गोदान उपन्यास | भाग 23 – मुंशी प्रेमचंद
23गोबर और झुनिया के जाने के बाद घर सुनसान रहने लगा। धनिया को बार-बार मुन्नू की याद आती…
Read More →देविका श्रीवास्तव (Devika Srivastava) हिंदी विषय की एक अनुभवी शिक्षिका (Educator) और कंटेंट राइटर हैं, जिन्होंने M.A. (Hindi), M.A. (Sociology), B.Ed. तथा B.A. (Hindi, Sociology, Political Science) और B.A. (Sanskrit – Single Subject) की शिक्षा प्राप्त की है। इन्हें हिंदी व्याकरण, साहित्य, संस्कृत एवं शिक्षा क्षेत्र में गहरी समझ और कई वर्षों का अनुभव है। देविका जी ने विद्यालय स्तर पर कई वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य प्रदान किया है, जिससे उन्हें बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, उनकी आवश्यकताओं तथा प्रभावी शिक्षण विधियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ है। इस अनुभव के आधार पर वे विषयों को सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों के अनुकूल तरीके से प्रस्तुत करती हैं। देविका जी विशेष रूप से हिंदी व्याकरण, संस्कृत, बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP - Child Development and Pedagogy) तथा अन्य शैक्षिक विषयों पर लेख लिखती हैं, जिससे विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को विषय समझने में आसानी होती है। इनका उद्देश्य छात्रों को विश्वसनीय, सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
23गोबर और झुनिया के जाने के बाद घर सुनसान रहने लगा। धनिया को बार-बार मुन्नू की याद आती…
Read More →22.इधर कुछ दिनों से राय साहब की कन्या के विवाह की बातचीत हो रही थी। उसके साथ ही…
Read More →21.देहातों में साल के छः महीने किसी न किसी उत्सव में ढोल-मजीरा बजता रहता है। होली के एक…
Read More →20.फागुन अपनी झोली में नवजीवन की विभूति लेकर आ पहुँचा था। आम के पेड़ दोनों हाथों से बौर…
Read More →19.मिरज़ा खुर्शेद का हाता क्लब भी है, कचहरी भी, अखाड़ा भी। दिन भर जमघट लगा रहता है। मुहल्ले…
Read More →18.खन्ना और गोविन्दी में नहीं पटती। क्यों नहीं पटती, यह बताना कठिन है। ज्योतिष के हिसाब से उनके…
Read More →17.गाँव में ख़बर फैल गयी कि राय साहब ने पंचों को बुलाकर ख़ूब डाँटा और इन लोगों ने…
Read More →16.राय साहब को ख़बर मिली कि इलाक़े में एक वारदात हो गयी है और होरी से गाँव के…
Read More →15.मालती बाहर से तितली है, भीतर से मधुमक्खी। उसके जीवन में हँसी ही हँसी नहीं है, केवल गुड़…
Read More →14.होरी की फ़सल सारी की सारी डाँड़ की भेंट हो चुकी थी। वैशाख तो किसी तरह कटा, मगर…
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