जयशंकर प्रसाद कृत ‘लहर’ (काव्य-संग्रह) : संपूर्ण परिचय, प्रमुख कविताएँ, विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जयशंकर प्रसाद कृत 'लहर' (काव्य-संग्रह)

हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद एक स्वर्णिम युग के रूप में प्रतिष्ठित है। इस युग ने काव्य को आत्मानुभूति, प्रकृति-सौंदर्य, रहस्य-चेतना और मानवीय संवेदनाओं की नई दिशा प्रदान की। इस युग के चार प्रमुख स्तंभों—जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला—में जयशंकर प्रसाद का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने न केवल … Read more

जयशंकर प्रसाद कृत ‘बीती विभावरी’ : मूल भाव, प्रतीकात्मकता और काव्य-सौष्ठव

जयशंकर प्रसाद कृत ‘बीती विभावरी’ : मूल भाव, प्रतीकात्मकता और काव्य-सौष्ठव

‘बीती विभावरी’ हिंदी काव्य की उन मधुर, संगीतात्मक और भावप्रवण रचनाओं में से एक है, जो पाठक के हृदय में नवचेतना का संचार कर देती हैं। यह गीत महान छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की अमर कृति है, जो उनके काव्य-संग्रह “लहर” में संकलित है। यह केवल एक प्रकृति-चित्रण मात्र नहीं, बल्कि एक सशक्त जागरण-गीत है—ऐसा … Read more

जयशंकर प्रसाद : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

जयशंकर प्रसाद : जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, कृतियाँ एवं भाषा-शैली

हिन्दी साहित्य के इतिहास में जयशंकर प्रसाद का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ ही नहीं, बल्कि आधुनिक हिन्दी साहित्य के सर्वांगीण प्रतिभा-संपन्न रचनाकारों में अग्रगण्य थे। कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबन्ध—सभी विधाओं में उन्होंने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया कि … Read more

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है? परिभाषा, भेद एवं उदाहरण भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग | नाम, स्थान एवं स्तुति मंत्र प्रथम विश्व युद्ध: विनाशकारी महासंग्राम | 1914 – 1918 ई.