वैश्विक कूटनीति के बदलते परिदृश्य में भारत की भूमिका निरंतर सशक्त होती जा रही है, और इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों द्वारा सम्मानित किया जाना एक ऐतिहासिक और दुर्लभ कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है, बल्कि भारत की संतुलित, स्वतंत्र और बहुपक्षीय विदेश नीति की परिपक्वता को भी दर्शाता है। इज़राइल की संसद नेसेट (Knesset) में उनके ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट (Knesset) मेडल’ से सम्मानित किया गया, जबकि इससे पूर्व वर्ष 2018 में उन्हें फ़िलिस्तीन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ से भी अलंकृत किया जा चुका है।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें पश्चिम एशिया के दो संवेदनशील और परस्पर विरोधी भू-राजनीतिक ध्रुवों—इज़राइल और फ़िलिस्तीन—दोनों से सर्वोच्च स्तर का सम्मान प्राप्त हुआ है।
इज़राइली संसद नेसेट (Knesset) में ऐतिहासिक संबोधन और सर्वोच्च संसदीय सम्मान
25 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यरूशलम स्थित इज़राइली संसद नेसेट (Knesset) को संबोधित किया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण था। इस संबोधन के पश्चात उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट (Knesset) मेडल’ प्रदान किया गया, जिसे इज़राइल का सर्वोच्च संसदीय सम्मान माना जाता है। यह पदक नेसेट (Knesset) के स्पीकर अमीर ओहाना द्वारा प्रदान किया गया। इस सम्मान को प्रदान करने का उद्देश्य भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक, तकनीकी, रक्षा और नवाचार आधारित संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में प्रधानमंत्री मोदी की असाधारण भूमिका की औपचारिक मान्यता देना था।
नेसेट (Knesset) द्वारा दिया गया यह पदक विशेष रूप से उन वैश्विक नेताओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने इज़राइल के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों, रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय साझेदारी को सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बन गए, जिससे यह उपलब्धि और भी अधिक ऐतिहासिक बन गई। अपने संबोधन में उन्होंने इस सम्मान को दोनों देशों की स्थायी मित्रता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताते हुए विनम्रता से स्वीकार किया।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इज़राइल की संसद को आधिकारिक रूप से Knesset कहा जाता है। हिंदी में इसके उच्चारण के आधार पर इसे “नेसेट” और “केसेट” दोनों रूपों में लिखा जाता है। चूँकि मूल हिब्रू शब्द Knesset है, इसलिए औपचारिक और अधिक सटीक प्रयोग “नेसेट” माना जाता है, जबकि हिंदी मीडिया और अनुवादित समाचारों में “केसेट” शब्द भी व्यापक रूप से प्रचलित है। इसी कारण प्रधानमंत्री को प्रदान किए गए सम्मान का सही आधिकारिक नाम “Speaker of the Knesset Medal” है, जिसे हिंदी में “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” या “स्पीकर ऑफ द केसेट मेडल” दोनों रूपों में संदर्भित किया जा सकता है।
भारत–इज़राइल संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से रणनीतिक साझेदारी तक
भारत और इज़राइल के संबंधों का इतिहास दशकों पुराना है, किंतु पिछले कुछ वर्षों में इन संबंधों में अभूतपूर्व प्रगाढ़ता देखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत–इज़राइल संबंधों को “अद्भुत मित्रता” बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा वर्ष 2026 में नौ वर्षों के अंतराल के बाद उनकी दूसरी यात्रा थी, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहराई प्रदान की। इस यात्रा के दौरान रक्षा तकनीक, नवाचार साझेदारी, जल संरक्षण तकनीक, कृषि आधुनिकीकरण और डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों और साझेदारियों पर चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के संबंध बहुआयामी रूप से मजबूत हुए।
स्पीकर ऑफ द नेसेट (Knesset) मेडल का कूटनीतिक महत्व
‘स्पीकर ऑफ द नेसेट (Knesset) मेडल’ केवल एक औपचारिक अलंकरण नहीं है, बल्कि यह इज़राइल की संसद द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च संसदीय सम्मान है। इस सम्मान का महत्व कई कारणों से विशेष है—
- यह किसी विदेशी नेता को दिया जाने वाला दुर्लभ संसदीय सम्मान है।
- यह लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक साझेदारी की मान्यता का प्रतीक है।
- यह दीर्घकालिक कूटनीतिक विश्वास और सहयोग का संकेत देता है।
- यह उन नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने इज़राइल के साथ बहुआयामी संबंधों को मजबूत किया हो।
प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत–इज़राइल संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके “असाधारण योगदान” के लिए प्रदान किया गया, जिसमें रक्षा सहयोग, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, जल प्रबंधन, कृषि नवाचार और उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग शामिल हैं।
फ़िलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान: ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन (2018)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2018 में फ़िलिस्तीन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा प्रदान किया गया था।
यह पुरस्कार विदेशी नेताओं को फ़िलिस्तीन के समर्थन, शांति प्रयासों और द्विपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत द्वारा फ़िलिस्तीनी आकांक्षाओं के निरंतर समर्थन, विकास सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना क्षेत्र में सहायता तथा स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन की नीति के सम्मान में प्रदान किया गया था।
इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी विश्व के उन विशिष्ट नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए जिन्हें फ़िलिस्तीन ने सर्वोच्च नागरिक अलंकरण से सम्मानित किया है। यह भारत की संतुलित पश्चिम एशिया नीति का स्पष्ट संकेत था, जिसमें भारत ने इज़राइल के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखते हुए फ़िलिस्तीन के प्रति अपने ऐतिहासिक समर्थन को भी कायम रखा।
संतुलित पश्चिम एशिया नीति: भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोण
भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता रहा है। पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहाँ भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय से विद्यमान है, भारत ने एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है।
एक ओर भारत ने इज़राइल के साथ रक्षा, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत किया है, वहीं दूसरी ओर फ़िलिस्तीन के राष्ट्र निर्माण, विकास सहायता और शांति प्रक्रिया के समर्थन की अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता को भी बनाए रखा है। यही संतुलित नीति भारत को एक विश्वसनीय, निष्पक्ष और संवाद समर्थक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
