भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित कर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को नई दिशा दी है। इन संशोधनों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए नियम पहले की तुलना में अधिक कड़े कर दिए गए हैं। सबसे उल्लेखनीय बदलावों में एआई-जनित (AI-generated) या सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) पर “स्पष्ट और प्रमुख” लेबल लगाना अनिवार्य करना तथा अवैध सामग्री हटाने की समय-सीमा को 36 घंटे से घटाकर केवल तीन घंटे करना शामिल है। गैर-सहमति से साझा की गई निजी या अंतरंग तस्वीरों के मामलों में यह सीमा और भी कम—सिर्फ दो घंटे—निर्धारित की गई है।
ये संशोधन 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य डीपफेक, भ्रामक सूचना, पहचान की गलत प्रस्तुति और गैर-सहमति से साझा की जाने वाली सामग्री जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। साथ ही, डिजिटल मंचों की जवाबदेही को मजबूत करना और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इन बदलावों का प्रमुख लक्ष्य है।
पृष्ठभूमि: डिजिटल विस्तार और नियामकीय आवश्यकता
पिछले एक दशक में भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक बनकर उभरा है। स्मार्टफोन की पहुंच, सस्ते इंटरनेट डेटा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता ने सूचना के आदान-प्रदान को तीव्र और व्यापक बना दिया है। हालांकि, इस डिजिटल क्रांति के साथ कई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं—फेक न्यूज, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें, पहचान की चोरी, और एआई-निर्मित भ्रामक सामग्री का प्रसार।
विशेष रूप से जेनरेटिव एआई (Generative AI) तकनीकों के तेज विकास ने टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो और छवियों के निर्माण को इतना सहज बना दिया है कि आम उपयोगकर्ता भी कुछ ही क्लिक में अत्यंत यथार्थवादी सामग्री तैयार कर सकता है। इससे अभिव्यक्ति के नए अवसर तो पैदा हुए हैं, लेकिन साथ ही गलत सूचना, प्रतिष्ठा-हानि और साइबर अपराध की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं।
इन्हीं चुनौतियों के मद्देनजर सरकार ने आईटी नियम 2021 में संशोधन कर उन्हें समकालीन तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप बनाया है।
एआई-जनित सामग्री पर अनिवार्य लेबलिंग
संशोधित नियमों के अनुसार, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई-जनित या सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से दिखाई देने वाला लेबल लगाया जाए। इसका अर्थ है कि यदि कोई पोस्ट, वीडियो, ऑडियो क्लिप या छवि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से बनाई गई है, तो उपयोगकर्ता को यह जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
“स्पष्ट और प्रमुख” का क्या अर्थ?
पहले प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि एआई लेबल सामग्री के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से पर प्रदर्शित होना चाहिए। हालांकि, तकनीकी कंपनियों और हितधारकों से परामर्श के बाद इस प्रतिशत-आधारित सीमा को हटा दिया गया। अब मुख्य जोर इस बात पर है कि लेबल ऐसा हो जो उपयोगकर्ता को तुरंत और आसानी से दिखाई दे—यानी उसे छिपाया, दबाया या अस्पष्ट नहीं किया जा सके।
एक बार एआई लेबल लगा दिया जाए, तो उसे हटाना या निष्क्रिय करना संभव नहीं होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामग्री की प्रकृति के बारे में पारदर्शिता बनी रहे और उपयोगकर्ता यह समझ सकें कि वह वास्तविक सामग्री देख रहा है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई।
उपयोगकर्ता घोषणा और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत उपयोगकर्ताओं को यह घोषित करना होगा कि उनकी सामग्री एआई-जनित है। लेकिन केवल उपयोगकर्ता की घोषणा पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। प्लेटफॉर्म्स को उचित तकनीकी उपायों के माध्यम से इस घोषणा की पुष्टि करनी होगी और फिर प्रमुख लेबल प्रदर्शित करना होगा।
यह प्रावधान इस विचार पर आधारित है कि केवल स्व-घोषणा (self-declaration) पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कई उपयोगकर्ता जानबूझकर जानकारी छिपा सकते हैं। इसलिए प्लेटफॉर्म की सक्रिय भूमिका आवश्यक मानी गई है।
तीन घंटे में अवैध सामग्री हटाने का प्रावधान
आईटी नियम 2021 के संशोधन में सबसे बड़ा और विवादास्पद बदलाव सामग्री हटाने की समय-सीमा में किया गया है। पहले अवैध सामग्री को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। अब इसे घटाकर केवल तीन घंटे कर दिया गया है।
गैर-सहमति से साझा की गई निजी सामग्री
यदि मामला गैर-सहमति से साझा की गई निजी या अंतरंग तस्वीरों से संबंधित है—जैसे मॉर्फ की गई छवियाँ या निजी वीडियो—तो प्लेटफॉर्म को केवल दो घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
यह प्रावधान विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसी सामग्री अत्यंत तेजी से वायरल हो सकती है और पीड़ित को अपूरणीय मानसिक, सामाजिक और पेशेवर नुकसान पहुंचा सकती है।
त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता
सरकार का तर्क है कि डिजिटल दुनिया में सामग्री कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है। ऐसे में 36 घंटे की समय-सीमा अपर्याप्त थी। तीन घंटे की सीमा से हानिकारक सामग्री के वायरल होने से पहले ही उसे रोका जा सकेगा।
हालांकि, कुछ कानूनी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकार संगठनों ने आशंका जताई है कि इतनी कम समय-सीमा से प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा, जिससे वे “सावधानी के नाम पर” अधिक सामग्री हटाने लग सकते हैं। इसे अति-सेंसरशिप (Over-censorship) का जोखिम बताया जा रहा है।
“सेफ हार्बर” प्रावधान और उसका महत्व
आईटी अधिनियम के तहत “सेफ हार्बर” एक महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाती है।
सेफ हार्बर कैसे काम करता है?
