भारत की अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) यात्रा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली ‘अंडरवॉटर ट्विन ट्यूब’ सड़क सुरंग के निर्माण को अंतिम मंजूरी दे दी है। यह परियोजना केवल एक सड़क संपर्क नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के सामरिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदल देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है।
यह सुरंग असम के नुमालीगढ़ को गोहपुर से जोड़ेगी और ब्रह्मपुत्र नदी के तल के नीचे से होकर गुजरेगी। लगभग 33.7 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 15.79 किलोमीटर लंबी मुख्य अंडरवॉटर सुरंग होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹18,662 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
यह भारत की पहली ऐसी सड़क सुरंग होगी जो नदी के तल के नीचे दो समानांतर ट्यूबों के रूप में निर्मित की जाएगी। इस लेख में हम इस परियोजना की पृष्ठभूमि, संरचना, तकनीकी विशेषताओं, सामरिक महत्व, आर्थिक प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय तुलना तथा भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
परियोजना का परिचय: ब्रह्मपुत्र के नीचे एक नया मार्ग
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से भौगोलिक चुनौतियों और सीमित संपर्क साधनों से जूझता रहा है। विशाल और उग्र प्रवाह वाली ब्रह्मपुत्र नदी इस क्षेत्र की जीवनरेखा होने के साथ-साथ आवागमन के लिए बड़ी बाधा भी रही है।
असम में ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच संपर्क के लिए अब तक मुख्यतः पुलों का उपयोग किया जाता रहा है। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने, बाढ़ की स्थिति या आपातकालीन परिस्थितियों में पुलों की उपयोगिता सीमित हो जाती है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ब्रह्मपुत्र नदी के तल के नीचे ‘ट्विन ट्यूब’ सड़क सुरंग बनाने का निर्णय लिया गया है। यह सुरंग नदी के तल से कम से कम 32 मीटर नीचे स्थित होगी, जिससे यह बाहरी परिस्थितियों से सुरक्षित और स्थिर संपर्क प्रदान करेगी।
स्थान और भौगोलिक संदर्भ
यह सुरंग असम के गोलाघाट जिले में स्थित नुमालीगढ़ को उत्तर तट के गोहपुर से जोड़ेगी। वर्तमान में नुमालीगढ़ से गोहपुर तक जाने के लिए यात्रियों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ता है, जिसमें पुलों के माध्यम से नदी पार की जाती है।
सुरंग बनने के बाद यह दूरी और यात्रा समय दोनों में भारी कमी आएगी। अनुमान है कि जहां अभी कई घंटे लग जाते हैं, वहीं नई सुरंग के माध्यम से यह यात्रा मात्र 15–20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
यह परियोजना ब्रह्मपुत्र के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के बीच उत्तर-दक्षिण गलियारे (North-South Corridor) के रूप में भी विकसित होगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बल मिलेगा।
संरचना: ट्विन ट्यूब डिजाइन की विशेषताएँ
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका ‘ट्विन ट्यूब’ (दोहरी सुरंग) स्वरूप है।
(i) दो समानांतर ट्यूब
सुरंग में दो अलग-अलग समानांतर ट्यूब बनाई जाएंगी—
- एक ट्यूब का उपयोग आने वाले यातायात के लिए
- दूसरी ट्यूब का उपयोग जाने वाले यातायात के लिए
इस प्रकार यातायात को अलग-अलग दिशा में सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा।
(ii) सुरक्षा मानक
- प्रत्येक ट्यूब में अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम
- अग्निशमन प्रणाली
- आपातकालीन निकास मार्ग
- सीसीटीवी निगरानी
- संचार नेटवर्क
ट्विन ट्यूब डिजाइन दुर्घटना की स्थिति में जोखिम को कम करता है और यातायात को सुचारु बनाए रखने में सहायक होता है।
क्रियान्वयन एजेंसियाँ
इस परियोजना का क्रियान्वयन दो प्रमुख एजेंसियों के सहयोग से किया जा रहा है—
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
- सीमा सड़क संगठन (BRO)
NHAI देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार संस्था है, जबकि BRO सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़क अवसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञता रखता है।
इन दोनों एजेंसियों का संयुक्त प्रयास इस परियोजना को तकनीकी दक्षता और सामरिक मजबूती प्रदान करेगा।
सामरिक महत्व: चीन सीमा तक त्वरित पहुँच
यह सुरंग केवल नागरिक उपयोग के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
असम और अरुणाचल प्रदेश का क्षेत्र सामरिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित है।
सुरंग बनने के बाद—
- सैन्य वाहनों की आवाजाही तेज होगी
- सैनिकों और उपकरणों की त्वरित तैनाती संभव होगी
- युद्धकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित संपर्क मार्ग उपलब्ध रहेगा
चूंकि सुरंग नदी के तल के नीचे होगी, इसलिए यह दुश्मन की हवाई निगरानी और हमलों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहेगी। इस प्रकार यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सभी मौसमों में निर्बाध कनेक्टिविटी
ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल मानसून के दौरान बाढ़ या तेज जलप्रवाह से प्रभावित हो सकते हैं। प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध जैसी परिस्थितियों में पुलों को क्षति पहुँचने की आशंका रहती है।
