संप्रदाय और वाद : उत्पत्ति, परिभाषा, विकास और साहित्यिक-दर्शनिक परंपरा
मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ विचारधाराओं का उदय और विस्तार हुआ है। जब लोग किसी एक विचार, मान्यता या धार्मिक परंपरा को संगठित रूप से स्वीकार करते हैं और उसका अनुकरण करते हुए जीवन जीते हैं, तो उससे संप्रदाय का जन्म होता है। इसी प्रकार साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में जब किसी विशेष … Read more