भारत ने किया FORGE नामक अंतर्राष्ट्रीय पहल का समर्थन

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition), हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) और उच्च तकनीकी उद्योगों की तीव्र वृद्धि ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की मांग को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है। लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्व जैसे खनिज अब आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सौर एवं पवन ऊर्जा, बैटरी निर्माण, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में इन खनिजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसी पृष्ठभूमि में भारत ने हाल ही में Forum on Resource, Geostrategic Engagement (FORGE) नामक एक नई वैश्विक पहल का समर्थन किया है। यह पहल न केवल वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने का प्रयास है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह लेख FORGE पहल की संरचना, उद्देश्य, वैश्विक महत्व तथा भारत के लिए इसके रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Table of Contents

FORGE पहल क्या है?

1. परिचय

FORGE (Forum on Resource, Geostrategic Engagement) एक बहुपक्षीय मंच (Multilateral Platform) है, जिसे अमेरिका द्वारा वाशिंगटन डीसी में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल (Critical Minerals Ministerial) के दौरान लॉन्च किया गया।

यह मंच उन देशों को एक साझा ढांचे में जोड़ने का प्रयास है जो महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन, प्रसंस्करण, आपूर्ति और उपयोग में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के तेजी से हरित ऊर्जा आधारित मॉडल की ओर बढ़ने के कारण खनिज संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में FORGE का उद्देश्य इन संसाधनों की उपलब्धता को संतुलित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है।

2. FORGE का उद्देश्य

FORGE पहल के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

(क) वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाना

महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति वर्तमान में कुछ सीमित देशों पर अत्यधिक निर्भर है। FORGE का लक्ष्य इस निर्भरता को कम करके अधिक संतुलित और विविध आपूर्ति नेटवर्क तैयार करना है।

(ख) संसाधनों पर एकाधिकार को समाप्त करना

कुछ देशों द्वारा खनिज संसाधनों के उत्पादन और प्रसंस्करण पर प्रभुत्व स्थापित किया गया है। यह पहल एकाधिकार को कम कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सहयोग को बढ़ावा देती है।

(ग) निवेश को बढ़ावा देना

खनन और प्रसंस्करण क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए स्थिर नीति और मूल्य ढांचा तैयार करना।

(घ) पर्यावरणीय और सामाजिक मानकों को बढ़ावा

खनन गतिविधियों में पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों का पालन सुनिश्चित करना ताकि टिकाऊ विकास संभव हो सके।

3. MSP का उत्तराधिकारी

FORGE को अमेरिका की पूर्व पहल मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप (MSP) का विस्तारित रूप माना जा रहा है।

हालांकि MSP भी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित बनाने का प्रयास था, लेकिन उसका दायरा सीमित था। FORGE इस पहल का अधिक व्यापक, बहुपक्षीय और रणनीतिक संस्करण है जिसमें अधिक देशों और संस्थाओं को शामिल किया गया है।

4. सदस्यता और वैश्विक भागीदारी

FORGE में शामिल देशों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस पहल में:

  • भारत सहित 50 से अधिक देशों ने भागीदारी की प्रतिबद्धता जताई है।
  • यूरोपीय संघ (EU) भी इसका महत्वपूर्ण सदस्य है।
  • विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देशों को इसमें शामिल किया गया है।

इस व्यापक सदस्यता के कारण FORGE को एक वैश्विक संसाधन सहयोग मंच के रूप में देखा जा रहा है।

5. नेतृत्व और प्रशासन

इस फोरम की प्रारंभिक अध्यक्षता दक्षिण कोरिया को सौंपी गई है, जो जून 2026 तक इसकी अध्यक्षता करेगा।

दक्षिण कोरिया बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अग्रणी देश है, इसलिए उसकी अध्यक्षता को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

6. वित्तीय समर्थन

FORGE पहल के तहत अमेरिका ने लगभग 100 बिलियन डॉलर तक की ऋण सुविधा और सार्वजनिक वित्तपोषण प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।

इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य:

  • नई खनन परियोजनाओं को प्रोत्साहन देना
  • प्रसंस्करण क्षमता का विकास
  • आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना

FORGE का कार्यक्षेत्र

FORGE पहल केवल संसाधन साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक और रणनीतिक उद्देश्यों को भी पूरा करती है।

1. सप्लाई चेन का डी-रिस्किंग

वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन और प्रसंस्करण कुछ देशों तक सीमित है। उदाहरण के लिए:

  • चीन दुर्लभ मृदा तत्वों के प्रसंस्करण में प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • कुछ अफ्रीकी देशों में कोबाल्ट का उत्पादन केंद्रित है।
  • लिथियम का उत्पादन दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में अधिक है।

इस प्रकार के भौगोलिक संकेंद्रण से वैश्विक अर्थव्यवस्था जोखिम में रहती है। FORGE इस जोखिम को कम करने के लिए आपूर्ति स्रोतों को विविध बनाने का प्रयास करता है।