अंडरवॉटर सुरंग इन जोखिमों से मुक्त एक स्थायी विकल्प प्रस्तुत करती है।
- मानसून में भी निर्बाध यातायात
- आपातकालीन स्थितियों में वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग
- परिवहन में स्थिरता और विश्वसनीयता
इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।
लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक एकीकरण
नुमालीगढ़ में स्थित तेल रिफाइनरी इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई है। सुरंग बनने से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को उत्तरी असम और अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक क्षेत्रों से सीधा संपर्क मिलेगा।
इससे—
- ईंधन आपूर्ति में तेजी
- परिवहन लागत में कमी
- औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन
- लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार
यह परियोजना क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए उत्प्रेरक (Catalyst) का कार्य करेगी।
समय और ईंधन की बचत
वर्तमान में नुमालीगढ़ से गोहपुर जाने के लिए यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पुलों के माध्यम से नदी पार करने में समय अधिक लगता है।
नई सुरंग—
- यात्रा समय को घंटों से घटाकर 15–20 मिनट कर देगी
- ईंधन की बचत होगी
- परिवहन लागत कम होगी
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी
यह न केवल यात्रियों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
(i) व्यापार को बढ़ावा
उत्तर और दक्षिण तट के बीच व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
(ii) पर्यटन में वृद्धि
पूर्वोत्तर भारत प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। बेहतर संपर्क से पर्यटन को नई गति मिलेगी।
(iii) रोजगार सृजन
निर्माण चरण में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। संचालन और रखरखाव में भी रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
(iv) क्षेत्रीय संतुलित विकास
यह परियोजना क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायक होगी।
अंतरराष्ट्रीय तुलना
विश्व में अंडरवॉटर सुरंगों का सफल उदाहरण पहले से मौजूद है।
- इंग्लिश चैनल टनल – यह यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को जोड़ती है और समुद्र के नीचे निर्मित एक ऐतिहासिक सुरंग है।
- सीकन टनल – जापान में स्थित यह दुनिया की सबसे लंबी अंडरवॉटर रेल सुरंगों में से एक है।
भारत में भी इस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया जा चुका है—
- कोलकाता मेट्रो के तहत हुगली नदी के नीचे मेट्रो सुरंग बनाई गई है, जो देश में नदी के नीचे सुरंग निर्माण का सफल उदाहरण है।
असम की यह नई परियोजना इन्हीं वैश्विक मानकों पर आधारित होगी।
तकनीकी चुनौतियाँ और समाधान
अंडरवॉटर सुरंग का निर्माण अत्यंत जटिल प्रक्रिया है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
- नदी तल की भूगर्भीय संरचना
- जल दाब (Water Pressure)
- रिसाव रोकथाम
- भूकंपीय गतिविधियाँ
संभावित समाधान:
- उन्नत टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग
- वाटरप्रूफ लाइनिंग
- अत्याधुनिक ड्रेनेज प्रणाली
- निरंतर निगरानी प्रणाली
भारत ने हाल के वर्षों में सुरंग निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे इस परियोजना को तकनीकी रूप से सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता मजबूत हुई है।
पूर्वोत्तर के लिए परिवर्तनकारी पहल
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय तक ‘दूरस्थ क्षेत्र’ के रूप में देखा जाता रहा है। केंद्र सरकार की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने इस धारणा को बदलने की दिशा में कार्य किया है।
यह सुरंग—
- पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ेगी
- सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को गति देगी
- सामाजिक-आर्थिक एकीकरण को बढ़ाएगी
पर्यावरणीय संतुलन
परियोजना के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
- नदी पारिस्थितिकी की सुरक्षा
- निर्माण के दौरान प्रदूषण नियंत्रण
- हरित निर्माण तकनीकों का उपयोग
इस प्रकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
निष्कर्ष: अवसंरचना के नए युग की शुरुआत
असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली भारत की पहली अंडरवॉटर ट्विन ट्यूब सड़क सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं है, बल्कि यह नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
यह परियोजना—
- सामरिक रूप से महत्वपूर्ण
- आर्थिक रूप से लाभकारी
- तकनीकी रूप से उन्नत
- सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी
साबित होगी।
नुमालीगढ़ और गोहपुर के बीच यह सुरंग पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई दिशा देगी और भारत को विश्वस्तरीय अवसंरचना निर्माण के क्षेत्र में एक नई पहचान प्रदान करेगी।
ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाला यह मार्ग आने वाले वर्षों में न केवल असम, बल्कि पूरे देश के लिए प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि का सेतु बनेगा।
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