असम में पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)

भारत सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में तीव्र अवसंरचनात्मक विकास की दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरन बाईपास (NH-37/NH-127) पर पूर्वोत्तर भारत की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility – ELF) का उद्घाटन किया। यह परियोजना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक तैयारी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आपदा प्रबंधन, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, सैन्य-नागरिक समन्वय और ‘ड्यूल-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु सहित कई प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जो ₹5,450 करोड़ से अधिक के व्यापक विकास अभियान का हिस्सा हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना, सामरिक तैयारियों को मजबूत करना, शहरी गतिशीलता में सुधार करना तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति देना है।

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आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility – ELF) क्या होती है?

आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) राष्ट्रीय राजमार्गों का वह विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया खंड होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर यह एक अस्थायी रनवे के रूप में कार्य कर सके। सामान्य परिस्थितियों में यह सड़क आम यातायात के लिए उपयोग में रहती है, जबकि आपातकाल, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या सैन्य संचालन के समय इस पर लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकते हैं।

ELF की सबसे प्रमुख विशेषता इसका अत्यधिक मजबूत निर्माण होता है। सामान्य सड़कों की तुलना में इनका निर्माण पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) या प्रबलित कंक्रीट से किया जाता है, ताकि वे भारी विमानों के वजन, लैंडिंग के दौरान उत्पन्न घर्षण (Friction) और तापीय दबाव को सहन कर सकें। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार की पट्टियों को समतल, अवरोध-मुक्त और पर्याप्त लंबाई के साथ बनाया जाता है ताकि उच्च गति से उतरने वाले विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके।

ELF मूलतः ‘ड्यूल-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर’ का हिस्सा है, जिसका अर्थ है कि एक ही अवसंरचना का उपयोग नागरिक और सैन्य—दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। आधुनिक रणनीतिक ढांचे में इस प्रकार की सुविधाएँ किसी भी देश की रक्षा तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का महत्वपूर्ण अंग मानी जाती हैं।

मोरन बाईपास ELF: स्थान, निर्माण और तकनीकी विशेषताएँ

पूर्वोत्तर भारत की पहली हाईवे आधारित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरन बाईपास पर राष्ट्रीय राजमार्ग 37 (अब NH-127) के एक विशेष खंड पर विकसित की गई है। यह क्षेत्र ऊपरी असम (Upper Assam) में स्थित है, जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस ELF की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. स्थान

  • मोरन बाईपास, डिब्रूगढ़ जिला, असम
  • राष्ट्रीय राजमार्ग 37 (वर्तमान NH-127) पर निर्मित
  • ऊपरी असम क्षेत्र, जो भारत-चीन सीमा (LAC) के अपेक्षाकृत निकट स्थित है

2. लंबाई और संरचना

यह इमरजेंसी लैंडिंग पट्टी लगभग 4.2 किलोमीटर लंबी है, जिसे विशेष रूप से लड़ाकू और भारी मालवाहक विमानों के संचालन के लिए सुदृढ़ किया गया है। इस लंबाई को इस प्रकार निर्धारित किया गया है कि उच्च गति से आने वाले आधुनिक लड़ाकू विमान सुरक्षित रूप से उतर सकें और पुनः टेक-ऑफ कर सकें।

3. निर्माण लागत और एजेंसी

इस परियोजना का निर्माण लगभग ₹100 करोड़ की लागत से किया गया है। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा भारतीय वायु सेना के समन्वय से विकसित किया गया है। यह सैन्य और नागरिक एजेंसियों के संयुक्त प्रयास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

4. निर्माण सामग्री और तकनीक

  • पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) का उपयोग
  • प्रबलित कंक्रीट संरचना
  • उच्च भार सहन क्षमता
  • तापमान और घर्षण प्रतिरोधी सतह

इस प्रकार की उन्नत निर्माण सामग्री विमानों के उतरने के दौरान लगने वाले अत्यधिक दबाव को सहन करने में सक्षम होती है, जिससे दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित होता है।

5. सेंट्रल डिवाइडर का अभाव

विमानों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए इस राजमार्ग खंड के मध्य में कोई सेंट्रल डिवाइडर नहीं रखा गया है। इससे विमान बिना किसी अवरोध के सीधी रनवे जैसी सतह पर संचालित हो सकते हैं।