यदि कोई उपयोगकर्ता अवैध या आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करता है, तो सामान्यतः प्लेटफॉर्म को तब तक जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, जब तक वह निर्धारित सावधानी मानकों का पालन कर रहा हो और शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई करे।
लेकिन यदि प्लेटफॉर्म तीन घंटे की नई समय-सीमा का पालन नहीं करता, तो वह इस “सेफ हार्बर” सुरक्षा को खो सकता है। इसका अर्थ है कि उसे कानूनी दायित्वों और दंड का सामना करना पड़ सकता है।
जवाबदेही में वृद्धि
इस प्रावधान से प्लेटफॉर्म्स को अधिक सक्रिय निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना होगा। उन्हें मजबूत शिकायत-निवारण प्रणाली, 24×7 मॉडरेशन टीम और उन्नत एआई-आधारित पहचान तंत्र स्थापित करने होंगे।
सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) की परिभाषा
संशोधित नियमों में SGI की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
किन उपयोगों को छूट?
एआई के सहायक या गुणवत्ता-सुधार वाले उपयोग—जैसे फोटो की रोशनी ठीक करना, शोर कम करना, या साधारण संपादन—SGI की श्रेणी में नहीं आएंगे। यदि संपादन सद्भावना में किया गया है और उससे वास्तविकता की भ्रामक प्रस्तुति नहीं होती, तो उसे प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा।
किन मामलों में कार्रवाई आवश्यक?
यदि प्लेटफॉर्म को पता चलता है कि उसकी सेवाओं का उपयोग अवैध SGI बनाने में हो रहा है—जैसे किसी व्यक्ति की पहचान बदलकर वीडियो बनाना या किसी घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत करना—तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
यह कार्रवाई निम्न रूपों में हो सकती है:
- सामग्री हटाना
- एक्सेस रोकना
- संबंधित उपयोगकर्ता खाते को निलंबित करना
तकनीकी उपाय और अनुपालन तंत्र
नए नियमों के तहत मध्यस्थों को उचित तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि अवैध SGI के प्रसार को रोका जा सके। इसमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
- एआई-आधारित कंटेंट डिटेक्शन सिस्टम
- डीपफेक पहचान उपकरण
- मजबूत रिपोर्टिंग और शिकायत तंत्र
- 24×7 नोडल अधिकारी और संपर्क अधिकारी की नियुक्ति
प्लेटफॉर्म्स को ऐसे SGI को रोकना होगा जो वास्तविक घटनाओं या किसी व्यक्ति की पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत करता हो। डीपफेक तकनीक के माध्यम से तैयार वीडियो और ऑडियो क्लिप्स इस श्रेणी में आते हैं।
डीपफेक और एआई दुरुपयोग: बढ़ती वैश्विक चिंता
दुनिया भर में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं—चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने से लेकर सार्वजनिक हस्तियों की छवि खराब करने तक।
भारत में भी एआई-निर्मित आपत्तिजनक सामग्री और मॉर्फ की गई तस्वीरों के मामले बढ़े हैं। इससे न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान होता है, बल्कि सामाजिक तनाव और गलत सूचना के प्रसार की समस्या भी उत्पन्न होती है।
सरकार का मानना है कि संशोधित आईटी नियम 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
संभावित प्रभाव और चुनौतियाँ
सकारात्मक प्रभाव
- उपयोगकर्ताओं को अधिक पारदर्शिता
- डीपफेक और फेक न्यूज पर नियंत्रण
- पीड़ितों को त्वरित राहत
- प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही में वृद्धि
संभावित चुनौतियाँ
- संचालन संबंधी कठिनाइयाँ
- मॉडरेशन लागत में वृद्धि
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव की आशंका
- छोटी कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ
निष्कर्ष
आईटी नियम 2021 में किया गया यह संशोधन भारत के डिजिटल नियामक ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है। एआई-जनित सामग्री पर अनिवार्य लेबलिंग और तीन घंटे की सख्त समय-सीमा से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि डिजिटल मंचों पर जवाबदेही और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।
हालांकि, इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक होगा—ऐसा संतुलन जो एक ओर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नवाचार को बाधित न करे।
डिजिटल युग में जहां तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, वहां नियमन भी उतना ही गतिशील और उत्तरदायी होना चाहिए। संशोधित आईटी नियम 2021 इसी दिशा में भारत का एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम प्रतीत होते हैं।
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