2. मूल्य स्थिरीकरण

खनिज संसाधनों की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव निवेशकों और उद्योगों के लिए चुनौती पैदा करता है।

FORGE के माध्यम से:

  • मूल्य स्थिरीकरण तंत्र विकसित किया जाएगा।
  • दीर्घकालिक अनुबंधों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ाया जाएगा।

3. जिम्मेदार और टिकाऊ खनन

खनन गतिविधियों से पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

FORGE पहल निम्नलिखित को बढ़ावा देती है:

  • पर्यावरण संरक्षण
  • श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा
  • पारदर्शी शासन प्रणाली
  • स्थानीय समुदायों का विकास

4. तकनीकी सहयोग और नवाचार

इस मंच के माध्यम से सदस्य देशों के बीच:

  • तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान
  • उन्नत खनन तकनीकों का विकास
  • अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा

भारत के लिए FORGE का महत्व

भारत के लिए FORGE पहल अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखती है। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।

1. नेट जीरो 2070 लक्ष्य को समर्थन

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए:

  • इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार
  • नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग
  • बैटरी निर्माण उद्योग का विकास

आवश्यक है।

लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिज इन सभी क्षेत्रों के लिए अनिवार्य हैं। FORGE के माध्यम से भारत को इन खनिजों तक विश्वसनीय पहुंच मिल सकती है।

2. राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के साथ तालमेल

भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य:

  • खनिज संसाधनों की खोज
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाना
  • विदेशी संसाधनों में निवेश

है।

FORGE इस मिशन को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से मजबूत करेगा।

3. दुर्लभ मृदा गलियारों का विकास

बजट 2026-27 में भारत ने दुर्लभ मृदा गलियारों के विकास की घोषणा की है।

FORGE के सहयोग से:

  • भारत को नई तकनीक प्राप्त होगी
  • खनिज प्रसंस्करण क्षमता विकसित होगी
  • वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी

4. रक्षा और उच्च तकनीकी उद्योगों को मजबूती

महत्वपूर्ण खनिज रक्षा उपकरणों, मिसाइल प्रणालियों, रडार और सेमीकंडक्टर उद्योग में अत्यंत आवश्यक होते हैं।

FORGE के माध्यम से भारत:

  • रक्षा उत्पादन आत्मनिर्भरता बढ़ा सकेगा
  • सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत कर सकेगा
  • रणनीतिक तकनीकी विकास को गति दे सकेगा

5. चीन पर निर्भरता में कमी

वर्तमान में वैश्विक खनिज प्रसंस्करण में चीन की प्रमुख भूमिका है।

भारत FORGE के माध्यम से:

  • वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित कर सकेगा
  • भू-राजनीतिक जोखिम कम कर सकेगा
  • रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त कर सकेगा

भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव

FORGE पहल भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नए आयाम पर ले जाती है।

1. संसाधन कूटनीति का विकास

अब दोनों देश रक्षा और व्यापार के साथ-साथ संसाधन सहयोग पर भी ध्यान दे रहे हैं।

2. तकनीकी सहयोग

खनन और प्रसंस्करण तकनीकों में अमेरिका भारत को सहायता प्रदान कर सकता है।

3. निवेश और व्यापार विस्तार

FORGE के माध्यम से भारत में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में FORGE की भूमिका

विश्व तेजी से जीवाश्म ईंधन आधारित अर्थव्यवस्था से हरित ऊर्जा आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

इस परिवर्तन के लिए:

  • बैटरी निर्माण
  • ऊर्जा भंडारण
  • इलेक्ट्रिक परिवहन
  • स्मार्ट ग्रिड

की आवश्यकता है।

FORGE इस ऊर्जा परिवर्तन को स्थिर और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विकासशील देशों के लिए अवसर

FORGE केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं है। यह विकासशील देशों को भी अवसर प्रदान करता है:

  • निवेश प्राप्त करने का अवसर
  • खनन तकनीक का विकास
  • रोजगार सृजन
  • आर्थिक विकास

संभावित चुनौतियाँ

हालांकि FORGE पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं:

1. भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

2. पर्यावरणीय जोखिम

खनन गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है।

3. निवेश और लागत

नई परियोजनाओं के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी।

भविष्य की संभावनाएँ

FORGE पहल भविष्य में वैश्विक संसाधन शासन (Global Resource Governance) का प्रमुख मंच बन सकती है।

यह पहल:

  • टिकाऊ विकास को बढ़ावा देगी
  • ऊर्जा परिवर्तन को गति देगी
  • वैश्विक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगी

निष्कर्ष

भारत द्वारा FORGE पहल का समर्थन केवल एक अंतर्राष्ट्रीय मंच में भागीदारी नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग के दौर में यह पहल वैश्विक सहयोग, संसाधन संतुलन और टिकाऊ विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

भारत के लिए FORGE ऊर्जा परिवर्तन, रक्षा सुदृढ़ीकरण, तकनीकी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यदि भारत इस मंच का प्रभावी उपयोग करता है, तो वह भविष्य की हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर सकता है।


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