6. सुरक्षा और संचालन व्यवस्था

  • सड़क किनारे की अस्थायी संरचनाओं को हटाया गया
  • सुरक्षा हेतु फेंसिंग की व्यवस्था
  • आपात संचालन के लिए त्वरित यातायात नियंत्रण प्रणाली
  • विमान संचालन के दौरान यातायात का अस्थायी डायवर्जन

विमान संचालन क्षमता और प्रदर्शन

मोरन ELF की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी उच्च विमान संचालन क्षमता है। यह सुविधा विभिन्न प्रकार के सैन्य और परिवहन विमानों के संचालन के लिए सक्षम है।

लड़ाकू विमान क्षमता

यह पट्टी 40 टन तक के आधुनिक लड़ाकू विमानों को संभाल सकती है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • Dassault Rafale
  • Sukhoi Su-30MKI

परिवहन विमान क्षमता

यह सुविधा लगभग 74 टन तक के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों के संचालन में सक्षम है, जैसे—

  • C-130J Super Hercules

उद्घाटन के तुरंत बाद भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने इस राजमार्ग खंड पर सफल टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया, जो इसकी तकनीकी विश्वसनीयता और संचालन क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को बड़ी संख्या में दर्शकों ने देखा, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

कुमार भास्कर वर्मा सेतु: पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव

प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित अन्य प्रमुख परियोजनाओं में गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु भी शामिल है, जो पूर्वोत्तर भारत की शहरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पुल की प्रमुख विशेषताएँ

  • लंबाई: 2.86 किलोमीटर
  • छह-लेन एक्स्ट्राडोज्ड प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) पुल
  • निर्माण लागत: लगभग ₹3,030 करोड़
  • गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है

यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है, जो उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके बनाया गया है।

उन्नत तकनीकी नवाचार

  • फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग के साथ बेस आइसोलेशन तकनीक
  • उच्च-प्रदर्शन स्टे केबल्स
  • ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) द्वारा रियल-टाइम निगरानी

इस पुल के शुरू होने से गुवाहाटी के दोनों हिस्सों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग सात मिनट रह जाने की संभावना है, जिससे शहरी यातायात में उल्लेखनीय सुधार होगा।

सामरिक महत्व: राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ELF की भूमिका

पूर्वोत्तर भारत भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। असम का ऊपरी भाग भारत-चीन सीमा (LAC) और म्यांमार के निकट स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में मोरन ELF राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

1. वैकल्पिक एयरबेस के रूप में उपयोग

यदि डिब्रूगढ़ हवाई अड्डा या चाबुआ वायुसेना स्टेशन किसी कारणवश उपलब्ध न हो, तो यह ELF एक वैकल्पिक लैंडिंग और टेक-ऑफ केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

2. त्वरित सैन्य तैनाती

आपात स्थिति या युद्ध के समय:

  • सैनिकों की त्वरित तैनाती
  • सैन्य उपकरणों की आपूर्ति
  • हवाई निगरानी मिशन
  • सामरिक ऑपरेशन

इन सभी कार्यों को अत्यधिक तेजी से अंजाम दिया जा सकता है।

3. ऑपरेशनल सरप्राइज और रेडंडेंसी

स्थायी एयरबेस के विपरीत हाईवे आधारित रनवे शत्रु के लिए अप्रत्याशित (Operational Surprise) विकल्प प्रदान करते हैं। इससे सैन्य रणनीति में लचीलापन और अतिरिक्त संचालन विकल्प (Redundancy) उपलब्ध होते हैं।

आपदा प्रबंधन में ELF की उपयोगिता

पूर्वोत्तर भारत बाढ़, भूकंप और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसी परिस्थितियों में सड़क संपर्क अक्सर बाधित हो जाता है। इस संदर्भ में मोरन ELF एक ‘लाइफलाइन’ के रूप में कार्य कर सकता है।

प्रमुख आपदा-प्रबंधन लाभ

  • राहत सामग्री की त्वरित आपूर्ति
  • चिकित्सा सहायता की शीघ्र उपलब्धता
  • बचाव दल की त्वरित तैनाती
  • दूरदराज क्षेत्रों तक एयरलिफ्ट सुविधा

