संत काव्य धारा: निर्गुण भक्ति की ज्ञानाश्रयी शाखा | कवि, रचनाएँ एवं भाषा शैली
यह लेख हिंदी साहित्य के भक्ति काल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली धारा – संत काव्य या ज्ञानाश्रयी निर्गुण भक्ति काव्य – पर एक समग्र और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें संत काव्य की धार्मिक, सामाजिक एवं भाषिक विशेषताओं का गहन अध्ययन किया गया है। लेख में बताया गया है कि कैसे संत … Read more