भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। वर्ष 2030 तक भारत की कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या विश्व में सर्वाधिक होने का अनुमान है। किंतु यह जनसांख्यिकीय लाभांश तभी सार्थक सिद्ध होगा जब युवाओं को समय की मांग के अनुरूप कौशल, उद्योगों से जुड़ा प्रशिक्षण और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने कौशल विकास के क्षेत्र में अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी योजना “PM-SETU” की शुरुआत की है।
हाल ही में इस योजना को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ है, जब विश्व बैंक (World Bank) ने PM-SETU योजना के लिए 830 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6,900 करोड़) के ऋण को मंजूरी दी। यह ऋण न केवल योजना की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की कौशल नीति में विश्वास को भी प्रतिबिंबित करता है।
विश्व बैंक ऋण की पृष्ठभूमि और महत्व
विश्व बैंक द्वारा किसी भी देश की योजना को वित्तीय सहायता देना केवल आर्थिक सहयोग नहीं होता, बल्कि यह उस योजना की विश्वसनीयता, दीर्घकालिक प्रभाव और संस्थागत क्षमता पर अंतरराष्ट्रीय मुहर के समान होता है।
PM-SETU योजना के लिए स्वीकृत 830 मिलियन डॉलर का ऋण निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होगा—
- ITI और NSTI के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण
- प्रशिक्षकों (Instructors) की गुणवत्ता में सुधार
- उद्योग-आधारित पाठ्यक्रमों का विकास
- डिजिटल और उभरती तकनीकों पर प्रशिक्षण
- महिला भागीदारी को बढ़ावा
- शासन एवं निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाना
यह ऋण भारत को वैश्विक कौशल आपूर्ति श्रृंखला (Global Skill Supply Chain) में एक मजबूत भागीदार बनाने की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगा।
PM-SETU योजना : परिचय
PM-SETU (प्रधान मंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन उन्नत आईटीआई) भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के व्यावसायिक प्रशिक्षण ढांचे (Vocational Training Ecosystem) को पूरी तरह से आधुनिक और उद्योग-उन्मुख बनाना है।
योजना का मूल मंत्र
“कुशल युवा, समृद्ध भारत”
यह योजना पारंपरिक आईटीआई मॉडल से आगे बढ़ते हुए भारत को भविष्य के रोजगारों (Future Jobs) के लिए तैयार करने पर केंद्रित है।
PM-SETU का पूर्ण नाम
Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs (PM-SETU)
यह नाम स्वयं योजना के उद्देश्य को स्पष्ट करता है—
Skilling + Employability + Transformation + Upgraded ITIs
योजना का शुभारंभ
PM-SETU योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 अक्टूबर, 2025 को किया गया।
यह शुभारंभ ऐसे समय में हुआ जब—
- भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर है
- ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों को कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और ग्रीन टेक्नोलॉजी रोजगार के स्वरूप को बदल रही हैं
संबंधित मंत्रालय
इस योजना का क्रियान्वयन कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship – MSDE) द्वारा किया जा रहा है।
MSDE पहले से ही—
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- जन शिक्षण संस्थान
- राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC)
जैसी पहलों का संचालन कर रहा है। PM-SETU इन सभी प्रयासों को एक उन्नत और संस्थागत स्वरूप प्रदान करता है।
योजना की प्रकृति
PM-SETU एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है।
इसकी विशेष शासन व्यवस्था—
- सरकारी स्वामित्व (Government-owned)
- उद्योग-प्रबंधित (Industry-managed)
यह मॉडल पहली बार इतने बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिसमें सरकार बुनियादी ढांचा और नीति समर्थन देगी, जबकि उद्योग वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण का संचालन करेंगे।
कुल परिव्यय (Total Outlay)
PM-SETU योजना का कुल अनुमानित परिव्यय ₹60,000 करोड़ है।
वित्तीय संरचना—
- केंद्र सरकार
- राज्य सरकारें
- विश्व बैंक जैसी बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाएँ
- उद्योगों की भागीदारी
यह साझा वित्तीय मॉडल योजना को दीर्घकालिक और टिकाऊ बनाता है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल : योजना की रीढ़
PM-SETU योजना का सबसे अभिनव पहलू इसका Hub-and-Spoke Model है।
कुल 1,000 सरकारी ITIs का उन्नयन
200 ITIs – “हब” के रूप में
इन ITIs को—
- अत्याधुनिक मशीनरी
- स्मार्ट क्लासरूम
- इनोवेशन लैब
- ट्रेनर ट्रेनिंग सेंटर
- इंडस्ट्री इनक्यूबेशन हब
के रूप में विकसित किया जाएगा।
800 ITIs – “स्पोक” के रूप में
ये ITIs—
- हब से तकनीकी सहायता प्राप्त करेंगे
- स्थानीय उद्योगों के अनुसार प्रशिक्षण देंगे
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी युवाओं तक कौशल पहुँचाएँगे
यह मॉडल संसाधनों के कुशल उपयोग और क्षेत्रीय संतुलन को सुनिश्चित करता है।
घटक II : NSTI क्षमता वृद्धि
PM-SETU का दूसरा प्रमुख घटक राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) की क्षमता बढ़ाना है।
5 NSTIs को ‘उत्कृष्टता केंद्र’ बनाया जाएगा—
- भुवनेश्वर
- चेन्नई
- हैदराबाद
- कानपुर
- लुधियाना
इन केंद्रों की भूमिका—
- उच्च स्तरीय प्रशिक्षकों का निर्माण
- नई तकनीकों पर रिसर्च
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग
- उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम विकास
ये संस्थान पूरे देश के ITIs के लिए ज्ञान और गुणवत्ता केंद्र बनेंगे।
उद्योग-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था
PM-SETU योजना की एक क्रांतिकारी विशेषता है—
Industry-Led Governance Model
प्रमुख विशेषताएँ—
- निजी कंपनियाँ ‘एंकर इंडस्ट्री पार्टनर’ बनेंगी
- पाठ्यक्रम डिजाइन में उद्योग की सीधी भागीदारी
- ऑन-जॉब ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप
- प्लेसमेंट से सीधा जुड़ाव
इससे ITIs केवल प्रमाणपत्र देने वाले संस्थान न रहकर रोजगार-उन्मुख प्रशिक्षण केंद्र बनेंगे।
उन्नत ट्रेडों पर विशेष फोकस
PM-SETU पारंपरिक ट्रेडों (फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन) के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों पर भी ध्यान देता है।
प्रमुख उन्नत क्षेत्र—
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- रोबोटिक्स
- ग्रीन हाइड्रोजन
- ड्रोन टेक्नोलॉजी
- साइबर सुरक्षा
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
- इंडस्ट्री 4.0
यह दृष्टिकोण भारत को भविष्य के वैश्विक कार्यबल के लिए तैयार करता है।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर
PM-SETU योजना का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य है महिला भागीदारी बढ़ाना।
लक्ष्य—
- अगले 5 वर्षों में
- ITI छात्रों में
- कम से कम 25% महिलाएँ
इसके लिए—
- सुरक्षित हॉस्टल
- महिला-अनुकूल ट्रेड
- छात्रवृत्ति
- मेंटरशिप प्रोग्राम
जैसे उपाय किए जाएंगे।
PM-SETU योजना का व्यापक महत्व
PM-SETU केवल एक कौशल योजना नहीं, बल्कि—
- रोजगार सृजन की रणनीति
- औद्योगिक विकास का आधार
- सामाजिक समावेशन का माध्यम
- आत्मनिर्भर भारत का स्तंभ
है।
यह योजना भारत को—
- वैश्विक स्किल हब
- मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस
- टेक्नोलॉजी-सक्षम अर्थव्यवस्था
बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
चुनौतियाँ और आगे की राह
हालाँकि योजना अत्यंत महत्वाकांक्षी है, फिर भी—
- राज्यों की क्षमता
- उद्योगों की सक्रिय भागीदारी
- गुणवत्ता नियंत्रण
- प्रशिक्षकों की उपलब्धता
जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। विश्व बैंक का ऋण और तकनीकी सहयोग इन चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगा।
निष्कर्ष
PM-SETU योजना के लिए विश्व बैंक द्वारा 830 मिलियन डॉलर के ऋण की मंजूरी भारत के कौशल विकास इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह योजना न केवल युवाओं को रोजगार योग्य बनाएगी, बल्कि भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करेगी।
यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो PM-SETU वास्तव में
“कुशल युवा, समृद्ध भारत” के संकल्प को साकार कर सकती है।
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