यदि किसी बड़े प्राकृतिक संकट के दौरान हवाई अड्डे प्रभावित हो जाएँ, तो यह राजमार्ग पट्टी वैकल्पिक एयरलिफ्ट केंद्र के रूप में कार्य कर सकती है।

ड्यूल-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास और रक्षा का संगम

मोरन ELF ‘ड्यूल-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें एक ही अवसंरचना का उपयोग शांति और आपातकाल—दोनों परिस्थितियों में किया जा सकता है।

सामान्य समय में उपयोग

  • वाणिज्यिक यातायात
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
  • आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा

आपातकालीन समय में उपयोग

  • सैन्य विमान संचालन
  • आपदा राहत मिशन
  • रणनीतिक तैनाती

यह मॉडल संसाधनों के बेहतर उपयोग और लागत प्रभावशीलता को भी सुनिश्चित करता है।

‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और पूर्वोत्तर विकास में भूमिका

भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र को ‘भारत का पूर्वी प्रवेश द्वार’ (Eastern Gateway) माना जाता है। मोरन ELF जैसी परियोजनाएँ इस नीति को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने में सहायक हैं।

यह सुविधा:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों का एकीकरण बढ़ाएगी
  • व्यापार और लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करेगी
  • क्षेत्रीय विकास को गति देगी
  • सामरिक अवसंरचना को मजबूत करेगी

राष्ट्रीय स्तर पर ELF नेटवर्क का विकास

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड के तहत पूरे देश में 28 संभावित ELF स्थलों की पहचान की है। इससे देश के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में हाईवे आधारित रनवे विकसित किए जा रहे हैं।

भारत की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा राजस्थान के बाड़मेर जिले में NH-925A पर वर्ष 2021 में बनाई गई थी। इसके बाद अब पूर्वोत्तर भारत में मोरन ELF का निर्माण क्षेत्रीय संतुलित विकास और रणनीतिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह पहल ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत नागरिक और सैन्य अवसंरचना के एकीकृत विकास का सशक्त उदाहरण है, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ प्राथमिकता दी जाती है।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और क्षेत्रीय लाभ

मोरन ELF और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं का प्रभाव केवल रणनीतिक या सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके व्यापक सामाजिक-आर्थिक लाभ भी हैं।

1. रोजगार सृजन

निर्माण और रखरखाव कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

2. पर्यटन को बढ़ावा

बेहतर कनेक्टिविटी से असम और पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान होगी।

3. व्यापार और लॉजिस्टिक्स में सुधार

उन्नत सड़क अवसंरचना से माल परिवहन की गति बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी।

4. क्षेत्रीय संतुलित विकास

पूर्वोत्तर क्षेत्र, जो लंबे समय से अवसंरचनात्मक चुनौतियों का सामना करता रहा है, अब राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा।

निष्कर्ष

असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरन बाईपास पर निर्मित पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) भारत की सामरिक दूरदर्शिता, आधुनिक अवसंरचना विकास और आपदा-तैयार शासन मॉडल का प्रतीक है। यह परियोजना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करती है, बल्कि आपदा प्रबंधन, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और सैन्य-नागरिक समन्वय को भी नई दिशा प्रदान करती है।

कुमार भास्कर वर्मा सेतु और मोरन ELF जैसी परियोजनाएँ यह दर्शाती हैं कि भारत अब पारंपरिक अवसंरचना विकास से आगे बढ़कर बहु-उद्देश्यीय, टिकाऊ और रणनीतिक अवसंरचना की दिशा में अग्रसर है। पूर्वोत्तर भारत, जो भौगोलिक रूप से संवेदनशील और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, अब ऐसी परियोजनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा ढांचे में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

इस प्रकार, मोरन ELF केवल एक राजमार्ग खंड नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं, आपदा प्रतिक्रिया क्षमता और समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर विकसित किया गया एक दूरदर्शी अवसंरचनात्मक नवाचार है, जो भारत के ‘सुरक्षित, सक्षम और सशक्त’ राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मूर्त रूप देता है।


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