सुहाग की साड़ी | कहानी – मुंशी प्रेमचंद
सुहाग की साड़ी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखी गयी एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। आजादी…
Read More →देविका श्रीवास्तव (Devika Srivastava) हिंदी विषय की एक अनुभवी शिक्षिका (Educator) और कंटेंट राइटर हैं, जिन्होंने M.A. (Hindi), M.A. (Sociology), B.Ed. तथा B.A. (Hindi, Sociology, Political Science) और B.A. (Sanskrit – Single Subject) की शिक्षा प्राप्त की है। इन्हें हिंदी व्याकरण, साहित्य, संस्कृत एवं शिक्षा क्षेत्र में गहरी समझ और कई वर्षों का अनुभव है। देविका जी ने विद्यालय स्तर पर कई वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य प्रदान किया है, जिससे उन्हें बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, उनकी आवश्यकताओं तथा प्रभावी शिक्षण विधियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ है। इस अनुभव के आधार पर वे विषयों को सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों के अनुकूल तरीके से प्रस्तुत करती हैं। देविका जी विशेष रूप से हिंदी व्याकरण, संस्कृत, बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP - Child Development and Pedagogy) तथा अन्य शैक्षिक विषयों पर लेख लिखती हैं, जिससे विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को विषय समझने में आसानी होती है। इनका उद्देश्य छात्रों को विश्वसनीय, सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
सुहाग की साड़ी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखी गयी एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। आजादी…
Read More →दिल की रानी कहानी की शुरुआत तैमूर की इतिहाससम्मत क्रूरता, निर्दयता और आतंक को उद्घाटित करने से होती…
Read More →जुलूस कहानी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखी गई राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत एक कहानी है। यह कहानी…
Read More →शतरंज के खिलाड़ी मुंशी प्रेमचंद जी की हिन्दी कहानी है। इसकी रचना उन्होने अक्टूबर 1924 में की थी और यह…
Read More →ईदगाह मुंशी प्रेमचंद की सुप्रसिद्ध कहानियों में एक है। इस में एक अनाथ बालक की कहानी बताई गई…
Read More →“दो बैलों की कथा” में मुंशी प्रेमचंद ने दो बैलों, हीरा और मोती, की कहानी को बताया है।…
Read More →मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई सन् 1880 को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में…
Read More →36.दो दिन तक गाँव में ख़ूब धूमधाम रही। बाजे बजे, गाना-बजाना हुआ और रूपा रो-धोकर बिदा हो गयी;…
Read More →35.होरी की दशा दिन-दिन गिरती ही जा रही थी। जीवन के संघर्ष में उसे सदैव हार हुई; पर…
Read More →34.सिलिया का बालक अब दो साल का हो रहा था और सारे गाँव में दौड़ लगाता था। अपने…
Read More →