प्रधानमंत्री मोदी का दोनों पक्षों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना इसी संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण का परिणाम है। यह दर्शाता है कि भारत ने किसी एक पक्ष का अंध समर्थन करने के बजाय शांति, संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
नेसेट (Knesset) में संबोधन: आतंकवाद के विरुद्ध भारत का स्पष्ट रुख
नेसेट (Knesset) में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट रूप से दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
अपने भाषण में उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों को याद करते हुए आतंकवाद के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी तथा 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ समन्वित, ठोस और बिना किसी दोहरे मापदंड के कार्रवाई करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि “कहीं भी आतंक, हर जगह शांति के लिए खतरा है”, और यह संदेश वैश्विक सहयोग, सामूहिक सुरक्षा और साझा मानवीय मूल्यों पर आधारित था। यह वक्तव्य भारत की सुरक्षा नीति और वैश्विक आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
गाजा शांति पहल और संवाद आधारित कूटनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी और न्यायपूर्ण शांति केवल संवाद, कूटनीति और पारस्परिक सम्मान के माध्यम से ही संभव है।
भारत की नीति लंबे समय से यह रही है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल संवाद और सहअस्तित्व से ही स्थापित की जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में यह भी कहा कि भारत क्षेत्रीय शांति, मानवीय सहायता और विकास सहयोग के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभाता रहेगा।
यह वक्तव्य भारत की उस विदेश नीति को प्रतिबिंबित करता है जो संघर्ष के बजाय समाधान, टकराव के बजाय संवाद और ध्रुवीकरण के बजाय संतुलन पर आधारित है।
भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा में वृद्धि
इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा का संकेत है। यह उपलब्धि कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है—
- भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को वैश्विक मान्यता
- संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की सफलता
- वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता में वृद्धि
- बहुपक्षीय कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका
- पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति का सुदृढ़ होना
यह सम्मान दर्शाता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक कूटनीतिक संतुलनकारी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
भारत–फ़िलिस्तीन संबंध: ऐतिहासिक समर्थन और विकास सहयोग
भारत और फ़िलिस्तीन के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत और सहानुभूतिपूर्ण रहे हैं। भारत ने प्रारंभ से ही फ़िलिस्तीन के आत्मनिर्णय और स्वतंत्र राष्ट्र की आकांक्षाओं का समर्थन किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, अवसंरचना और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भारत ने फ़िलिस्तीन को निरंतर सहायता प्रदान की है।
भारत ने फ़िलिस्तीन में कई विकास परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया है, जिनमें स्कूल, अस्पताल, आईटी केंद्र और प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। यह सहयोग केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय और विकासात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है।
रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका
वर्तमान वैश्विक व्यवस्था तेजी से बहुध्रुवीय होती जा रही है, जहाँ विभिन्न शक्तियाँ क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। ऐसे समय में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलित विदेश नीति विशेष महत्व रखती है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के सिद्धांत को वैश्विक कूटनीति में भी लागू किया है। भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और एशिया-प्रशांत देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए अपनी स्वतंत्र नीति को कायम रखा है।
इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों से सम्मान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि भारत किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह संवाद, सहयोग और शांति पर आधारित वैश्विक संतुलन का समर्थक है।
पश्चिम एशिया में भारत के हित और रणनीतिक महत्व
पश्चिम एशिया भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि—
- यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है
- यहाँ बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी निवास करती है
- व्यापार और निवेश के महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं
- सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है
भारत की संतुलित नीति के कारण उसे क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने में सफलता मिली है। यही कारण है कि भारत को एक विश्वसनीय और संवाद समर्थक साझेदार के रूप में देखा जाता है।
व्यक्तिगत कूटनीति और नेतृत्व की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति को भी इस उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में भारत ने उच्चस्तरीय राजनयिक संवाद, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा दिया है।
उनकी विदेश यात्राएँ, द्विपक्षीय वार्ताएँ और वैश्विक मंचों पर दिए गए वक्तव्य भारत की वैश्विक छवि को सुदृढ़ करने में सहायक रहे हैं। इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों के साथ उनके सकारात्मक संबंध इस बात का प्रमाण हैं कि व्यक्तिगत नेतृत्व भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष: शांति, संतुलन और वैश्विक कूटनीति का प्रतीक
इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों द्वारा सम्मानित होना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की परिपक्व, संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति की ऐतिहासिक सफलता का प्रतीक है। यह सम्मान दर्शाता है कि भारत वैश्विक मंच पर शांति, संवाद और सहयोग का समर्थक राष्ट्र है, जो जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राप्त ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट (Knesset) मेडल’ और ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ जैसे सर्वोच्च सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा, स्वतंत्र कूटनीतिक दृष्टिकोण और पश्चिम एशिया में उसकी विश्वसनीय भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं।
भविष्य में यह उपलब्धि भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो यह संदेश देती है कि संवाद, संतुलन और सहयोग के माध्यम से ही वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। भारत का यह कूटनीतिक संतुलन न केवल पश्चिम एशिया में बल्कि पूरे विश्व में शांति, विकास और बहुपक्षीय सहयोग की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।
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