : परिभाषा, अर्थ, स्वरूप, भेद, उद्देश्य और महत्व

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में प्रत्येक व्यक्ति का जीवन किसी न किसी रूप में महत्त्वपूर्ण होता है। जब किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़ी प्रमुख जानकारियों को क्रमबद्ध, तथ्यपरक और उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे जीवन परिचय (Biography) कहा जाता है। जीवन परिचय के माध्यम से हम किसी … Read more

जीवनी – परिभाषा, स्वरूप, भेद, साहित्यिक महत्व और उदाहरण

जीवनी – परिभाषा, स्वरूप, भेद, साहित्यिक महत्व और उदाहरण

साहित्य में मनुष्य के जीवन और उसकी घटनाओं का वर्णन एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। मानव इतिहास में अनेक महापुरुषों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों, योद्धाओं, समाजसेवकों और कलाकारों ने समाज को प्रेरित किया है। उनके जीवन के संघर्ष, उपलब्धियाँ, विचार और आदर्श नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। इन्हीं जीवन प्रसंगों का कलात्मक, तथ्यपरक और सजीव … Read more

कबीर दास जी | जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएँ एवं भाषा

कबीर दास

कबीर दास जी भारत के एक महान संत तथा हिंदी साहित्य की मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि के रूप में जाने जाते हैं, जो जीवन पर्यन्त समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। कबीर दास जी हिंदी साहित्य की निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। … Read more

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय, रचनाएं एवं भाषा शैली

मुंशी प्रेमचंद

हिन्दी साहित्य में लोकप्रियता की दृष्टि से मुंशी प्रेमचंद का विशेष स्थान है। मुंशी प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी, विशेषकर रूस में, खासा लोकप्रिय हैं। मुंशी प्रेमचंद जी उपन्यास सम्राट तो थे ही, उसके साथ वह अपने समय में भारतीय जनता के … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.